17 दिसंबर 2025, Calling Name Presentation CNAP)– आज के डिजिटल युग में, मोबाइल फोन हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं। हर दिन हम सैकड़ों कॉल्स प्राप्त करते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश अनजान नंबरों से आती हैं, जो स्पैम, फ्रॉड या अनचाही विज्ञापनों का रूप ले लेती हैं। भारत जैसे विशाल देश में, जहां 1.2 अरब से अधिक मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं, यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और दूरसंचार विभाग (DoT) ने इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए एक नई तकनीक पेश की है – Calling Name Presentation (CNAP)। यह सिस्टम कॉलर आईडी को अगले स्तर पर ले जाता है, जहां प्राप्तकर्ता के फोन पर न केवल कॉलर का नंबर, बल्कि उसका सत्यापित नाम भी प्रदर्शित होता है।
अक्टूबर 2025 में TRAI द्वारा अनुमोदित इस पहल से भारत को अपना स्वदेशी ‘ट्रूकॉलर’ मिलने वाला है। Calling Name Presentation (CNAP) का उद्देश्य स्पैम कॉल्स को कम करना, फ्रॉड से बचाव और कॉल स्क्रीनिंग को आसान बनाना है। यह रिपोर्ट Calling Name Presentation (CNAP) के कार्यान्वयन, लाभों, चुनौतियों और भविष्य पर विस्तार से चर्चा करेगी। यह रिपोर्ट आपकी वेबसाइट के लिए तैयार की गई है, जो तकनीकी और उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण से विषय को समझाने का प्रयास करेगी।
CNAP क्या है?
Calling Name Presentation (CNAP) एक टेलीकॉम सेवा है जो कॉल प्राप्त करने वाले उपयोगकर्ता के डिवाइस पर कॉलर का सत्यापित नाम प्रदर्शित करती है। पारंपरिक कॉलर आईडी केवल नंबर दिखाती है, लेकिन Calling Name Presentation (CNAP) KYC (नो योर कस्टमर) आधारित डेटाबेस से नाम को लिंक करती है। यह नाम कॉलर के सिम कार्ड रजिस्ट्रेशन के दौरान जमा किए गए कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) से लिया जाता है।
वैश्विक स्तर पर Calling Name Presentation (CNAP) का उपयोग कई देशों में हो रहा है, लेकिन भारत में यह DoT और TRAI की सिफारिशों पर आधारित है। फरवरी 2024 में TRAI ने Calling Name Presentation (CNAP) की सिफारिश की थी, जिसमें कहा गया था कि यह सेवा सब्सक्राइबर्स की मांग पर सक्रिय हो। हालांकि, अक्टूबर 2025 में DoT की सलाह पर TRAI ने इसे डिफॉल्ट ऑन कर दिया, जिसमें ऑप्ट-आउट विकल्प उपलब्ध है। इसका मतलब है कि सभी 4G और 5G फोन्स पर यह फीचर स्वचालित रूप से चालू होगा, लेकिन उपयोगकर्ता इसे बंद कर सकते हैं।
Calling Name Presentation (CNAP) का कार्य सिग्नलिंग प्रोटोकॉल पर आधारित है, जहां कॉलर के नेटवर्क से प्राप्तकर्ता के नेटवर्क को नाम की जानकारी भेजी जाती है। यह कोई ऐप-आधारित सेवा नहीं है, बल्कि नेटवर्क स्तर पर काम करती है, जिससे गोपनीयता और विश्वसनीयता बढ़ती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई बैंक कॉल करता है, तो स्क्रीन पर ‘SBI बैंक’ या रजिस्टर्ड नाम दिखेगा, न कि ‘अनजान नंबर’।
भारत में Calling Name Presentation (CNAP) का कार्यान्वयन
भारत में Calling Name Presentation (CNAP) का सफर 2024 से शुरू हुआ, जब TRAI ने DoT को सिफारिश सौंपी। अक्टूबर 2025 में TRAI ने DoT की संशोधित सिफारिश को स्वीकार किया, जिसके तहत CNAP को डिफॉल्ट सेवा बनाया गया। वर्तमान में (दिसंबर 2025 तक), पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा सर्कल में चल रहा है, जहां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और अन्य टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने परीक्षण शुरू किया है।
पूर्ण रोलआउट मार्च 31, 2026 तक होने की उम्मीद है। DoT ने सभी टेलीकॉम एक्सेस सर्विस प्रोवाइडर्स को निर्देश दिए हैं कि वे Calling Name Presentation (CNAP) को लागू करें। व्यवसायों को विशेष सुविधा मिलेगी, जहां वे अपना पसंदीदा नाम (जैसे ट्रेडमार्क या कंपनी नाम) प्रदर्शित कर सकेंगे। KYC डेटाबेस से डेटा लेने के लिए सेंट्रलाइज्ड सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) से जुड़ेगा।
