24 जनवरी 2026, UAE ने दिखाया विनम्रता का भाव: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने 54वें राष्ट्रीय दिवस (ईद अल एतिहाद, 2 दिसंबर 2025) से पहले एक बड़ा मानवीय कदम उठाया है। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने नवंबर 2025 में देशभर की जेलों से 2,937 कैदियों को रिहा करने का आदेश जारी किया था। इनमें 900 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। UAE सरकार ने न केवल इन कैदियों को मुक्त करने का फैसला किया, बल्कि उनके ऊपर लगे जुर्माने और वित्तीय दंड भी माफ कर दिए हैं। हाल ही में UAE अधिकारियों ने अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास को इन भारतीय कैदियों की सूची सौंप दी है, जिससे रिहाई और प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। यह कदम कैदियों को नई जिंदगी शुरू करने का मौका देगा और उनके परिवारों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
आदेश की पृष्ठभूमि
UAE में राष्ट्रीय दिवस और अन्य विशेष अवसरों पर कैदियों को क्षमादान देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने नवंबर के अंत में यह आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि रिहा किए गए कैदियों को नया जीवन शुरू करने का अवसर मिलेगा, उनके परिवारों का बोझ कम होगा और उनके प्रियजनों को खुशी मिलेगी। UAE सरकार ने इन कैदियों के वित्तीय दंड (जुर्माना या मुआवजा) भी खुद वहन करने का फैसला किया।
भारतीय दूतावास को सौंपी गई सूची में 900 से अधिक भारतीयों के नाम शामिल हैं। ये कैदी विभिन्न अपराधों जैसे वीजा उल्लंघन, छोटे-मोटे आर्थिक मामलों या अन्य गैर-गंभीर अपराधों के लिए सजा काट रहे थे। दूतावास अब इन कैदियों की रिहाई के बाद भारत वापसी की व्यवस्था कर रहा है, जिसमें यात्रा दस्तावेज और टिकट शामिल हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक बताया है।
भारत-UAE संबंधों का मजबूत प्रमाण
UAE में 35 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। हालिया उच्चस्तरीय दौरों में रक्षा, व्यापार और वैश्विक मंचों पर सहयोग पर जोर दिया गया। यह रिहाई भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 और UAE द्वारा सह-आयोजित UN वाटर कॉन्फ्रेंस जैसे मुद्दों पर आपसी समर्थन का हिस्सा है।
यह पहली बार नहीं है जब UAE ने भारतीय कैदियों को क्षमादान दिया हो। 2022 से 2025 के बीच हर साल सैकड़ों भारतीयों को रिहा किया गया। उदाहरण के लिए, 2025 में रमजान से पहले 500 से अधिक भारतीय कैदियों को मुक्त किया गया था। 2023 में 700 से ज्यादा और 2022 में 639 भारतीय लाभार्थी बने। इनमें से कई मामलों में UAE सरकार ने जुर्माने माफ किए। इसके अलावा, दुबई स्थित भारतीय व्यवसायी फिरोज मर्चेंट जैसे परोपकारी व्यक्ति भी लाखों दिरहम दान करके कैदियों की रिहाई में मदद करते रहे हैं।
कैदियों और परिवारों की खुशी
इस फैसले से कैदियों के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कई परिवारों ने UAE राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया और इसे “नई शुरुआत” बताया। भारतीय दूतावास ने जेलों का दौरा करके कैदियों को सहायता प्रदान की थी, जिसमें कानूनी मदद और मॉनिटरिंग शामिल थी। रिहाई के बाद इन कैदियों को भारत लौटने में दूतावास पूरा सहयोग देगा।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत सरकार की कूटनीतिक कोशिशों से विदेशी जेलों से लगभग 10,000 भारतीयों की रिहाई हो चुकी है। UAE जैसे देशों में यह संख्या काफी है, जो मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का नतीजा है।
मानवीयता और कूटनीति का संगम
यह रिहाई केवल कैदियों की मुक्ति नहीं, बल्कि भारत-UAE संबंधों की गहराई को दर्शाती है। UAE की यह परंपरा सामाजिक स्थिरता और परिवारों के पुनर्मिलन को बढ़ावा देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे gesture प्रवासी भारतीयों के मनोबल को बढ़ाते हैं और दोनों देशों के बीच विश्वास मजबूत करते हैं। हालांकि, यह भी याद दिलाता है कि प्रवासी श्रमिकों को कानूनी जागरूकता और प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन की जरूरत है ताकि ऐसे मामले कम हों।
आने वाले दिनों में इन कैदियों की वापसी शुरू हो जाएगी और उनके परिवार नए साल में उन्हें घर लौटते देखेंगे। यह घटना दोनों देशों के लिए सकारात्मक संदेश है।
Sources: द लॉजिकल इंडियंस