The scary face of superstition in PurniaThe scary face of superstition in Purnia

23 फरवरी 2026, Purnia में अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा: बिहार के पूर्णिया जिले में अंधविश्वास और डायन प्रथा की क्रूरता ने एक बार फिर इंसानियत को झकझोर दिया है। जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के टेटगामा (या टेटमा) गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की डायन बताकर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, फिर उनके शवों को पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाया गया और अधजले शवों को जलकुंभियों वाले पोखर में छिपा दिया गया। यह घटना जुलाई 2025 में हुई थी, लेकिन इसका दर्द आज भी स्थानीय लोगों और पूरे राज्य में गहरा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि ऐसी घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।

घटना का क्रूर विवरण

घटना की रात करीब 10 बजे गांव के लगभग 50-60 लोगों की भीड़ (कुछ रिपोर्ट्स में 250 तक का जिक्र) मृतक परिवार के घर पर पहुंची। आरोप था कि परिवार की बुजुर्ग महिला कातो देवी (70 वर्ष) डायन है और गांव में हाल ही में एक बच्चे की मौत के पीछे उसका हाथ है। परिवार झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र करता था, जिससे गांव वाले पहले से नाराज थे।

  • पीड़ित: बाबूलाल उरांव (50 वर्ष), उनकी पत्नी सीता देवी (45 वर्ष), मां कातो देवी (70 वर्ष), बेटा मंजीत उरांव (25 वर्ष) और बहू रानी देवी (22 वर्ष)।
  • भीड़ ने पहले बांस की लाठियों और अन्य हथियारों से पीटा, फिर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जला दिया।
  • शवों को ट्रैक्टर-ट्राली से एक किलोमीटर दूर पोखर के पास ले जाकर जलकुंभियों के नीचे छिपाया गया।

घटना के एकमात्र जीवित बचे सदस्य सोनू कुमार (16 वर्ष) ने पुलिस को बताया, “मेरे सामने ही मेरी मां को डायन कहकर पीटा गया। जब बाकी परिवार बचाने आए, तो सबको मार डाला। मैं छिपकर देखता रहा और सुबह पुलिस को सूचना दी।” सोनू ने 10 घंटे बाद पुलिस को फोन किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस जांच और गिरफ्तारियां

पूर्णिया पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें एक तांत्रिक भी शामिल था। जांच में पता चला कि तांत्रिक ने डायन का आरोप लगवाया था। एक आरोपी नकुल उरांव ने 40 हजार रुपये देकर ट्रैक्टर किराए पर लिया था ताकि शव ठिकाने लगाए जा सकें।

  • FIR: 23 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या, साजिश और सबूत मिटाने के आरोप।
  • NHRC का संज्ञान: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार से रिपोर्ट मांगी।
  • पुलिस ने कहा कि गांव में पिछले 1.5 साल में 5 बच्चों की मौत हुई थी, जिससे अंधविश्वास बढ़ा।

जांच में पता चला कि गांव के कई लोग शामिल थे, लेकिन डर के कारण वे फरार हो गए। पूरा गांव वीरान पड़ गया, मवेशी और घर छोड़कर लोग भाग गए। पुलिस अब भी गांव में गश्त कर रही है।

अंधविश्वास की जड़ें और सामाजिक प्रभाव

पूर्णिया जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में डायन प्रथा और टोना-टोटका आम हैं। NGO निरंतर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डायन आरोपों के 97% शिकार आदिवासी, दलित या पिछड़े वर्ग के होते हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

  • कारण: अज्ञानता, शिक्षा की कमी, गरीबी और बीमारियों/मौतों को जादू-टोने से जोड़ना।
  • सरकारी प्रयास: बिहार में ‘डायन प्रथा निषेध अधिनियम’ है, लेकिन लागू नहीं हो पा रहा। जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
  • विपक्ष का रुख: RJD नेता तेजस्वी यादव और सांसद पप्पू यादव ने सरकार पर कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया।

यह घटना पूर्णिया में अंधविश्वास की क्रूरता का सबसे बड़ा उदाहरण है। गांव वाले अब भी डर में जी रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार का एकमात्र सदस्य सदमे में है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा, जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई से ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

Sources: बीबीसी

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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