18 दिसंबर 2025 Traffic Police – बिहार के पूर्णिया जिले में Traffic Police की मनमानी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। दालकोला चेकपोस्ट पर तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) ने ट्रक ड्राइवर से 500 रुपये की रिश्वत मांगी, इनकार पर थप्पड़ जड़ दिया, और फिर ड्राइवरों के गुस्से से भागते नजर आए। यह पूरा हादसा मोबाइल कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। वीडियो के वायरल होते ही जिला परिवहन अधिकारी (DTO) ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। ASI को लाइन हाजिर कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय ट्रक ड्राइवरों का गुस्सा ठंडा पड़ने का नाम नहीं ले रहा। वे DTO कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं और अवैध वसूली बंद करने की मांग कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे – चेकपोस्ट पर हुई घटना से लेकर वीडियो के वायरल होने, कार्रवाई और व्यापक प्रभाव तक।
दालकोला चेकपोस्ट: रिश्वत की संस्कृति का अड्डा
कहानी की शुरुआत 12 दिसंबर 2025 की दोपहर से होती है, जब पूर्णिया-किशनगंज मार्ग पर स्थित दालकोला चेकपोस्ट पर सैकड़ों ट्रक खड़े थे। यह चेकपोस्ट सीमांचल क्षेत्र का एक व्यस्त बिंदु है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों वाहन परमिट, चालान और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए रुकते हैं। ट्रक ड्राइवर राजेश कुमार (नाम परिवर्तित), जो कोलकाता से सामान लादकर पूर्णिया आ रहे थे, ने बताया कि ASI राकेश सिंह ने बिना किसी उल्लंघन के उनका ट्रक रोका। “साहब ने कहा कि परमिट चेक करना है, लेकिन असल में 500 रुपये मांगे। मैंने कहा कि सब दस्तावेज सही हैं, तो उन्होंने गुस्से में थप्पड़ मार दिया,” राजेश ने अपनी आपबीती सुनाई।
यह कोई पहली घटना नहीं है। स्थानीय ट्रक चालकों के अनुसार, दालकोला चेकपोस्ट पर रिश्वत की ‘हैवी ड्यूटी’ चलती है। एक ट्रक पर 200-500 रुपये तक वसूला जाता है, चाहे वाहन का कोई उल्लंघन हो या न हो। राजेश ने इनकार किया, तो ASI ने न केवल थप्पड़ मारा, बल्कि ट्रक को जब्त करने की धमकी भी दी। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। आसपास के अन्य ड्राइवरों ने हल्ला मचा दिया। वे चिल्लाने लगे, “रिश्वतखोरी बंद करो!” और ASI को घेर लिया। डरकर भागे ASI को ड्राइवरों ने पीछा किया, लेकिन वे किसी तरह अपनी जीप में सवार होकर फरार हो गए। यह दृश्य इतना ड्रामेटिक था कि एक ड्राइवर ने अपना मोबाइल निकाला और पूरा वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
वायरल वीडियो: थप्पड़ से भागने तक का डरावना सीन
वीडियो की लंबाई करीब डेढ़ मिनट है, लेकिन इसमें ट्रैफिक पुलिस की गुंडागर्दी साफ झलकती है। क्लिप की शुरुआत में ASI को ट्रक के पास खड़े होकर ड्राइवर से बहस करते देखा जा सकता है। वे चिल्लाते हैं, “पैसे दो, वरना ट्रक जब्त!” राजेश इनकार करते हैं, तो ASI का हाथ उठता है और जोरदार थप्पड़ पड़ जाता है। ड्राइवर दर्द से कराहते हैं, लेकिन तुरंत अन्य ट्रक वाले इकट्ठा हो जाते हैं। वे ASI को घेरते हैं, नारे लगाते हैं – “भ्रष्टाचार हटाओ, ट्रक चलाओ!” ASI घबरा जाते हैं, पीछे हटते हैं और भागने की कोशिश करते हैं। वीडियो के अंत में वे जीप की ओर दौड़ते नजर आते हैं, जबकि ड्राइवर पीछा करते हुए कहते हैं, “कैमरे में सब रिकॉर्ड हो गया!”