पायलट में उपयोगकर्ताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उदाहरणस्वरूप, उबर या ओला जैसी सेवाओं से कॉल आने पर नाम दिखने से उपयोगकर्ता अधिक विश्वास करते हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में 2G/3G डिवाइसेस पर यह फीचर सीमित रहेगा, क्योंकि यह मुख्य रूप से 4G/5G पर निर्भर है। TRAI ने गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए डेटा एन्क्रिप्शन और ऑप्ट-आउट प्रक्रिया को अनिवार्य किया है।
तकनीकी पहलू
Calling Name Presentation (CNAP) की तकनीक सिग्नलिंग सिस्टम नंबर 7 (SS7) और डायनामिक नंबरिंग (DIAMETER) प्रोटोकॉल पर आधारित है। जब कोई कॉल शुरू होता है, तो ओरिजिनेटिंग नेटवर्क (कॉलर का) टर्मिनेटिंग नेटवर्क (प्राप्तकर्ता का) को CNAM (कॉलर नेम) मैसेज भेजता है। यह मैसेज HLR (होम लोकेशन रजिस्टर) या DNC (डू नॉट कॉल) डेटाबेस से जुड़कर नाम प्राप्त करता है।
भारत में, DoT KYC डेटाबेस को इंटरकनेक्ट करने के लिए एक नेशनल Calling Name Presentation (CNAP) प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म डेटा प्राइवेसी बिल 2023 के अनुरूप होगा, जहां नाम केवल कॉल के दौरान ही शेयर होता है, न कि स्थायी रूप से स्टोर। टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपग्रेडेशन की लागत वहन करनी होगी, अनुमानित रूप से 500-1000 करोड़ रुपये।
सुरक्षा के लिए, Calling Name Presentation (CNAP) स्पैम फिल्टरिंग से जुड़ेगी, जैसे ‘संदिग्ध’ या ‘स्पैम’ टैग। यदि कोई नंबर ब्लैकलिस्टेड है, तो नाम के साथ चेतावनी भी दिखेगी। यह सिस्टम AI-आधारित एनालिटिक्स से मजबूत होगा, जो असामान्य पैटर्न को डिटेक्ट करेगा।
लाभ
Calling Name Presentation (CNAP) के प्रमुख लाभ स्पैम और फ्रॉड से मुक्ति हैं। NCRB डेटा के अनुसार, 2024 में साइबर फ्रॉड के 1.5 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें से 40% फोन कॉल्स से संबंधित थे। CNAP से उपयोगकर्ता अनजान कॉल्स को आसानी से पहचान सकेंगे, जिससे कॉल अटेंडेंस रेट 30% कम हो सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए, यह गोपनीयता संतुलित रखते हुए सुविधा प्रदान करता है। व्यवसायों को ब्रांडिंग का लाभ मिलेगा, जैसे ‘अमेज़न कस्टमर केयर’ दिखना। TRAI के अनुसार, यह DND (डू नॉट डिस्टर्ब) रजिस्ट्री को मजबूत बनाएगा। कुल मिलाकर, Calling Name Presentation (CNAP) भारतीय टेलीकॉम इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाएगा।
चुनौतियाँ
हालांकि आशाजनक, Calling Name Presentation (CNAP) को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। प्राइवेसी चिंताएं प्रमुख हैं – क्या KYC नाम साझा करना सुरक्षित है? TRAI ने ऑप्ट-आउट और एन्क्रिप्शन से निपटने का वादा किया है, लेकिन डेटा ब्रेक का खतरा बना रहेगा।
ग्रामीण भारत में, जहां 50% से अधिक उपयोगकर्ता 2G पर हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड महंगा साबित होगा। छोटे ऑपरेटर्स के लिए लागत वहन कठिन हो सकती है। इसके अलावा, नामों की विविधता (जैसे संक्षिप्त नाम या क्षेत्रीय भाषाएं) प्रदर्शन में समस्या पैदा कर सकती है। पायलट में कुछ उपयोगकर्ताओं ने नाम गलत दिखने की शिकायत की है।
भविष्य की संभावनाएँ
भविष्य में, Calling Name Presentation (CNAP) को AI और मशीन लर्निंग से एकीकृत किया जा सकता है, जो रीयल-टाइम स्पैम डिटेक्शन करेगा। 5G रोलआउट के साथ, यह वॉइस असिस्टेंट्स से जुड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कॉल्स के लिए, CNAP को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से लिंक किया जाएगा। TRAI 2027 तक 90% कवरेज का लक्ष्य रखेगी।
निष्कर्ष
Calling Name Presentation (CNAP) भारतीय टेलीकॉम को क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, स्पैम से मुक्ति देकर उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाएगा। हालांकि चुनौतियां हैं, लेकिन DoT और TRAI की प्रतिबद्धता से सफलता निश्चित है। आपकी वेबसाइट पर यह रिपोर्ट पाठकों को जागरूक करेगी और Calling Name Presentation (CNAP) को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।