10 दिसंबर 2025: रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका और सहयोगी देश सुरक्षा की गारंटी दें, तो देश में नए चुनाव कराने को पूरी तरह तैयार हैं। यह घोषणा रोम में पोप लियो XIV से मुलाकात के दौरान की गई, जहां जेलेंस्की ने शांति योजना पर वैश्विक दबाव की वकालत की। ट्रंप प्रशासन की चेतावनियों के बीच यह कदम यूक्रेन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है, लेकिन क्षेत्रीय विवादों ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

यूक्रेन में मार्शल लॉ के तहत चुनाव स्थगित हैं, जो 2022 के रूसी आक्रमण के बाद से लागू है। संविधान के अनुसार, युद्धकाल में राष्ट्रपति चुनाव नहीं हो सकते, लेकिन जेलेंस्की ने मंगलवार को संसद से अपील की कि वे चुनाव कानून में संशोधन के लिए विधेयक तैयार करें। “हम सुरक्षा सुनिश्चित होने पर तुरंत चुनाव करा सकते हैं,” उन्होंने कहा। यह बयान डोनबास क्षेत्र पर मॉस्को के दावों के जवाब में आया, जहां जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि वे कोई भूमि नहीं छोड़ेंगे। यूक्रेन की अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है, और पोलैंड सीमा पर शरणार्थी संकट गहरा गया है।

अमेरिका से गुजारिश का केंद्रबिंदु सुरक्षा गारंटी है। जेलेंस्की ने कहा कि यूएस और यूरोपीय साझेदारों से “ठोस प्रतिबद्धताएं” चाहिए, ताकि रूसी आक्रमण का खतरा कम हो। राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप ने पहले क्यिव को रियायतें देने की चेतावनी दी थी, लेकिन जेलेंस्की का यह प्रस्ताव शांति वार्ताओं को गति दे सकता है। लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात के बाद यूक्रेन और ईयू ने संशोधित शांति प्रस्ताव अंतिम रूप दिया है, जो जल्द ही व्हाइट हाउस भेजा जाएगा। जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेनी और यूरोपीय घटक अब अधिक विकसित हैं।”

यह कदम अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का हिस्सा है। पोप लियो XIV से रोम में बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने शांति योजना पर चर्चा की, जो यूरोपीय साझेदारों के साथ तैयार की गई। अमेरिका मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुलाकात शांति प्रयासों के लिए संवेदनशील समय पर हुई। यूक्रेन ने भूमि त्यागने से इनकार किया है, लेकिन युद्धविराम और पुनर्निर्माण पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावों से जेलेंस्की की वैधता मजबूत होगी, लेकिन रूसी खतरे के बिना यह असंभव है।

यूक्रेन के लिए यह मोड़ महत्वपूर्ण है। युद्ध ने 10 लाख से अधिक लोगों को विस्थापित किया है, और अर्थव्यवस्था पर 500 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। जेलेंस्की की अपील अमेरिका को नई जिम्मेदारी सौंपती है—क्या ट्रंप प्रशासन सुरक्षा गारंटी देगा? ईयू साझेदारों ने समर्थन जताया है, लेकिन मॉस्को की प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि सफल रहा, तो यह न केवल यूक्रेन बल्कि पूर्वी यूरोप की स्थिरता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। संसद जल्द विधेयक पेश करेगी, और वैश्विक दबाव शांति की राह प्रशस्त कर सकता है। लेकिन सवाल वही है: क्या अमेरिका साथ खड़ा होगा?

By SHAHID

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