25 फरवरी 2026, US-ईरान तनाव चरम पर: 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस) पर फोकस बढ़ा है। जून 2025 में अमेरिका-इजराइल ने ईरान के परमाणु साइट्स पर बड़े हमले किए थे, जिन्हें ट्रंप ने “पूर्ण विनाश” बताया था। लेकिन ईरान ने दावा किया कि उसका कार्यक्रम जारी है और अब वह लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है। फरवरी 2026 में तनाव और बढ़ गया, जब ट्रंप ने ईरान को 10-15 दिनों का अल्टीमेटम दिया – या परमाणु डील करो या “बुरे परिणाम” भुगतो।
ट्रंप का स्टेट ऑफ द यूनियन और ईरान पर हमला
24 फरवरी 2026 को ट्रंप ने कांग्रेस को दिए अपने सबसे लंबे स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में ईरान पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान यूरोप और अमेरिकी बेसेज को निशाना बनाने वाली मिसाइलें विकसित कर चुका है, और जल्द ही अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंचने वाली मिसाइलें बना रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू कर रहा है, जबकि 2025 के हमलों से इसे “पूर्णतः नष्ट” कर दिया गया था। उन्होंने डिप्लोमेसी को प्राथमिकता बताई, लेकिन “बुरे चीजें” होने की चेतावनी दी अगर डील नहीं हुई। ईरान ने इसे “बड़ी झूठ” करार दिया और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्रंप को “प्रोपगैंडा” फैलाने वाला बताया।
जेनेवा वार्ता: आखिरी मौका?
अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता ओमान की मध्यस्थता में चल रही है। पहली राउंड जनवरी में ओमान में, दूसरी 17 फरवरी को जेनेवा में हुई। तीसरी राउंड 26 फरवरी 2026 को जेनेवा में निर्धारित है, जहां ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मिलेंगे। अमेरिका की मुख्य मांग: “जीरो एनरिचमेंट” – ईरान को यूरेनियम संवर्धन बंद करना होगा। ईरान का प्रस्ताव: हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का आधा हिस्सा विदेश भेजना, बाकी को डाइल्यूट करना, और क्षेत्रीय एनरिचमेंट कंसोर्टियम बनाना – बदले में अमेरिका ईरान के “शांतिपूर्ण” कार्यक्रम को मान्यता दे और प्रतिबंध हटाए।
अमेरिकी अधिकारी कहते हैं कि ट्रंप की “रेड लाइन” जीरो एनरिचमेंट है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में “टोकन” या “बहुत सीमित” एनरिचमेंट (मेडिकल यूज के लिए) पर विचार की बात है। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि डील “पहुंच के भीतर” है अगर डिप्लोमेसी को प्राथमिकता दी जाए। लेकिन ईरान ने इंटरिम डील को खारिज किया, जबकि अमेरिकी अधिकारी इसे संभावित बताते हैं।
अमेरिकी मिलिट्री बिल्डअप: अब तक का सबसे बड़ा
ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में अभूतपूर्व मिलिट्री बिल्डअप किया है। USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर. फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, दर्जनों फाइटर जेट्स (F-22 सहित), एयर रिफ्यूलिंग टैंकर, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात हैं। यह 2003 इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा एयरपावर डिप्लॉयमेंट है। पेंटागन ने हफ्तों तक चलने वाले ऑपरेशंस की तैयारी की है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयर जनरल डैन केन ने ट्रंप को चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ बड़ा अभियान महंगा और जोखिम भरा होगा – अमेरिकी फोर्सेस को भारी नुकसान हो सकता है। ट्रंप ने इसे “फेक न्यूज” बताया, लेकिन मिलिट्री की चिंताएं जारी हैं।
ईरान की तैयारी और चाइना से मिसाइल डील
ईरान ने अमेरिकी हमले की स्थिति में रिस्पॉन्स की धमकी दी है। IRGC कमांडर्स ने एयर डिफेंस और नेवल बेसेज का दौरा किया, मिसाइल फैसिलिटीज को मजबूत किया। ईरान चीन से CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल्स खरीदने के करीब है, जो अमेरिकी नेवी को बड़ा खतरा हो सकती हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ड्रिल्स किए, जहां दुनिया का 20% तेल गुजरता है – इसे बंद करने की धमकी दी।
क्षेत्रीय प्रभाव और चिंताएं
तुर्की, जर्मनी, भारत, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी। लेबनान में अमेरिकी एम्बेसी स्टाफ की आंशिक निकासी हुई। इराक के एरबिल में वेस्टर्न फोर्सेस रिलोकेट हो रही हैं। इजराइल के साथ ट्रंप की निकटता और PM मोदी का 25-26 फरवरी का इजराइल दौरा तनाव बढ़ा रहा है।
निहितार्थ
ट्रंप की स्ट्रैटेजी “मैक्सिमम प्रेशर” है – मिलिट्री बिल्डअप से डिप्लोमेसी को मजबूत करना। लेकिन ईरान घरेलू विरोध (2025-26 प्रोटेस्ट्स) के बावजूद मजबूत है। अगर 26 फरवरी की जेनेवा वार्ता फेल हुई, तो लिमिटेड स्ट्राइक्स से शुरू होकर रिजीम चेंज तक का बड़ा हमला संभव है। इससे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, क्षेत्रीय युद्ध फैल सकता है, और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ट्रंप ने कहा कि डील “ईरान चाहता है ज्यादा”, लेकिन ईरान “शानदार डिप्लोमेसी” की बात कर रहा है। अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे – युद्ध या डील?
Sources: अल जज़ीरा