25 दिसंबर, 2025, Vijay Hazare Trophy: भारतीय घरेलू क्रिकेट का प्रमुख आयोजन Vijay Hazare Trophy 2025-26 ने अपनी शुरुआत के साथ ही सुर्खियां बटोर ली हैं। टूर्नामेंट के पहले ही दिन पंजाब के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल का महाराष्ट्र के खिलाफ मुकाबले से अनुपस्थिति ने प्रशंसकों को निराश कर दिया, जबकि बिहार की ऐतिहासिक पारी पर पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का ‘अजीबोगरीब’ बयान चर्चा का केंद्र बन गया। गिल की ‘फिर से बाहर’ होने की खबर उनके हालिया टी20 वर्ल्ड कप से बहिष्कार और चोट की आशंकाओं के बीच आ रही है, वहीं अश्विन ने बिहार-अरुणाचल प्रदेश मैच को ‘एकतरफा’ बताते हुए घरेलू क्रिकेट में टीमों के बीच ‘गुणवत्ता के भारी अंतर’ पर सवाल उठाए। यह टूर्नामेंट न केवल युवा प्रतिभाओं के लिए मंच है, बल्कि चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है, जहां राष्ट्रीय टीम में वापसी की दौड़ तेज हो गई है।
Vijay Hazare Trophy, जो लिस्ट ए फॉर्मेट में खेला जाता है, 21 दिसंबर से शुरू हो चुका है और 31 दिसंबर तक लीग चरण चलेगा। इस बार 38 टीमों को चार ग्रुपों में बांटा गया है, जिसमें एलीट, प्लेट और अन्य श्रेणियां शामिल हैं। टूर्नामेंट का प्रसारण सीमित होने के कारण प्रशंसक पहले ही नाराज हैं, लेकिन मैदान पर हो रही घटनाओं ने इसे और रोचक बना दिया। सबसे पहले बात शुभमन गिल की। पंजाब की ओर से खेलने वाले 25 वर्षीय गिल, जो टेस्ट और ओडीआई कप्तान हैं, ने महाराष्ट्र के खिलाफ सूरत में खेले गए उद्घाटन मुकाबले में हिस्सा नहीं लिया। यह उनकी लगातार दूसरी बड़ी अनुपस्थिति है—पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांचवें टी20आई से चोट के कारण बाहर हुए, और अब वीएचटी से भी। सोशल मीडिया पर फैंस ने इसे ‘चयनकर्ताओं की साजिश’ करार दिया, जबकि आधिकारिक बयान में पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) ने कहा कि गिल ‘आराम’ कर रहे हैं और जनवरी में दो मैचों (3 और 6 जनवरी) में वापसी करेंगे।
गिल का यह बहिष्कार उनके करियर के मोड़ पर आया है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए घोषित स्क्वॉड से बाहर होने के बाद वे व्हाइट-बॉल क्रिकेट में अपनी जगह मजबूत करने के लिए वीएचटी पर नजरें गाड़े थे। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गिल को ‘फॉर्म में वापसी’ का मौका मिलना था, लेकिन चोट ने उनके इरादों पर पानी फेर दिया। पंजाब की टीम में अभिषेक शर्मा को कप्तान बनाया गया है, जबकि अर्शदीप सिंह और अन्य स्टार्स शामिल हैं। गिल की अनुपस्थिति में पंजाब ने महाराष्ट्र को 7 विकेट से हराया, लेकिन फैंस का कहना है कि गिल की मौजूदगी से टीम की फायरपावर दोगुनी हो जाती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ब्रेक गिल को न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी ओडीआई सीरीज से पहले फिटनेस पर फोकस करने का मौका देगा। फिर भी, यह ‘फिर से बाहर’ होना उनके प्रशंसकों के लिए झटका है, जो सोशल मीडिया पर #BringBackGill ट्रेंड चला रहे हैं।