यह वीडियो 13 दिसंबर की शाम को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपलोड हुआ। मात्र 24 घंटों में इसे लाखों व्यूज मिले। #PurniaTrafficBribery और #BiharPoliceMisconduct जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। यूट्यूब पर भी यह वीडियो अपलोड हो गया, जहां टाइटल था “ट्रक ड्राइवरों को रोक मांग रहा था रिश्वत, फिर जो हुआ | Viral Video”। स्थानीय मीडिया ने इसे सबसे पहले कवर किया, और फिर राष्ट्रीय चैनलों तक बात पहुंच गई। सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट्स में लिखा, “बिहार पुलिस का यह चेहरा शर्मनाक है। कब सुधरेगी व्यवस्था?” एक यूजर ने तो लिखा, “ASI को निलंबित करो, नहीं तो हम चेकपोस्ट जला देंगे।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया: जांच और लाइन हाजिर
वीडियो वायरल होते ही पूर्णिया DTO कार्यालय में हड़कंप मच गया। DTO डॉ. अजय कुमार ने तत्काल एक्शन लिया। 14 दिसंबर को उन्होंने ASI राकेश सिंह को लाइन हाजिर कर दिया और विभागीय जांच के आदेश जारी किए। एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई, जिसमें ट्रैफिक इंस्पेक्टर और एक स्वतंत्र अधिकारी शामिल हैं। समिति का काम है वीडियो की प्रामाणिकता जांचना, रिश्वत की मांग की पुष्टि करना और यदि अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं तो उन्हें भी चिह्नित करना।
DTO ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “यह वीडियो हमारे संज्ञान में आ गया है। गंभीरता को देखते हुए ASI को लाइन अटैच किया गया है। जांच पूरी होने पर सख्त कार्रवाई होगी। हम ट्रैफिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं।” लेकिन ड्राइवरों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। 15 दिसंबर को दर्जनों ट्रक ड्राइवरों ने DTO कार्यालय को घेर लिया। वे ट्रैक्टर-ट्रेलर लेकर पहुंचे और नारेबाजी की। पप्पू यादव जैसे स्थानीय नेता भी समर्थन में उतर आए, लेकिन वे भी ‘बेबस’ नजर आए। ड्राइवरों ने मांग की कि चेकपोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और रिश्वतखोरी के खिलाफ सख्त कानून बने।
ASI राकेश सिंह ने खुद को बरी करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “यह सब गलतफहमी है। ड्राइवर ने उल्लंघन किया था, इसलिए बहस हुई। थप्पड़ का आरोप बेबुनियाद है।” लेकिन वीडियो सबूत के सामने यह दावा खोखला साबित हो रहा है। जांच समिति ने ड्राइवर राजेश से पूछताछ की, जो वीडियो के साथ थाने पहुंचे थे।
स्थानीय आक्रोश: धरना और व्यापक असंतोष
यह घटना पूर्णिया के ट्रक ड्राइवर समुदाय में आग की तरह फैल गई। ऑल इंडिया ट्रक ड्राइवर्स यूनियन के जिला अध्यक्ष मोहन पासवान ने कहा, “हम रोज रिश्वत देते हैं, लेकिन इस बार हद हो गई। ASI ने थप्पड़ मारा, तो हम चुप नहीं रह सकते।” धरने में महिलाएं भी शामिल हुईं, जो अपने पतियों की चिंता जता रही थीं। एक ड्राइवर की पत्नी ने बताया, “रोज चेकपोस्ट पर 300-400 रुपये वसूले जाते हैं। इससे परिवार का गुजारा मुश्किल हो जाता है।”
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तीखी हैं। फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा गया, “बिहार का सबसे भ्रष्ट विभाग परिवहन। ड्राइवर का दिमाग फिरा तो क्या होगा?” इंस्टाग्राम रील्स में वीडियो को लाखों लाइक्स मिले। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि दालकोला चेकपोस्ट पर ऐसी घटनाएं आम हैं, लेकिन पहली बार वीडियो ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया।
बिहार में भ्रष्टाचार का काला साया: व्यापक संदर्भ
यह घटना बिहार के परिवहन विभाग के लिए कोई नई नहीं है। राज्य में Traffic Police पर रिश्वतखोरी के सैकड़ों मामले दर्ज हैं। 2024 में ही पटना के एक चेकपोस्ट पर इसी तरह का वीडियो वायरल हुआ था, जहां एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में परिवहन विभाग भ्रष्टाचार के मामले में टॉप पर है। गरीब ड्राइवर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास न पैसे होते हैं न कानूनी सहायता।
सरकार ने ‘ई-चालान’ और डिजिटल परमिट जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव न के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया अब भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। अगर अधिकारी सतर्क रहें, तो ऐसी घटनाएं रुक सकती हैं। पूर्णिया जैसे सीमांचल क्षेत्रों में, जहां ट्रक ट्रैफिक भारी है, चेकपोस्ट सुधार जरूरी है।
निष्कर्ष: सुधार की उम्मीद, लेकिन सफर लंबा
पूर्णिया की यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक छोटी जीत है। ASI का लाइन हाजिर होना ड्राइवरों को न्याय का भरोसा देता है, लेकिन सवाल बाकी हैं – क्या जांच निष्पक्ष होगी? क्या रिश्वत की रकम वापस आएगी? और सबसे बड़ा, क्या बिहार की ट्रैफिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी? DTO की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सिस्टम में जड़ से बदलाव चाहिए। ड्राइवरों को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल शिकायत तंत्र और सख्त निगरानी जरूरी है। आखिरकार, वर्दी सेवा की प्रतीक होनी चाहिए, न कि वसूली की।