5 जनवरी 2026, Uttar Pradesh में दृष्टिबाधितों की जीत: Uttar Pradesh ने दृष्टिबाधित छात्रों की शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। Uttar Pradesh की पहली स्टेट-लेवल ब्रेल लाइब्रेरी का उद्घाटन वर्ल्ड ब्रेल डे (4 जनवरी) के अवसर पर डॉ. शकुंतला मिश्रा नेशनल रिहैबिलिटेशन यूनिवर्सिटी (DSMNRU) में किया गया। यह लाइब्रेरी स्वामी विवेकानंद सेंट्रल लाइब्रेरी के पहले फ्लोर पर स्थापित की गई है, जिसमें लगभग 4,000 ब्रेल पुस्तकें उपलब्ध हैं। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि वाइस चांसलर प्रोफेसर संजय सिंह ने कहा, “यह न केवल एक लाइब्रेरी है, बल्कि दृष्टिबाधित छात्रों के लिए ज्ञान का असीमित द्वार है। यह Uttar Pradesh सरकार की समावेशी शिक्षा नीति का प्रतीक है।”
DSMNRU, जो राज्य की पहली विकलांग-केंद्रित यूनिवर्सिटी है, ने इस लाइब्रेरी को स्थापित करके दिव्यांगों के लिए उच्च शिक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वाइस चांसलर ने उद्घाटन के दौरान ब्रेल पुस्तकों का उपयोग करके एक प्रदर्शन किया, जो उपस्थित छात्रों और शिक्षकों के बीच उत्साह का विषय बना। यह सुविधा न केवल Uttar Pradesh के दृष्टिबाधित छात्रों के लिए बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगी। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, डीन और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी मौजूद थे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।
ब्रेल लाइब्रेरी की विशेषताएं: आधुनिक तकनीक से लैस
यह ब्रेल लाइब्रेरी स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सुविधाओं से सुसज्जित है, जो दृष्टिबाधित छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है। लाइब्रेरी में 4,000 से अधिक ब्रेल पुस्तकें रखी गई हैं, जो विज्ञान, साहित्य, इतिहास, अर्थशास्त्र और करंट अफेयर्स जैसे विविध विषयों को कवर करती हैं। इन पुस्तकों में क्लासिक साहित्य से लेकर आधुनिक टेक्स्टबुक तक सब कुछ शामिल है, जो छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए तैयार करने में मदद करेगी।
उन्नत सुविधाएं और पहुंच
लाइब्रेरी में ब्रेल डिस्प्ले रीडर, डिजिटल ब्रेल नोटबुक और स्पीच-टू-टेक्स्ट सॉफ्टवेयर जैसी आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं। छात्र ब्रेल प्रिंटर का उपयोग करके अपनी नोट्स तैयार कर सकते हैं और ऑडियो बुक्स के माध्यम से सामग्री सुन सकते हैं। लाइब्रेरी का डिजाइन पूरी तरह से एक्सेसिबल है, जिसमें टैक्टाइल फ्लोरिंग, ब्रेल साइनेज और व्हीलचेयर-फ्रेंडली स्पेस शामिल हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि यह सुविधा 24/7 डिजिटल एक्सेस के साथ ऑनलाइन कैटलॉग भी प्रदान करेगी, ताकि छात्र घर बैठे पुस्तकों का रिजर्वेशन कर सकें। इसके अलावा, विशेष प्रशिक्षण सेशन आयोजित किए जाएंगे, जहां ब्रेल राइटिंग और रीडिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी।
वाइस चांसलर प्रोफेसर संजय सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि दृष्टिबाधित छात्रों को किसी भी बाधा का सामना न करना पड़े। यह लाइब्रेरी DSMNRU के 5,000 से अधिक दिव्यांग छात्रों के लिए एक वरदान साबित होगी।” लाइब्रेरी का कुल क्षेत्रफल 1,500 वर्ग फुट है, जो विस्तार की गुंजाइश के साथ बनाई गई है। भविष्य में, यह राष्ट्रीय स्तर की ब्रेल संसाधन केंद्र के रूप में विकसित हो सकती है।
महत्व और प्रभाव: समावेशी शिक्षा की नई दिशा
