27 दिसंबर 2025, Thailand-Cambodia– दक्षिण-पूर्व एशिया में तनावपूर्ण सीमा विवाद को शांत करने के लिए Thailand और Cambodia ने एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने आज एक नया युद्धविराम समझौता साइन किया, जो हफ्तों से चली आ रही घातक झड़पों को समाप्त करने का वादा करता है। यह समझौता 20 दिनों की हिंसक लड़ाई के बाद आया है, जिसमें दर्जनों सैनिक मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। थाई रक्षा मंत्री नाथापोन नार्कफैनिट और उनके कंबोडियाई समकक्ष टी सेइहा ने बैंकॉक में आयोजित द्विपक्षीय बैठक में इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह कदम क्षेत्रीय शांति के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए और प्रयास जरूरी हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
Thailand और Cambodia के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है, जो मुख्य रूप से प्राचीन खमेर मंदिरों के आसपास केंद्रित है। सबसे प्रमुख विवाद प्रेाह विहियर मंदिर (कंबोडिया में) और उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर है, जिसे 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने कंबोडिया को सौंपा था, लेकिन थाईलैंड ने कभी इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। हाल के वर्षों में, यह विवाद आर्थिक हितों, जैसे प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन, से जुड़ गया।
2025 में तनाव तब चरम पर पहुंचा जब 8 दिसंबर को कुआलालंपुर शांति समझौता टूट गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसके बाद सीमा पर गोलीबारी शुरू हो गई। कंबोडिया ने थाई हवाई हमलों की शिकायत की, जबकि थाईलैंड ने कंबोडियाई घुसपैठ का हवाला दिया। 23 दिसंबर को दोनों देशों ने जनरल बॉर्डर कमिटी (GBC) की बैठक बुलाई, जो थाई सीमा पर आयोजित हुई। इस बैठक में प्रारंभिक युद्धविराम पर सहमति बनी, लेकिन पूर्ण समझौता आज ही संभव हुआ। पिछले 20 दिनों में कम से कम 50 सैनिकों की मौत हुई, और हजारों नागरिक विस्थापित हुए। यह संघर्ष ASEAN (एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस) की एकता के लिए चुनौती बन गया था।
समझौते का विवरण
नया युद्धविराम समझौता व्यापक है और इसमें कई प्रावधान शामिल हैं। सबसे पहले, दोनों पक्षों ने तत्काल प्रभाव से सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने का वादा किया है। कोई भी पक्ष अपनी सीमा पर अतिरिक्त सैनिक तैनात नहीं करेगा, और न ही किसी प्रकार का उल्लंघन होगा। समझौते में GBC की नियमित बैठकों का प्रावधान है, जो हर तिमाही आयोजित होगी। इसके अलावा, संयुक्त सीमा निरीक्षण टीम गठित की जाएगी, जिसमें थाई और कंबोडियाई अधिकारी शामिल होंगे।
रक्षा मंत्री नाथापोन ने साइनिंग समारोह के बाद कहा, “यह समझौता हमारे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का प्रतीक है। हम शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करेंगे।” वहीं, टी सेइहा ने जोर दिया कि कंबोडिया थाई हवाई हमलों की जांच की मांग करेगा, लेकिन फिलहाल शांति प्राथमिकता है। समझौते में नागरिकों की सुरक्षा पर भी फोकस है – विस्थापित परिवारों को तुरंत सहायता पहुंचाई जाएगी, और सीमा क्षेत्र में मानवीय सहायता बढ़ाई जाएगी। ASEAN महासचिव गाओ यों ने इस कदम का स्वागत किया, इसे “क्षेत्रीय स्थिरता के लिए विजय” बताया।
इस समझौते का महत्व
यह युद्धविराम दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक राहत है। Thailand और Cambodia दोनों ही उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं, जहां सीमा विवाद ने निवेश और व्यापार को प्रभावित किया। 2025 में थाईलैंड का पर्यटन क्षेत्र पहले ही COVID-19 के बाद रिकवर कर रहा था, लेकिन संघर्ष ने प्रेाह विहियर जैसे स्थलों पर पर्यटकों को भगाया। कंबोडिया के लिए, जो कृषि और वस्त्र निर्यात पर निर्भर है, यह शांति फसल और व्यापार को बढ़ावा देगी।
वैश्विक स्तर पर, यह समझौता चीन और अमेरिका जैसे महाशक्तियों के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करेगा, क्योंकि दोनों देश इन विवादों का फायदा उठा रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम 1962 के ICJ फैसले को लागू करने की दिशा में बढ़ेगा। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के दौर में सीमा क्षेत्र के जंगलों का संरक्षण महत्वपूर्ण है, जो इस समझौते से संभव होगा। थाई प्रधानमंत्री सेट्ठा थाविसिन ने ट्वीट किया, “शांति हमारी साझा जिम्मेदारी है।”
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि समझौता सकारात्मक है, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। दोनों देशों में राष्ट्रवादी भावनाएं उफान पर हैं, और कोई छोटी सी घटना युद्धविराम तोड़ सकती है। Cambodia ने थाई हमलों की शिकायत की है, जबकि Thailand सीमा अतिक्रमण से चिंतित है। इसके अलावा, आर्थिक असमानता – थाईलैंड की GDP कंबोडिया से दोगुनी है – ने विश्वास की कमी पैदा की।
समाधान के लिए, दोनों पक्षों को ICJ के फैसले को स्वीकार करना होगा और संयुक्त विकास परियोजनाएं शुरू करनी होंगी, जैसे सीमा पर आर्थिक क्षेत्र। ASEAN को मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए। यदि यह समझौता टिका, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में अन्य विवादों, जैसे दक्षिण चीन सागर, के लिए मॉडल बनेगा।
निष्कर्ष: शांति की नई शुरुआत
Thailand-Cambodia युद्धविराम समझौता संघर्ष से शांति की ओर एक बड़ा कदम है। यह न केवल सैनिकों और नागरिकों की जान बचाएगा, बल्कि क्षेत्रीय एकता को मजबूत करेगा। दोनों सरकारों से अपेक्षा है कि वे वादों पर अमल करें। दुनिया भर के शांति प्रेमी इसकी सफलता की कामना करते हैं। अधिक अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहें।
Sources: रॉयटर्स