Yogi AdityanathYogi Adityanath

23 जनवरी 2026, Yogi Adityanath की ‘कालनेमि’ टिप्पणी पर बढ़ता विवाद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘कालनेमि’ वाली टिप्पणी ने प्रयागराज माघ मेले से जुड़े विवाद को नई ऊंचाई दे दी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच एनडीटीवी पर हुई तीखी बहस ने मामला और गरमा दिया। योगी ने बिना नाम लिए कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने वाले कई ‘कालनेमि’ सक्रिय हैं, जिसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर इशारा माना जा रहा है। इस बयान से धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हंगामा मच गया है।

पृष्ठभूमि: माघ मेले में शुरू हुआ विवाद

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 के दौरान विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या से हुई। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य दावेदार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती स्नान करने पहुंचे, लेकिन मेला प्रशासन ने उन्हें बैरियर तोड़ने और रूट उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नोटिस जारी किया। प्रशासन ने उनसे शंकराचार्य पद का प्रमाण मांगते हुए दूसरा नोटिस भी भेजा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे शंकराचार्य परंपरा का अपमान बताते हुए संगम तट पर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और योगी सरकार सनातन परंपराओं को कुचल रही है। पहले भी स्वामी ने योगी को ‘औरंगजेब’ और ‘अकबर’ जैसा कहकर विवाद खड़ा किया था।

योगी का ‘कालनेमि’ प्रहार: क्या था बयान?

हरियाणा के सोनीपत में एक धार्मिक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रचने वाले कई कालनेमि सक्रिय हैं। बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। हमें उनसे सावधान रहना होगा।”

रामायण में कालनेमि एक मायावी राक्षस था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को धोखा देने की कोशिश की थी। योगी का यह बयान सीधे माघ मेला विवाद से जोड़कर देखा गया। उन्होंने आगे कहा कि सनातन परंपरा का प्रतिनिधि वही हो सकता है जिसका आचरण शुद्ध हो। किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं है।

अविमुक्तेश्वरानंद और रामभद्राचार्य की तीखी बहस

योगी के बयान के बाद एनडीटीवी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच सीधी बहस हुई, जो काफी गरमागरम रही। रामभद्राचार्य ने स्पष्ट कहा कि वे अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानते। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद की परंपरा निश्चित है और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तंज कसा, “रामभद्राचार्य जी मोदी जी के मित्र और योगी जी के करीबी हैं, इसलिए वे ऐसा कहेंगे।” उन्होंने योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, “कालनेमि कौन है, यह जनता जान चुकी है। योगी जी 12 साल से सत्ता में हैं, लेकिन गौ-हत्या नहीं रोक पाए। बयानवीर न बनें, मेरे साथ हुए अपमान का संज्ञान लें।”

स्वामी ने सहमति भी जताई कि धर्म की आड़ में अधर्म करने वाले कालनेमि जैसे हैं, लेकिन इशारा किसकी ओर है, नाम तो बताएं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सियासी रंग

विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी ने योगी पर हमला बोला, जबकि बीजेपी ने सनातन धर्म की रक्षा का मुद्दा उठाया। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि सनातन को कमजोर करने वाले असल में सत्ता के लोभी हैं। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने योगी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सनातन परंपराओं की रक्षा जरूरी है।

कई संतों ने योगी का पक्ष लिया, जबकि कुछ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के धरने को समर्थन दिया। शंकराचार्य पद को लेकर पुराना विवाद है – चार पीठों के शंकराचार्य इसे मान्यता नहीं देते।

प्रभाव: सनातन धर्म और परंपराओं पर सवाल

यह विवाद सनातन धर्म की परंपराओं, शंकराचार्य पद की वैधता और राज्य सरकार के धार्मिक आयोजनों में भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। माघ मेला जैसे विशाल आयोजन में लाखों श्रद्धालु आते हैं, और ऐसे विवाद से माहौल प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक सत्ता के बीच टकराव को दर्शाता है।

भारत में सनातन धर्म की एकता बनाए रखने के लिए ऐसे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान जरूरी है। अगर मामला बढ़ा तो मेला प्रशासन स्वामी का प्रवेश बैन कर सकता है।

संवाद की जरूरत

योगी आदित्यनाथ की ‘कालनेमि’ टिप्पणी ने विवाद को नया आयाम दिया है, लेकिन यह सनातन धर्म की शुद्धता और परंपराओं की रक्षा का भी मुद्दा उठाता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और रामभद्राचार्य जैसे संतों की बहस से स्पष्ट है कि शंकराचार्य पद को लेकर मतभेद गहरे हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह विवाद शांत होता है या और भड़कता है। सनातन समाज को एकजुट रहकर ऐसे मामलों का हल निकालना चाहिए।

Sources: एनडीटीवी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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