पटना। वक्फ संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज़ों के सत्यापन, डिजिटाइजेशन और रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए बिहार में एक बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। इसी क्रम में पटना स्थित मौलाना मजहरुल हक सभागार, गुलाम सरवर भवन (हज भवन के पास), पटना-1 में 20 नवंबर 2025 से 28 नवंबर 2025 तक विशेष शिविर लगाया जा रहा है। शिविर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होगा।
इस शिविर में वे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जिनके पास निम्न प्रकार की वक्फ से संबंधित संपत्तियाँ हैं—
मस्जिद, कब्रिस्तान, इमामबाड़ा, चौराहा, कर्बला, मदरसा, मजार, खानकाह, दरगाह आदि।
अधिकारियों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों के सही और प्रमाणित दस्तावेज़ समय पर उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद, अतिक्रमण या स्वामित्व से जुड़ी जटिलताओं से बचा जा सके।
कौन-कौन से दस्तावेज़ शिविर में स्वीकार किए जाएंगे?
लोग अपने वक्फ से संबंधित मूल अभिलेख या प्रमाण–
वक्फनामा
खतियान
केबाला
लगान रसीद
सर्वेक्षण संबंधी अभिलेख
किसी भी प्रकार के स्वामित्व या ऐतिहासिक दस्तावेज़
साथ लेकर शिविर में पहुँचकर जमा कर सकते हैं। शिविर में मौजूद तकनीकी टीम सभी प्रमाणों की जाँच कर उन्हें UMEED सेंट्रल पोर्टल पर अपलोड करेगी।
डिजिटाइजेशन से क्या होगा फायदा?
वक्फ बोर्ड का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से—
संपत्ति की पहचान आसान होगी,
अवैध कब्जे और विवाद रोकने में मदद मिलेगी,
सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से मिल सकेगा,
सभी दस्तावेज़ एक सुरक्षित डिजिटल डेटाबेस में उपलब्ध रहेंगे।
लोगों से अपील
वक्फ बोर्ड ने सभी संबंधित व्यक्तियों से अनुरोध किया है कि वे दिए गए समय में शिविर में अवश्य पहुँचें और सभी आवश्यक कागजातों के साथ प्रक्रिया पूरी कराएं। यह अभियान राज्य स्तर पर वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।