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19 जनवरी 2026, Unnao रेप केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप कांड के मुख्य दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) से जुड़े मामले में सेंगर की 10 साल की सजा को निलंबित करने और जमानत देने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रविंदर दुदेजा की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हालांकि सेंगर लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन अपील में देरी की वजह उनकी खुद की कई याचिकाएं हैं। कोर्ट ने अपील की शीघ्र सुनवाई का निर्देश देते हुए मामले को 3 फरवरी के लिए लिस्ट किया है।

इस फैसले के बाद सेंगर को जेल में ही रहना पड़ेगा, भले ही रेप के मुख्य मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को उस आदेश पर रोक लगा दी थी। अब कस्टोडियल डेथ केस में भी राहत न मिलने से सेंगर की रिहाई की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह कांड 2017 का है, जब उन्नाव की एक नाबालिग लड़की ने कुलदीप सिंह सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था। 4 जून 2017 को पीड़िता नौकरी मांगने सेंगर के घर गई थी, जहां उसका रेप किया गया। जब परिवार ने शिकायत करने की कोशिश की, तो दबाव बनाया गया। अप्रैल 2018 में पीड़िता के पिता को सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और उनके गुर्गों ने पीटा। पिता को पुलिस हिरासत में ले लिया गया, जहां उनकी हालत बिगड़ी और 9 अप्रैल 2018 को मौत हो गई।

इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। पीड़िता ने आत्मदाह की कोशिश की, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और CBI जांच के आदेश दिए। सेंगर को 13 अप्रैल 2018 को गिरफ्तार किया गया।

कन्विक्शन और सजाएं

दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने रेप केस में सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 25 लाख जुर्माना लगाया, जिसमें से ज्यादा हिस्सा पीड़िता को दिया गया। मार्च 2020 में कस्टोडियल डेथ केस में सेंगर और उनके भाई सहित पांच लोगों को 10 साल की सख्त सजा सुनाई गई। कोर्ट ने इसे ‘क्रिमिनल कांस्पिरेसी’ और ‘कल्पेबल होमिसाइड’ करार दिया।

सेंगर ने दोनों सजाओं के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने रेप केस में सजा निलंबित कर सशर्त जमानत दे दी, क्योंकि सेंगर 7 साल से ज्यादा जेल में थे। लेकिन पीड़िता और CBI की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।

आज का फैसला और कोर्ट की टिप्पणियां

कस्टोडियल डेथ केस में सेंगर के वकील ने लंबी जेल और स्वास्थ्य का हवाला दिया। कोर्ट ने माना कि सेंगर ने लंबा समय जेल में काटा है, लेकिन कहा कि देरी की वजह उनकी मल्टीपल अप्लीकेशंस हैं। कोर्ट ने कहा, “उद्देश्य तब पूरा होगा जब अपील जल्दी सुनी जाए।” CBI और पीड़िता के वकील मेहमूद प्राचा ने विरोध किया, कहा कि सेंगर से पीड़िता और परिवार को खतरा है।

पीड़िता और समाज की प्रतिक्रिया

पीड़िता ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनके वकील ने कहा कि यह न्याय की जीत है। महिला अधिकार संगठनों ने भी राहत की सांस ली। 2025 में रेप केस में बैल मिलने पर भारत गेट पर प्रदर्शन हुए थे। अब इस फैसले से न्याय की उम्मीद बनी रहेगी।

राजनीतिक स्तर पर भाजपा ने सेंगर को 2019 में ही पार्टी से निकाल दिया था। विपक्षी दल इसे ‘महिलाओं के खिलाफ अपराधों’ पर सरकार की नाकामी बताते रहे हैं।

आगे क्या?

दोनों अपीलें हाईकोर्ट में लंबित हैं। कोर्ट ने तेज सुनवाई का निर्देश दिया है। पीड़िता अब सुरक्षित जीवन जी रही है और परिवार को CRPF सुरक्षा मिली हुई है। यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में महिलाओं की सुरक्षा और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई का प्रतीक बन गया है।

यह फैसला दिखाता है कि कितनी भी देरी क्यों न हो, न्याय की प्रक्रिया जारी रहती है। पीड़िता की बहादुरी ने पूरे सिस्टम को चुनौती दी और बदलाव की मिसाल कायम की।

Sources: द हिन्दू, बार एंड बेंच

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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