Netanyahu's statement on GazaNetanyahu's statement on Gaza

27 जनवरी 2026, Gaza युद्ध का निर्णायक मोड़: मध्य पूर्व में चल रहे लंबे संघर्ष के बीच आज एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण सामने आया है। इज़राइली रक्षा बलों (IDF) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि गाजा पट्टी में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान अंतिम बंधक के अवशेष बरामद कर लिए गए हैं। इस घटनाक्रम को इज़राइल-हमास युद्ध के एक महत्वपूर्ण अध्याय के समापन के रूप में देखा जा रहा है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “बंधकों को वापस लाने का हमारा पवित्र मिशन अब पूरा हो गया है।”

इस घोषणा के साथ ही क्षेत्र में युद्धविराम और शांति बहाली की नई उम्मीदें जाग उठी हैं, क्योंकि बंधकों की वापसी ही इज़राइल की प्रमुख युद्ध शर्तों में से एक थी।

खुफिया इनपुट और ‘ऑपरेशन फाइनल होमकमिंग’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़राइली खुफिया एजेंसी ‘शिन बेट’ और मोसाद को गाजा के दक्षिणी हिस्से में एक गुप्त सुरंग के बारे में सटीक जानकारी मिली थी। यह वही इलाका है जिसे पहले हमास का गढ़ माना जाता था। सूत्रों का कहना है कि यह ऑपरेशन पिछले 48 घंटों से अत्यधिक गोपनीयता के साथ चलाया जा रहा था।

IDF के प्रवक्ता ने बताया कि सैनिकों ने भारी जोखिम के बीच सुरंग नेटवर्क के भीतर प्रवेश किया। वहां से उन्हें अंतिम बंधक के अवशेष मिले, जिनकी पहचान की पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद कर ली गई है। सेना ने सम्मान के साथ अवशेषों को इज़राइल वापस लाया, जहां उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया गया। इस ऑपरेशन के दौरान किसी भी सैनिक के हताहत होने की खबर नहीं है, जिसे सेना ने एक बड़ी सामरिक सफलता बताया है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का राष्ट्र के नाम संदेश

अवशेषों की बरामदगी के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उनका स्वर गंभीर लेकिन राहत भरा था। उन्होंने कहा:

“आज इज़राइल के लोगों के लिए एक भारी मन और मिश्रित भावनाओं वाला दिन है। हमने अपने उस अंतिम भाई/बहन (बंधक) को वापस पा लिया है, जिसका इंतजार पूरा देश कर रहा था। हालांकि हम उन्हें जीवित वापस नहीं ला सके, जिसका हमें गहरा दुख है, लेकिन हमने अपना वादा निभाया है—हम किसी को पीछे नहीं छोड़ेंगे। मिशन पूरा हो गया है। अब समय है कि हम अपने घावों को भरें और भविष्य की ओर देखें।”

नेतन्याहू के इस बयान को कूटनीतिक हलकों में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि “मिशन पूरा हुआ” वाक्यांश का प्रयोग करना इस बात का संकेत है कि इज़राइल अब गाजा में अपने सैन्य अभियानों की तीव्रता को कम करने या युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

पीड़ित परिवार और जनता की प्रतिक्रिया

जैसे ही यह खबर बाहर आई, तेल अवीव के ‘बंधक स्क्वायर’ (Hostage Square) पर हजारों लोग जमा हो गए। यह वह जगह है जहां पिछले कई महीनों से बंधकों के परिवार और समर्थक प्रदर्शन कर रहे थे। आज वहां का माहौल अलग था—वहां गम और राहत दोनों थी। मोमबत्तियां जलाई गईं और प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

अंतिम बंधक के परिवार ने मीडिया से बात करते हुए सेना और सरकार का धन्यवाद किया। परिवार के एक सदस्य ने कहा, “कम से कम अब हमें एक जगह मिलेगी जहां हम जाकर रो सकते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि दे सकते हैं। अनिश्चितता का वो दर्दनाक दौर अब खत्म हुआ।”

युद्धविराम और कूटनीतिक हलचल

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर कूटनीतिक मोर्चे पर देखने को मिल रहा है। अमेरिका, कतर और मिस्र, जो लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे, ने इस विकास का स्वागत किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि बंधकों के मुद्दे का समाधान युद्धविराम वार्ता में सबसे बड़ी बाधा थी। अब जब यह अध्याय बंद हो गया है, तो वाशिंगटन को उम्मीद है कि अगले 24 से 48 घंटों में एक स्थायी युद्धविराम की घोषणा हो सकती है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इज़राइल अब गाजा के पुनर्निर्माण और भविष्य के प्रशासन के ढांचे पर बातचीत करने के लिए अधिक इच्छुक हो सकता है। हमास की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि उन पर भी अब समझौते के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव होगा।

आगे की राह: क्या युद्ध वास्तव में खत्म होगा?

हालांकि “मिशन पूरा हुआ” एक बड़ा बयान है, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी जटिल है। गाजा का एक बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका है और मानवीय संकट गहराया हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि इज़राइल अपनी सेना को कब वापस बुलाता है और गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति कितनी तेजी से बहाल होती है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर भी घरेलू राजनीति का दबाव है। उनके आलोचक पूछ रहे हैं कि “अगले चरण” की योजना क्या है? क्या गाजा में कोई नई सरकार बनेगी? सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?

फिलहाल, दुनिया की नजरें यरुशलम पर टिकी हैं। आज का दिन इतिहास में दर्ज हो गया है—एक त्रासद अध्याय के अंत और शायद, शांति की एक नई और धुंधली शुरुआत के रूप में।

Sources: ज़ी न्यूज़

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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