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11 जनवरी 2026, Iran ईरान में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शन: Iran में हाल के विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट और सरकार विरोधी भावनाओं से शुरू हुए हैं, जो अब देश के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए और जल्दी ही सभी 31 प्रांतों में फैल गए, जिसमें छात्र, व्यापारी और सामान्य नागरिक शामिल हैं। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं जैसे “स्वतंत्रता, स्वतंत्रता” और “मौत दीक्टेटर को”, जो 2022 की महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों की याद दिलाते हैं। प्रदर्शन अब दो सप्ताह से अधिक समय से जारी हैं, जिसमें तेहरान, मशहद और इस्फाहान जैसे प्रमुख शहरों में बड़ी भीड़ देखी गई है।

प्रदर्शनकारियों की मांगें आर्थिक सुधारों से शुरू हुईं, जैसे मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ती मुद्रास्फीति, लेकिन जल्दी ही राजनीतिक परिवर्तन की मांग में बदल गईं, जिसमें इस्लामिक गणराज्य की समाप्ति और पूर्व राजा के पुत्र रेजा पहलवी के समर्थन में नारे शामिल हैं। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाएं हुई हैं, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमला किया है। हालांकि, सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया और अधिक हिंसक रही है, जिसमें लाइव फायर, पानी की तोपें और आंसू गैस का उपयोग किया गया है।

हिंसा और मौतों की संख्या

प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई जारी है, जिसमें इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और पुलिस शामिल हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, हिंसा में कम से कम 116 लोग मारे गए हैं, जिसमें प्रदर्शनकारी, राहगीर और बच्चे शामिल हैं। इनमें से कई मौतें लाइव गोलीबारी से हुई हैं, और घायलों की संख्या सैकड़ों में है। Amnesty International और Human Rights Watch ने 28 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन वे कहते हैं कि इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण पूरी जानकारी प्राप्त करना मुश्किल है। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पतालों में शरीरों का ढेर लग गया है, और कई घायल आंखों में पेलेट गन की चोटों से प्रभावित हैं।

सुरक्षा बलों की तरफ से भी हताहत हुए हैं, जिसमें 37 सदस्य मारे गए हैं, जिन्हें सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनकारियों पर दोषारोपित किया है। सरकारी रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” और “विदेशी एजेंट” कहा जा रहा है, और वे US और Israel को उकसाने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, मानवाधिकार समूह कहते हैं कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने में कोई खतरे का तत्काल खतरा नहीं था।

सरकारी प्रतिक्रिया और इंटरनेट ब्लैकआउट

Iran सरकार ने प्रदर्शनों को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए हैं, जिसमें देशव्यापी इंटरनेट और फोन सेवाओं पर प्रतिबंध शामिल है, जो 2019 और 2022 के प्रदर्शनों की तरह है। सरकारी मीडिया, जैसे Fars News Agency, प्रदर्शनकारियों को सशस्त्र विद्रोही बताकर सुरक्षा बलों की प्रशंसा कर रही है। अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों को “ईश्वर का दुश्मन” घोषित किया है, जो मौत की सजा का आधार बन सकता है।

Iran संसद स्पीकर मोहम्मद बागर कालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी सैनिक और इजराइल लक्ष्य बनेंगे। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाया है, और IRGC ने विदेशी जासूसों की गिरफ्तारी का दावा किया है। सरकारी बयानों में प्रदर्शनकारियों को “US और Israel के एजेंट” कहा गया है, और सुरक्षा बलों को “मजबूत रहने” की प्रशंसा की गई है। हालांकि, मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि ब्लैकआउट के तहत बड़े पैमाने पर दमन हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

अमेरिका और इजराइल की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, सोशल मीडिया पर कहते हुए कि “Iran स्वतंत्रता की तरफ देख रहा है” और “US मदद के लिए तैयार है”। उन्होंने Iran को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बंद करें, और सैन्य विकल्पों पर विचार की रिपोर्ट्स हैं। इजराइल हाई अलर्ट पर है, क्योंकि Iran चेतावनी में उसे लक्ष्य बताया गया है। US स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि ट्रम्प अपनी चेतावनी में गंभीर हैं।

यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, हिंसा की निंदा करते हुए और इंटरनेट बहाल करने की मांग की है। UN मानवाधिकार प्रमुख ने मौतों पर चिंता व्यक्त की है और जांच की मांग की है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंताएं

मानवाधिकार संगठन जैसे Amnesty International और Human Rights Watch ने सरकारी दमन की निंदा की है, जिसमें बच्चों की मौतें शामिल हैं। वे कहते हैं कि सुरक्षा बलों ने बिना खतरे के गोली चलाई है, और ब्लैकआउट के तहत “खूनी दमन” हो रहा है। HRANA ने 2,600 गिरफ्तारियां और 116 मौतें दर्ज की हैं, जिसमें सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल हैं। डॉक्टरों ने अस्पतालों में शरीरों के ढेर और रक्त की कमी की रिपोर्ट की है। संगठन सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का सम्मान करने और गिरफ्तारियों को रोकने की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष और भविष्य की संभावनाएं

Iran में विरोध प्रदर्शन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां सरकार की सख्ती और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहे हैं। मौतों की संख्या 116 पहुंची है, और चेतावनी है कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी सैनिक और इजराइल लक्ष्य बनेंगे। प्रदर्शनकारी पहलवी के समर्थन में हैं, जो देश लौटने की बात कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ब्लैकआउट हटाने और हिंसा रोकने की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति Iran की राजनीतिक स्थिरता को चुनौती दे रही है, और आगे की घटनाएं क्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकती हैं।

Sources: एबीसी न्यूज़, द गार्डियन

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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