US-Iran tensions reach a peakUS-Iran tensions reach a peak

19 फरवरी 2026, US-Iran अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दबाव बढ़ाते हुए मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है। जेनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष न्यूक्लियर वार्ता (टॉक्स) बिना किसी बड़े ब्रेकथ्रू के खत्म हो गईं, जबकि अमेरिकी मिलिट्री ने संभावित हमले की तैयारी पूरी कर ली है। ट्रंप को मिलिट्री ऑप्शंस पर ब्रिफिंग मिल चुकी है, और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार हमला इस शनिवार (21 फरवरी) तक हो सकता है। ईरान ने रूस के साथ मिलिट्री ड्रिल्स शुरू कीं, और अमेरिका ने दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford को क्षेत्र में भेज दिया। यह स्थिति मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका पैदा कर रही है, जहां पहले ही गाजा और अन्य संघर्ष चल रहे हैं। यह रिपोर्ट तनाव के कारण, घटनाक्रम, सैन्य तैयारी और संभावित परिणामों की विस्तृत पड़ताल करती है।

न्यूक्लियर टॉक्स का फेल होना 17 फरवरी 2026 को जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता (ओमान मध्यस्थता में) हुई। वार्ता में “कुछ प्रगति” का दावा किया गया, लेकिन कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। अमेरिकी पक्ष ने ईरान से यूरेनियम संवर्धन (enrichment) पूरी तरह रोकने, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम सीमित करने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हिजबुल्लाह, हूती) का समर्थन बंद करने की मांग की। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने 17 फरवरी को भाषण में इन मांगों को ठुकरा दिया और कहा कि ईरान का “न्यूक्लियर इंडस्ट्री का अधिकार” है और बैलिस्टिक मिसाइल्स “डिटरेंट हथियार” हैं, जो अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच “अभी भी कई मुद्दों पर दूरियां हैं”। वार्ता के बाद तीसरे दौर की संभावना दो हफ्ते बाद जताई गई, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान की स्थिति “अस्वीकार्य” है। ट्रंप ने कहा कि “ईरान को समझौता करना चाहिए, वरना बहुत बुरा होगा”। व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा, “ईरान ट्रंप के साथ डील करने में बहुत समझदारी दिखाएगा”।

अमेरिकी सैन्य तैयारी और तैनाती अमेरिकी मिलिट्री ने ईरान पर संभावित हमले के लिए “वीक्स-लॉन्ग ऑपरेशंस” (कई हफ्तों तक चलने वाले अभियान) की तैयारी पूरी कर ली है। पेंटागन ने ट्रंप को ऑप्शंस पर ब्रिफिंग दी, जिसमें एयर स्ट्राइक्स, मिसाइल अटैक और संभावित ग्राउंड ऑपरेशंस शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार हमला शनिवार तक हो सकता है, लेकिन ट्रंप अंतिम फैसला अभी नहीं लिया है।

  • USS Gerald R. Ford (दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर) को मिडिल ईस्ट भेजा गया। यह USS Abraham Lincoln के साथ जुड़कर क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की ताकत बढ़ाएगा। फोर्ड ग्रुप में हजारों सैनिक, F-35 फाइटर जेट्स और अन्य हथियार शामिल हैं।
  • अमेरिका ने क्षेत्र में अतिरिक्त F-35, F-22 और F-16 फाइटर जेट्स तैनात किए।
  • ट्रंप ने कहा कि “एक और बड़ा फोर्स” भेजा जा रहा है, और “हमारे पास आर्मडा तैयार है”।

यह बिल्डअप 2025 के इजराइली-अमेरिकी हमलों (जिसमें ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमला हुआ था) के बाद सबसे बड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमला ईरान के न्यूक्लियर साइट्स (जैसे नतांज, फोर्डो), मिलिट्री बेस और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स पर फोकस करेगा।

ईरान की प्रतिक्रिया और रूस के साथ ड्रिल्स ईरान ने तनाव के जवाब में रूस के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसैनिक ड्रिल्स शुरू कीं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कुछ घंटों के लिए बंदिश लगाई, जो वैश्विक तेल सप्लाई का 20% गुजरता है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि “कोई देश ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट के अधिकार को छीन नहीं सकता”।

ईरान ने Parchin मिलिट्री साइट पर कंक्रीट शील्ड और मिट्टी की परत बनाई, जो सैटेलाइट इमेजेस में दिखी है – यह हवाई हमलों से बचाव की तैयारी है। ईरान ने चेतावनी दी कि हमला होने पर “क्षेत्रीय युद्ध” होगा, जिसमें हूती, हिजबुल्लाह और अन्य प्रॉक्सी शामिल होंगे।

संभावित परिणाम और वैश्विक प्रभाव

  • युद्ध की आशंका: विशेषज्ञ कहते हैं कि हमला क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो सकता है।
  • ट्रंप का रुख: ट्रंप ने रिजीम चेंज का संकेत दिया, लेकिन डिप्लोमेसी को पहली प्राथमिकता बताया।
  • वैश्विक प्रतिक्रिया: यूरोपीय देशों ने चिंता जताई, रूस और चीन ने अमेरिका की आलोचना की। UN में चर्चा चल रही है।

अमेरिका-ईरान तनाव अब युद्ध के कगार पर है। जेनेवा टॉक्स फेल होने और सैन्य बिल्डअप से स्थिति नाजुक है। ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान की सख्ती दोनों पक्षों को युद्ध की ओर धकेल रही है। अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे – या डील होगी, या मिडिल ईस्ट में नया संकट। दुनिया नजरें लगाए हुए है कि क्या डिप्लोमेसी जीतेगी या मिलिट्री ऑप्शन।

Sources: वाशिंगटन पोस्ट

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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