9 जनवरी 2026, Bhagalpur में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही: बिहार के Bhagalpur जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। कहलगांव प्रखंड के एकचारी पंचायत अंतर्गत श्रीमठ स्थान के पास एक झोलाछाप डॉक्टर ने यूट्यूब वीडियो देखकर गर्भवती महिला का ऑपरेशन किया, जिससे महिला की मौत हो गई। यह घटना 9 जनवरी 2026 को सामने आई, जब पीड़िता स्वाति देवी (31 वर्ष) की ऑपरेशन टेबल पर ही अत्यधिक रक्तस्राव से जान चली गई। नवजात शिशु को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन इस लापरवाही ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रसलपुर थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया, और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट में हम घटना की पृष्ठभूमि, आरोपी डॉक्टर, परिवार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इस तरह की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में अनधिकृत क्लीनिकों की समस्या को उजागर करती हैं, जहां बिना योग्यता के लोग जान जोखिम में डाल रहे हैं।
घटना की पृष्ठभूमि
Bhagalpur जिला, जो गंगा नदी के किनारे बसा है, अक्सर स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही की खबरों से सुर्खियों में रहता है। यह मामला कहलगांव के एकचारी गांव का है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों की कमी के कारण लोग झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर रहते हैं। स्वाति देवी का ससुराल झारखंड के ठाकुरगंटी मोढ़िया में है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान वह रसलपुर स्थित अपने मायके में रह रही थीं। उनकी देखभाल उनकी मां सुषमा देवी कर रही थीं। स्वाति के पिता जोगी शाह की मौत 15 साल पहले हो चुकी थी, और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है।
परिवार की स्थिति और शुरुआती घटनाक्रम
स्वाति के पति रोशन साह दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। 8 जनवरी 2026 की रात स्वाति को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव की आशा कार्यकर्ता ने उन्हें श्रीमठ स्थान के पास एक क्लीनिक का पता दिया। परिवार ने तुरंत उन्हें वहां भर्ती कराया। क्लीनिक में डॉक्टर ने जांच के बाद ऑपरेशन की जरूरत बताई और परिजनों से सहमति ली। लेकिन डॉक्टर के पास कोई योग्यता या डिग्री नहीं थी। उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो निकालकर ऑपरेशन की प्रक्रिया समझी और शुरू कर दिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर और उनके सहयोगी बार-बार वीडियो को रिपीट कर देख रहे थे, जो एक गंभीर लापरवाही थी।
आरोपी डॉक्टर और क्लीनिक
आरोपी डॉक्टर का नाम रंजीत मंडल है, जो रसलपुर निवासी सुभाष मंडल का पुत्र है। वह पिछले दो वर्षों से अमोद साह के मकान में एक अनधिकृत क्लीनिक चला रहा था। क्लीनिक पर कोई नाम या बोर्ड नहीं था, सिर्फ बाहर लाल पेंट से “इमरजेंसी सेवा 24 घंटे उपलब्ध” लिखा था। संपर्क नंबर को रंग से मिटा दिया गया था। रंजीत एक महिला और एक पुरुष सहयोगी के साथ काम करता था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पहली घटना नहीं है; पहले भी यहां यूट्यूब देखकर इलाज और ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। एक अन्य मामले में भी एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी थी, लेकिन मामला दबा दिया गया। डॉक्टर ने ऑपरेशन से पहले 30 हजार रुपये की मांग की, जो परिवार ने दिए। लेकिन बिना जरूरी मेडिकल सुविधाओं जैसे ब्लड बैंक या विशेषज्ञ की मौजूदगी के ऑपरेशन किया गया।
ऑपरेशन का विवरण
9 जनवरी की सुबह ऑपरेशन शुरू हुआ। डॉक्टर ने मोबाइल पर यूट्यूब वीडियो देखकर प्रक्रिया अपनाई। ऑपरेशन के दौरान स्वाति को अत्यधिक ब्लीडिंग हुई, जिससे उनकी मौत हो गई। नवजात शिशु को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन डॉक्टर घबरा गए। उन्होंने परिजनों को बताया कि हालत गंभीर है और दूसरे अस्पताल ले जाएं। इसके बाद क्लीनिक बंद कर सभी फरार हो गए। यह लापरवाही चिकित्सा के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है, जहां बिना प्रशिक्षण के ऐसी जटिल प्रक्रियाएं की जा रही हैं।
परिवार और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं
घटना के बाद स्वाति के परिजन सदमे में हैं। उनकी दादी संजू देवी ने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ता ने क्लीनिक का सुझाव दिया और पैसे भी लिए। परिजन राजेश कुमार ने बताया कि डॉक्टर वीडियो देखकर ऑपरेशन कर रहा था, जो उन्होंने खुद देखा। गुस्साए ग्रामीणों ने क्लीनिक के बाहर शव रखकर सड़क जाम कर दी और डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। स्थानीय निवासियों ने कहा कि ऐसे क्लीनिक ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, और प्रशासन की मिलीभगत से चल रहे हैं। इस हंगामे से इलाके में तनाव फैल गया, और लोग स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई
सूचना मिलते ही रसलपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया, शव को कब्जे में लेकर मायागंज अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पवन कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस ने आरोपी डॉक्टर की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने क्लीनिक को सील करने की प्रक्रिया शुरू की है।
आगे की दिशा
यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (लापरवाही से मौत) और चिकित्सा अधिनियमों के तहत जांचा जा रहा है। अगर दोष सिद्ध हुआ, तो डॉक्टर को कड़ी सजा हो सकती है। आशा कार्यकर्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे क्लीनिकों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए।
निष्कर्ष
यह घटना बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोर कड़ी को दर्शाती है, जहां गरीब लोग झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे हैं। स्वाति देवी की मौत एक चेतावनी है कि यूट्यूब जैसे माध्यमों से सीखकर चिकित्सा प्रक्रियाएं घातक साबित हो सकती हैं। सरकार को ऐसे क्लीनिकों पर सख्ती बरतनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों। परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है, और यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।
Sources: भास्कर, टीवी9 हिंदी