17 जनवरी 2026, Bihar में मुस्लिम फेरीवालों और मजदूरों पर हमलों की लहर: बिहार में हाल के दिनों में मुस्लिम फेरीवालों, हॉकरों और दिहाड़ी मजदूरों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे समुदाय में डर का माहौल है। जनवरी 2026 में कटिहार, सहरसा, मधुबनी सहित कई जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं। हमलावर अक्सर पीड़ितों को ‘बांग्लादेशी घुसपैठिया’ कहकर निशाना बनाते हैं। इन घटनाओं को मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने नफरत अपराध करार दिया है, जबकि पुलिस कुछ मामलों में लूटपाट या व्यक्तिगत विवाद बता रही है। परिवारों का कहना है कि उनके सदस्य अब सुरक्षित महसूस नहीं करते और काम पर जाना मुश्किल हो गया है।
प्रमुख घटनाएं: जिलेवार विवरण
कटिहार में फेरीवाले पर मारपीट और लूट
कटिहार जिले के पोठिया थाना क्षेत्र में 11 जनवरी 2026 को बर्तन बेचने वाले फेरीवाले अकमल हुसैन (25) के साथ मारपीट और लूटपाट हुई। पीड़ित के अनुसार, दो लोगों ने उन्हें ‘बांग्लादेशी’ कहकर घेरा, लाठी-डंडों से पीटा और 12,000 रुपये छीन लिए। अकमल ने शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई और समुदाय में आक्रोश फैला।
सहरसा में गोली मारकर लूटपाट
सहरसा में कुरकुरे बेचने वाले फेरीवाले मोहम्मद मुजाहिद को अपराधियों ने गोली मार दी। यह घटना लूटपाट के दौरान हुई, जिसमें मुजाहिद गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने इसे सामान्य अपराध बताया, लेकिन समुदाय इसे लक्षित हमला मान रहा है।
मधुबनी में मजदूर पर जानलेवा हमला
मधुबनी में 30 दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक कई घटनाएं हुईं। एक मुस्लिम मजदूर नूरशेद आलम को ‘बांग्लादेशी’ बताकर 50 लोगों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन आरोपी फरार हैं। इससे पहले नवादा में कपड़ा फेरीवाले मोहम्मद अतहर हुसैन की मॉब लिंचिंग में मौत हो गई थी।
ये घटनाएं मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल या मिश्रित इलाकों में हुईं, जहां फेरीवाले और मजदूर रोजी-रोटी के लिए गांव-गांव जाते हैं।
परिवारों की चिंता और दैनिक जीवन पर असर
पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब उनके सदस्य घर से बाहर निकलने से डरते हैं। एक पीड़ित की पत्नी ने कहा, “पति काम पर जाएं तो डर लगता है कि वापस आएंगे या नहीं।” कई फेरीवाले और मजदूरों ने काम छोड़ दिया है। मुस्लिम समुदाय के लोग इसे सुनियोजित अभियान मान रहे हैं, जहां ‘बांग्लादेशी घुसपैठिया’ का नरेटिव इस्तेमाल कर नफरत फैलाई जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिम हॉकर अब गांवों में नहीं जा रहे, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। बच्चों और महिलाओं में भी डर है। कुछ परिवारों ने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है।
मानवाधिकार समूहों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
जांच और कार्रवाई की मांग
मानवाधिकार संगठनों जैसे CJP, SabrangIndia और Amnesty ने इन घटनाओं को नफरत अपराध बताया और स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने Bihar सरकार से समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। विपक्षी दल RJD और कांग्रेस ने इसे BJP शासित सरकार की नाकामी बताया।
पुलिस ने कुछ मामलों में गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन समुदाय का कहना है कि कार्रवाई धीमी है। Bihar अल्पसंख्यक आयोग ने भी कुछ घटनाओं का संज्ञान लिया और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
कारण और व्यापक संदर्भ
ये हमले बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के बाद शुरू हुए प्रतीत होते हैं, जहां ‘घुसपैठिया’ का नरेटिव सोशल मीडिया पर फैला। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थानीय अपराधों को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास है। Bihar में मुस्लिम आबादी करीब 17% है, और गरीब तबका फेरीवाली व मजदूरी से जुड़ा है।
पुलिस का कहना है कि ज्यादातर मामले लूटपाट या व्यक्तिगत हैं, लेकिन समुदाय इसे लक्षित हमला मानता है।
Bihar में मुस्लिम फेरीवालों और मजदूरों पर हमलों की यह लहर समुदाय में गहरा भय पैदा कर रही है। कई जिलों से सामने आए मामले न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का सवाल हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव को चुनौती दे रहे हैं। मानवाधिकार समूहों की जांच की मांग जायज है, और सरकार को त्वरित कार्रवाई कर भय दूर करना चाहिए। अगर ये घटनाएं नहीं रुकीं तो Bihar में तनाव बढ़ सकता है। सभी पक्षों को संयम बरतते हुए न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है।
Sources: सबरंग वेबसाइट,