Protest of Toto drivers in ArariaProtest of Toto drivers in Araria

29 जनवरी 2026, Araria में टोटो चालकों का उबाल: बिहार सरकार के परिवहन विभाग द्वारा नेशनल हाईवे (NH) और स्टेट हाईवे (SH) पर ई-रिक्शा (टोटो) के परिचालन पर लगाए गए प्रतिबंध ने अररिया जिले के हजारों चालकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है। सड़क सुरक्षा के नाम पर जारी इस आदेश से नाराज टोटो चालक संघ ने बुधवार को जिले में एक बड़ी बैठक आयोजित की। परमान नदी के किनारे स्थित बाबा जी कुटिया परिसर में हुई इस बैठक में सैकड़ों चालकों ने हिस्सा लिया और प्रतिबंध के खिलाफ रणनीति बनाई। चालकों का कहना है कि हाईवे पर टोटो चलाने की मनाही से उनकी कमाई आधी रह गई है, जबकि वैकल्पिक व्यवस्था का कोई इंतजाम नहीं किया गया। संघ ने स्टैंड आवंटन की मांग को तेज कर दिया है, ताकि चालक शहर और गांवों में सुरक्षित और निर्धारित जगह से यात्रियों को ले जा सकें।

बैठक में क्या हुआ?

बुधवार (28 जनवरी 2026) को आयोजित बैठक में टोटो चालक संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रतिबंध के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की। संघ के अध्यक्ष और अन्य नेताओं ने चालकों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार का यह फैसला एकतरफा है और इससे गरीब चालकों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। बैठक में मौजूद एक चालक ने बताया, “हाईवे पर टोटो नहीं चला सकेंगे तो हम कहां जाएंगे? ज्यादातर रूट NH और SH से ही जुड़े हैं। गांव से शहर आने-जाने वाले यात्री टोटो पर ही निर्भर हैं।”

चालकों ने आरोप लगाया कि प्रतिबंध लागू होने के बाद पुलिस और परिवहन विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है, वाहन जब्त कर रही है और जुर्माना लगा रही है। इससे चालक डर के साए में जी रहे हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर जल्द स्टैंड आवंटित नहीं किए गए और प्रतिबंध में छूट नहीं दी गई, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संघ ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को ज्ञापन सौंपने की योजना भी बनाई है।

प्रतिबंध का बैकग्राउंड

बिहार सरकार ने जनवरी 2026 में सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ई-रिक्शा और जुगाड़ वाहनों को हाईवे पर चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। परिवहन विभाग का तर्क है कि टोटो की गति कम होती है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। हाईवे पर बड़े वाहनों की स्पीड अधिक होने से टोटो चालक और यात्री असुरक्षित रहते हैं। विभाग ने सभी जिलों के DTO (डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर) को आदेश दिया है कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए।

अररिया जैसे सीमांचल जिलों में यह प्रतिबंध ज्यादा मारक साबित हो रहा है, क्योंकि यहां नेपाल बॉर्डर के करीब होने से आवागमन ज्यादा है और टोटो सस्ता और सुगम साधन है। जिले में हजारों टोटो हैं, जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से शहर और हाईवे से जुड़े रूटों पर चलते हैं। प्रतिबंध से न केवल चालकों की आय प्रभावित हुई है, बल्कि आम जनता को भी परेशानी हो रही है। यात्री अब बस या अन्य महंगे साधनों पर निर्भर हो गए हैं।

चालकों की मुश्किलें और मांगें

टोटो चालक ज्यादातर गरीब और निम्न मध्यम वर्ग से आते हैं। कई चालकों ने कर्ज लेकर टोटो खरीदा है और EMI चुकाते हैं। एक चालक ने बताया, “पहले दिन में 500-700 रुपये कमा लेते थे, अब मुश्किल से 200-300। हाईवे से बचकर छोटी सड़कों पर चलें तो समय ज्यादा लगता है और यात्री नहीं मिलते।”

संघ की मुख्य मांगें:

  • हाईवे पर सीमित गति और निर्धारित लेन में टोटो चलाने की अनुमति।
  • शहर और प्रमुख स्थानों पर टोटो स्टैंड का आवंटन।
  • जब्त वाहनों की तुरंत रिहाई और जुर्माने में छूट।
  • चालकों के लिए वैकल्पिक रोजगार या सब्सिडी की व्यवस्था।

बैठक में चालकों ने कहा कि अगर स्टैंड मिल जाएं तो वे शहर के अंदर ही परिचालन कर सकते हैं, जिससे हाईवे की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अभी तक नगर निगम या प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध सही है, लेकिन इसके साथ वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी थी। ट्रैफिक एक्सपर्ट कहते हैं कि ई-रिक्शा हाई-स्पीड हाईवे के लिए डिजाइन नहीं हैं, इससे दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। बिहार में पिछले सालों में हाईवे पर टोटो से जुड़े कई हादसे हुए हैं।

वहीं, वाम दलों ने प्रतिबंध पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गरीब चालकों की आजीविका छीने बिना सुरक्षा सुनिश्चित करने के अन्य तरीके हैं, जैसे स्पीड लिमिटर लगाना या अलग लेन बनाना। कुछ विपक्षी नेता भी चालकों के समर्थन में उतर रहे हैं।

समान मामले और आगे की राह

बिहार के अन्य जिलों जैसे पटना, मुजफ्फरपुर में भी टोटो चालकों ने प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। पटना में तो बड़े स्तर पर धरना हुआ था। अररिया में यह विरोध अभी शुरुआती में है, लेकिन बैठक से संकेत मिलता है कि मामला तूल पकड़ सकता है।

टोटो चालकों की यह लड़ाई न केवल उनकी आजीविका की है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। सरकार को चाहिए कि चालकों से संवाद कर बीच का रास्ता निकाले। स्टैंड आवंटन और ट्रेनिंग जैसे कदम से दोनों पक्षों का भला हो सकता है। फिलहाल चालक इंतजार में हैं कि उनकी आवाज सुनी जाए।

Sources: प्रभात खबर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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