दूसरी ओर, टूर्नामेंट की सबसे बड़ी सुर्खी बिहार की ऐतिहासिक पारी से जुड़ी है। अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पटना में खेले गए मैच में बिहार ने 50 ओवरों में 574/6 का विश्व रिकॉर्ड स्कोर खड़ा किया—लिस्ट ए क्रिकेट का अब तक का सर्वोच्च टोटल। यह स्कोर दक्षिण अफ्रीका के 2016 के 408/6 के रिकॉर्ड को तोड़ गया। बिहार ने इस मैच को 397 रनों से जीता, जब अरुणाचल 177 रन पर ढेर हो गया। युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने 84 गेंदों पर 190 रन ठोके, जबकि आयुष लोहरुका ने 116 और साकिबुल गनी ने 32 गेंदों पर 128* रन बनाए—जो भारतीय लिस्ट ए का सबसे तेज शतक है। गनी की इस पारी ने स्टेडियम में तालियां गड़वा दीं, लेकिन पूर्व भारतीय ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का बयान विवादास्पद साबित हुआ।
अश्विन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “वैभव सूर्यवंशी को भारी तालियां। लेकिन मैं फिर से एक सवाल पूछना चाहता हूं। कुछ टीमों के बीच गुणवत्ता में भारी अंतर है—चॉक एंड चीज की तरह। कुछ मैच पूरी तरह एकतरफा हो जाते हैं, कोई मुकाबला ही नहीं बचता। यह आदर्श प्रतियोगिता नहीं है।” उन्होंने आगे जोड़ा, “वैभव को श्रेय, पड़ोस में बड़ा स्कोर बनाना भी बड़ा ही होता है। दोहरी शतक तो दोहरी शतक ही है, कहीं भी। लेकिन अगर हम अरुणाचल जैसे टीमों को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो यह उनकी आत्मविश्वास पर क्या असर डालेगा?” अश्विन का यह ‘ब्लंट टेक’ फैंस के बीच बहस छेड़ दिया। एक तरफ जहां बिहार के प्रशंसक इसे ‘प्रदर्शन की सराहना’ मान रहे हैं, वहीं अन्य इसे ‘प्लेट टीमों का अपमान’ बता रहे हैं। स्पोर्ट्सटक की रिपोर्ट के अनुसार, अश्विन ने टूर्नामेंट के ब्रॉडकास्ट की सीमाओं पर भी निशाना साधा, जो फैंस की नाराजगी को बढ़ा रहा है।
यह विवाद घरेलू क्रिकेट की असमानताओं को उजागर करता है। Vijay Hazare Trophy में एलीट ग्रुप की टीमें जैसे पंजाब, तमिलनाडु मजबूत हैं, जबकि प्लेट ग्रुप की अरुणाचल, मणिपुर जैसी टीमें संघर्ष कर रही हैं। बीसीसीआई के अनुसार, टूर्नामेंट का उद्देश्य समावेशी विकास है, लेकिन अश्विन जैसे दिग्गजों का मानना है कि ‘लॉप-साइडेड’ मैच युवा टीमों के मनोबल को तोड़ते हैं। पूर्व कोच संजय बांगर ने कहा, “बिहार का रिकॉर्ड शानदार है, लेकिन अश्विन सही कह रहे हैं—सुधार के लिए अधिक संतुलित फिक्स्चरिंग जरूरी।” इधर, अन्य मैचों में देवदत्त पडिक्कल का शतक और इशान किशन का प्रदर्शन चर्चा में हैं, जो राष्ट्रीय चयन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्षतः Vijay Hazare Trophy 2025 न केवल रिकॉर्ड तोड़ रही है, बल्कि क्रिकेट की असमानताओं पर बहस भी छेड़ रही है। गिल की अनुपस्थिति चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, जबकि अश्विन का बयान सुधार की मांग करता है। यह टूर्नामेंट युवाओं के लिए सुनहरा मौका है, लेकिन समावेशिता के बिना यह अधूरा रहेगा। क्रिसमस के इस मौके पर, क्रिकेट प्रेमी उम्मीद करते हैं कि मैदान पर न्याय और रोमांच बरकरार रहे।