Supreme Court's big order on West Bengal SIRSupreme Court's big order on West Bengal SIR

21 फरवरी 2026, पश्चिम बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को एक असाधारण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) के बीच गहरे “ट्रस्ट डेफिसिट” (विश्वास की कमी) और “दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप” पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने इसे “असाधारण परिस्थितियां” बताते हुए असाधारण आदेश पारित किया, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया गया कि वे सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारियों (जिला न्यायाधीश या अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रैंक के) को तैनात करें। ये अधिकारी SIR प्रक्रिया में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” (तार्किक विसंगति) श्रेणी में शामिल लाखों दावों और आपत्तियों का निपटारा करेंगे।

विवाद की पृष्ठभूमि: SIR क्या है और क्यों विवाद?

SIR मतदाता सूची को पूरी तरह से नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया है, जिसमें डुप्लिकेट, मृतक, गैर-निवासी और अयोग्य नामों को हटाया जाता है, जबकि योग्य मतदाताओं को शामिल किया जाता है। पश्चिम बंगाल में यह अभियान 2026 विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुआ था। दिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट रोल में 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए और 1.36 करोड़ से ज्यादा “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” में फ्लैग किए गए। TMC सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया मनमानी है, जिसमें छोटी स्पेलिंग गलतियां (जैसे ‘Dutta’ vs ‘Datta’) के आधार पर योग्य मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है, जिससे अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग प्रभावित हो रहा है। TMC ने दावा किया कि ECI की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और Aadhaar, डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसी दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है।

दूसरी ओर, ECI ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह पर्याप्त ग्रेड-A अधिकारियों की डेपुटेशन नहीं कर रही, माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को बाधित किया जा रहा है और SIR अधिकारियों को धमकियां मिल रही हैं। ईसी ने कहा कि राज्य में ही ऐसा गतिरोध है, अन्य 12 राज्यों में SIR सुचारू रूप से चल रहा है। फरवरी 2026 की शुरुआत में TMC सांसदों और ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं, जिसमें SIR को रोकने या मौजूदा सूची पर चुनाव कराने की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मुख्य बिंदु

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार (संवैधानिक संस्था) और ECI (संवैधानिक निकाय) के बीच ट्रस्ट गैप ने प्रक्रिया को स्टेलमेट में डाल दिया है। CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरोप-प्रत्यारोप का खेल चल रहा है। समय कम बचा है, चुनाव नजदीक हैं।” कोर्ट ने Article 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए निर्देश दिया:

  • कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सेवारत और पूर्व जजों (अतिरिक्त जिला जज या जिला जज स्तर के, त्रुटिहीन ईमानदारी वाले) को प्रत्येक जिले में तैनात करें।
  • ये न्यायिक अधिकारी लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी मामलों में दस्तावेजों की जांच, दावों/आपत्तियों का निपटारा करेंगे।
  • प्रत्येक अधिकारी को राज्य द्वारा पहले से डेप्यूट माइक्रो-ऑब्जर्वर्स और अधिकारी सहायता देंगे।
  • 21 फरवरी 2026 को चीफ इलेक्शन ऑफिसर, चीफ सेक्रेटरी, DGP, एडवोकेट जनरल और ASG के साथ हाईकोर्ट CJ के साथ बैठक कर मॉडालिटी तय की जाए।
  • ECI को 28 फरवरी तक 95% क्लियर मामलों की फाइनल लिस्ट प्रकाशित करने की अनुमति, बाकी पूरक रोल में शामिल होंगे।
  • दस्तावेज जांच की डेडलाइन (पहले 14 फरवरी) बढ़ाई गई।

कोर्ट ने राज्य को चेतावनी दी कि SIR पूरा न होने के परिणाम भुगतने पड़ेंगे। TMC ने फैसले को “ECI पर नो-ट्रस्ट वोट” बताया और इसे “बंगाल की Maa, Mati, Manush की जीत” कहा, जबकि ECI ने इसे प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने वाला कदम माना।

CAA पेंडिंग एप्लीकेशन्स और नई कमिटी

फैसले में CAA (Citizenship Amendment Act) से जुड़े पेंडिंग आवेदनों के लिए नई कमिटी गठित करने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन SIR के संदर्भ में कोर्ट ने मतदाता सूची में शामिल होने के दावों पर फोकस किया है। कुछ याचिकाओं में CAA-NRC जैसे मुद्दों को जोड़ा गया था, जहां TMC ने दावा किया कि SIR CAA का बैकडोर तरीका है। हालांकि, कोर्ट ने मुख्य रूप से प्रक्रियागत निष्पक्षता पर जोर दिया, न कि CAA पर अलग कमिटी का गठन। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक हस्तक्षेप से CAA से जुड़े विवादित मामलों में भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि दस्तावेज जांच में नागरिकता प्रमाण शामिल हो सकते हैं।

राजनीतिक और चुनावी प्रभाव

2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले यह फैसला महत्वपूर्ण है। TMC इसे अपनी जीत मान रही है, जबकि BJP ने कहा कि SIR से “घुसपैठियों” को बाहर किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायिक निगरानी से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन देरी से चुनावी तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।

यह फैसला भारतीय लोकतंत्र में ECI और राज्य सरकारों के बीच संतुलन का उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में कोई बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Sources: द हिंन्दू

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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