भारत में दृष्टिबाधित छात्रों की संख्या लगभग 50 लाख है, लेकिन उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच मात्र 1% है। यूपी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप है, जो समावेशी शिक्षा पर जोर देती है। DSMNRU, जो 2008 में स्थापित हुई, पहले से ही विकलांगों के लिए विशेष कोर्सेस ऑफर करती है, जैसे B.Ed. स्पेशल एजुकेशन और M.Sc. रिहैबिलिटेशन साइंस। इस लाइब्रेरी के साथ, छात्रों को अब ब्रेल सामग्री की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, जो अक्सर उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा होती है।
दृष्टिबाधित छात्रों की आवाज
एक दृष्टिबाधित छात्रा, नेहा शर्मा ने उद्घाटन समारोह में कहा, “पहले हमें ब्रेल बुक्स के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब हम यहीं पर सब कुछ पा सकते हैं। यह हमारे सपनों को पंख देगी।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल शैक्षणिक स्तर पर बल्कि सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देगा। यूपी के शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने ट्वीट करते हुए कहा, “दिव्यांगों का सशक्तिकरण हमारी प्राथमिकता है। यह लाइब्रेरी यूपी को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।”
इस पहल से राज्य भर के अन्य यूनिवर्सिटीज को प्रेरणा मिलेगी। सरकार ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों में पांच और ब्रेल सेक्शन स्थापित किए जाएंगे। विश्व ब्रेल दिवस पर यह उद्घाटन वैश्विक स्तर पर भी चर्चित हुआ, जहां यूनेस्को ने इसे सराहा।
प्रतिक्रियाएं: सराहना और सुझाव
उद्घाटन के बाद विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं। नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (NAB) के चेयरमैन ने कहा, “यह यूपी के लिए मील का पत्थर है। लेकिन हमें डिजिटल ब्रेल कंटेंट को बढ़ाना होगा।” विपक्षी दलों ने भी इसे स्वागत योग्य बताया, हालांकि कुछ ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सुविधाएं विस्तारित हों। सोशल मीडिया पर #UPBrailleLibrary ट्रेंड कर रहा है, जहां छात्रों ने अपनी खुशी जाहिर की।
शिक्षाविदों का मानना है कि यह कदम दृष्टिबाधित छात्रों के रोजगार दर को 20% तक बढ़ा सकता है, क्योंकि बेहतर शिक्षा से उनकी स्किल्स मजबूत होंगी। DSMNRU ने पहले ही 80% प्लेसमेंट रेट हासिल किया है, और यह लाइब्रेरी इसे और मजबूत करेगी।
निष्कर्ष: ज्ञान की समानता की ओर एक कदम
Uttar Pradesh की पहली स्टेट-लेवल ब्रेल लाइब्रेरी का उद्घाटन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है। यह न केवल शिक्षा को सुलभ बनाता है बल्कि समाज में समानता की भावना को मजबूत करता है। सरकार, यूनिवर्सिटी और सिविल सोसाइटी के संयुक्त प्रयासों से ही ऐसे बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में, यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में अपनाया गया, तो भारत की शिक्षा प्रणाली और समावेशी हो जाएगी। दृष्टिबाधित छात्र अब कह सकते हैं- “अंधेरा तो मैं खुद हूं, लेकिन ज्ञान की रोशनी अब मेरे पास है।”
बिहार और अन्य राज्यों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। यह उद्घाटन साबित करता है कि इच्छाशक्ति से कोई बाधा असंभव नहीं। DSMNRU के छात्रों को बधाई, और सरकार को शुभकामनाएं कि यह यात्रा जारी रहे।
Sources: इकोनॉमिक टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स