23 दिसंबर 2025, Shashi Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और लेखक Shashi Tharoor ने बिहार के पिछले 20 वर्षों में हुए अभूतपूर्व परिवर्तन की दिल खोलकर तारीफ की है। नालंदा साहित्य उत्सव 2025 के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए Tharoor ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के बुनियादी ढांचे के विकास को “राष्ट्रीय गौरव” बताया। उन्होंने कहा कि बिहार अब “पिछड़ेपन की छाया” से बाहर निकलकर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो गया है। यह टिप्पणी न केवल राजनीतिक हलचल पैदा कर रही है, बल्कि विपक्षी नेता के रूप में थरूर की यह सराहना बिहार मॉडल की वैश्विक अपील को रेखांकित करती है।
नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार के बीच आयोजित इस उत्सव में Tharoor ने बिहार के सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान पर प्रकाश डाला। 21 दिसंबर को राजगीर के ऐतिहासिक स्थलों पर शुरू हुए चार दिवसीय उत्सव का उद्घाटन Tharoor ने बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान के साथ किया। उन्होंने कहा, “बिहार की सड़कें बेहतर हो गई हैं। रात के समय भी लोग सड़कों पर घूमते नजर आते हैं, जो पहले कभी नहीं था। बिजली चल रही है, पानी की व्यवस्था सुधरी है—ये सभी परिवर्तन हाल के वर्षों में हुए हैं।” Tharoor ने स्पष्ट किया कि वे राजनीति में न पड़ते हुए भी बिहार की प्रगति से “खुश” हैं और इसके श्रेय के हकदार राज्य के लोग व उनके प्रतिनिधि हैं। यह बयान 2005 में नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद बिहार के सफर को दर्शाता है, जब राज्य लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में “अराजकता और भ्रष्टाचार” की गिरफ्त में था।
Tharoor की तारीफ बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति पर केंद्रित रही। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार को विशेष रूप से उल्लेख किया, जहां अब 22 देशों के छात्र पढ़ रहे हैं। “नालंदा का पुनरुद्धार भारत के लिए गौरव का क्षण है। विदेश मंत्रालय (MEA) की भूमिका सराहनीय है, जो इस प्राचीन विरासत को जीवंत कर रहा है,” Tharoor ने कहा। उत्सव के दौरान उन्होंने साहित्यिक सत्रों में भी बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि पर जोर दिया, कहते हुए कि “शिक्षा कक्षाओं से परे होनी चाहिए—नालंदा जैसी जगहें ज्ञान की जड़ें मजबूत करती हैं।” यह टिप्पणी बिहार सरकार की शिक्षा और पर्यटन नीतियों को मजबूती प्रदान करती है, जहां पिछले दो दशकों में साक्षरता दर 47% से बढ़कर 70% से ऊपर पहुंच गई है।
बिहार के 20 वर्षों का सफर वाकई प्रेरणादायक रहा है। 2005 से पहले राज्य अपराध, गरीबी और प्रवासन का पर्याय था। नीतीश कुमार के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था सुधार, सड़क नेटवर्क का विस्तार (लगभग 1 लाख किमी नई सड़कें) और बिजली पहुंच (90% से अधिक घरों तक) जैसे कदमों ने चेहरा बदल दिया। जीडीपी वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर रही, और 2025 में बिहार ने 17 नए औद्योगिक पार्कों की घोषणा की, जो 180 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करेंगे। थरूर की सराहना इन आंकड़ों को मान्यता देती है, जो विपक्ष के “फ्रीबी” आरोपों के बीच एक सकारात्मक स्वर लाती है।
इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तीखी रही हैं। भाजपा विधायक राम कदम ने इसे “राष्ट्रीय भावना का प्रतिबिंब” बताया, कहते हुए कि Tharoor की टिप्पणी एनडीए शासन की पुष्टि करती है। उन्होंने लालू-राबड़ी काल की तुलना में वर्तमान को “विकास की मुख्यधारा” का हिस्सा कहा। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने थरूर के अवलोकनों को राज्य के विकास का प्रमाण माना, विशेषकर नालंदा जैसे प्रोजेक्ट्स में। दूसरी ओर, कांग्रेस के ही सांसद इमरान मसूद ने थरूर पर “दिशाहीन” होने का आरोप लगाया, कहते हुए कि वे कांग्रेस में रहते हुए भी प्रधानमंत्री और बिहार मॉडल की तारीफ कर रहे हैं। यह आंतरिक कलह कांग्रेस के लिए 2026 बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनौती पैदा कर रही है।
Tharoor की यह यात्रा साहित्यिक आयोजन से आगे बढ़कर राजनीतिक संवाद का माध्यम बनी। नालंदा साहित्य उत्सव, जो 21-25 दिसंबर तक चल रहा है, में 100 से अधिक लेखक, विचारक और कलाकार भाग ले रहे हैं। थरूर ने उद्घाटन सत्र में “समावेशी साहित्य” पर जोर दिया, जो बिहार की बहुलतावादी संस्कृति को प्रतिबिंबित करता है। उत्सव के थीम “कम्युनिके, कंसेप्शंस एंड पैनाच” ने सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा दिया, जहां थरूर ने अपनी पुस्तकों के माध्यम से वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। बिहार सरकार ने इस आयोजन को पर्यटन बढ़ाने का अवसर माना, जिससे राज्य की जीडीपी में 5% योगदान की उम्मीद है।
Tharoor की तारीफ बिहार के लिए एक वैश्विक मान्यता है। एक ऐसे राज्य ने, जो कभी “BIMARU” श्रेणी में था, अब डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में अग्रणी है। हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं—बेरोजगारी, बाढ़ और प्रवासन। लेकिन थरूर जैसे बुद्धिजीवी की सराहना से नीतीश सरकार को नैतिक बल मिला है। विपक्ष को अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा, जबकि एनडीए 2026 चुनावों के लिए उत्साहित है।
अंत में, Tharoor का बयान साबित करता है कि विकास राजनीति से ऊपर है। बिहार का 20 वर्षों का सफर संघर्ष से सफलता की कहानी है, जो अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा। नालंदा की प्राचीन दीवारें गवाह हैं कि ज्ञान और विकास का संगम ही भविष्य रचता है।
Sources: एनडीटीवी