Tejaswi Yadav's VIP Security changedTejaswi Yadav's VIP Security changed

23 जनवरी 2026, बिहार में VIP सुरक्षा का सियासी खेल: बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव की Z श्रेणी की सुरक्षा घटाकर Y+ कर दी गई, जबकि NDA खेमे के कई नेताओं को Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई। इस बदलाव पर RJD ने तीखा हमला बोला और इसे “सियासी साजिश” व “बदले की भावना” करार दिया। सरकार का कहना है कि यह फैसला खुफिया इनपुट और खतरे की समीक्षा के आधार पर लिया गया है। यह बदलाव बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहा है।

सुरक्षा में बदलाव के विवरण

बिहार गृह विभाग ने गुरुवार को कई नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में संशोधन किया। सबसे चर्चित बदलाव तेजस्वी यादव का है – उनकी Z श्रेणी (जिसमें 20+ जवान और कमांडो शामिल होते हैं) को घटाकर Y+ (8 जवान और 1-2 कमांडो) कर दिया गया। वहीं, BJP और JDU के कई प्रमुख नेताओं को बढ़ी सुरक्षा मिली:

  • BJP नेता नितिन नवीन और संजय सरावगी को Z श्रेणी।
  • JDU के ललन सिंह को भी Z श्रेणी प्रदान।
  • कुछ अन्य NDA नेताओं की सुरक्षा में भी इजाफा।

इसके अलावा, कुछ विपक्षी नेताओं जैसे कांग्रेस के मदन मोहन झा, RJD के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी और राजेश राम की सुरक्षा पूरी तरह हटा ली गई। कुल मिलाकर, NDA खेमे के नेताओं को फायदा पहुंचा, जबकि महागठबंधन के नेताओं की सुरक्षा घटी।

पृष्ठभूमि: खतरे की समीक्षा या राजनीतिक दबाव?

बिहार में VIP सुरक्षा की समीक्षा समय-समय पर खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर होती है। पिछले साल (2025) विधानसभा चुनाव से पहले कई नेताओं – जिसमें तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी शामिल थे – की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। लेकिन अब चुनाव बाद यह बदलाव आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में अपराध और राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है, इसलिए सुरक्षा जरूरी है। हालांकि, इस बार का फेरबदल एकतरफा लग रहा है।

JDU मंत्री ने तेजस्वी की सुरक्षा घटाने पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या तेजस्वी को जान का खतरा नहीं है?” लेकिन सरकार का पक्ष है कि समीक्षा निष्पक्ष और खतरे के आधार पर हुई।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: साजिश और बदले की राजनीति

RJD ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया। पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि यह “स्पष्ट सियासी साजिश” है। तेजस्वी यादव ने खुद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुरक्षा घटाना सरकार की छोटी सोच दर्शाता है। उन्होंने व्यंग्य किया, “शायद सरकार को लगता है कि अब मुझे खतरा नहीं है।” RJD ने आरोप लगाया कि NDA सरकार विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है।

सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में RJD नेताओं ने इसे “बदले की कार्रवाई” बताया। कुछ ने कहा कि तेजस्वी के आक्रामक विपक्षी रुख से सरकार बौखलाई हुई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी समर्थन किया और इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया।

NDA का पक्ष: खतरे के आधार पर फैसला

BJP और JDU ने आरोपों को खारिज किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि सुरक्षा खुफिया रिपोर्ट पर आधारित है, न कि राजनीतिक दबाव पर। एक JDU नेता ने कहा, “जिन्हें खतरा ज्यादा है, उन्हें ज्यादा सुरक्षा। यह कोई नया नहीं है।” BJP ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि अगर खतरा कम हुआ तो सबकी सुरक्षा क्यों नहीं घटी?

प्रभाव: बिहार की राजनीति पर असर

यह विवाद बिहार की राजनीति को और ध्रुवीकृत कर सकता है। तेजस्वी यादव महागठबंधन के प्रमुख चेहरा हैं और उनकी सुरक्षा घटाना विपक्ष को एकजुट करने का मुद्दा दे रहा है। आने वाले दिनों में प्रदर्शन या विधानसभा में हंगामा संभव है। इससे सरकार की छवि पर भी असर पड़ेगा, खासकर जब अपराध नियंत्रण सरकार का बड़ा दावा है।

सुरक्षा कर्मियों की कमी के बीच ऐसे फेरबदल संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप भी लग रहा है। आम जनता में चर्चा है कि VIP सुरक्षा पर इतना खर्च क्यों, जब आम लोग असुरक्षित हैं?

निष्पक्षता की जरूरत

बिहार में सुरक्षा बदलाव का यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां सरकार इसे तकनीकी फैसला बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग का प्रमाण। लोकतंत्र में सुरक्षा निष्पक्ष और खतरे पर आधारित होनी चाहिए, न कि सियासी समीकरण पर। आने वाले दिन बताएंगे कि यह विवाद कितना आगे बढ़ता है।

Sources: पंजाब केसरी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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