10 दिसंबर 2025: दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद ने हिंसक रूप धारण कर लिया है। पिछले तीन दिनों से जारी झड़पों ने न केवल सैन्य तनाव बढ़ाया है, बल्कि करीब 5 लाख निर्दोष नागरिकों को अपने घरों से बेघर कर दिया है। प्राचीन प्रीह विहार मंदिर के आसपास का विवादित क्षेत्र अब युद्ध का मैदान बन चुका है, जहां दोनों देशों की सेनाएं भारी हथियारों से लैस होकर आमने-सामने हैं। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है, लेकिन स्थिति बेकाबू होती जा रही है।

इस संघर्ष की जड़ें ऐतिहासिक हैं। 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने प्रीह विहार मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया था, लेकिन सीमावर्ती इलाके पर दोनों देश दावा ठोंकते रहे हैं। 2008-2011 के बीच भी इसी मुद्दे पर झड़पें हुई थीं, जिसमें दर्जनों सैनिक मारे गए थे। अब, 2025 में, कंबोडियाई सेना द्वारा एक निगरानी ड्रोन के इस्तेमाल और भारी हथियारों की गोलीबारी से विवाद भड़का। थाईलैंड का दावा है कि कंबोडिया ने पहले हमला किया, जबकि प्नोम पेन्ह इसे आत्मरक्षा बता रहा है। मंगलवार को थाई वायुसेना ने सीमा पर हवाई हमले किए, जिसमें चार नागरिक मारे गए।

वर्तमान स्थिति भयावह है। रॉयल थाई आर्मी के अनुसार, झड़पें अब नए मोर्चों पर फैल चुकी हैं, और मौतों का आंकड़ा 50 से अधिक हो गया है। कंबोडिया के उत्तरी प्रांतों में तोपखाने की गोलाबारी से गांव उजड़ गए हैं, जबकि थाईलैंड के सूरिन प्रांत में हजारों शरणार्थी अस्थायी शिविरों में ठूंस लिए गए हैं। एल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे बहुमत में हैं। खाद्य, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से मानवीय संकट पैदा हो गया है। रेड क्रॉस और यूएनएचसीआर जैसी संस्थाएं राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन गोलीबारी के कारण पहुंच मुश्किल हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। अमेरिकी राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे दोनों नेताओं से फोन पर बात करेंगे और संघर्ष रोकने का प्रयास करेंगे। सीबीएस न्यूज के अनुसार, ट्रंप द्वारा मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन लड़ाई जारी है। यूएस एम्बेसी ने अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है, जिसमें सीमा क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी गई है। एशियन इंस्टीट्यूट फॉर पीस ने चेतावनी दी है कि यह विवाद पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला सकता है, खासकर म्यांमार और लाओस जैसे पड़ोसी देशों को प्रभावित कर सकता है।

थाईलैंड के विदेश मंत्री ने कहा कि बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही, जबकि कंबोडियाई प्रधानमंत्री हून मानेत ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक नुकसान भी भारी होगा—दोनों देशों का पर्यटन उद्योग ठप हो चुका है, और व्यापारिक मार्ग बंद हैं। बीबीसी की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, हजारों लोग अभी भी फंस गए हैं।

इस संकट से सबक लेना जरूरी है। सीमा विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। यदि संघर्ष नहीं रुका, तो दक्षिण-पूर्व एशिया की शांति खतरे में पड़ जाएगी। अंतरराष्ट्रीय दबाव और दोनों सरकारों की जिम्मेदारी से ही लाखों बेघरों को न्याय मिलेगा।

By SHAHID

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