19 दिसंबर 2025, Sharif Osman Hadi – बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक, छात्र नेता और इंकिलाब मंच के संयोजक Sharif Osman Hadi का सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। 32 वर्षीय हादी पर 12 दिसंबर को ढाका में मस्जिद से निकलते समय नकाबपोश हमलावरों ने गोली मारकर हत्या की कोशिश की थी। गंभीर रूप से घायल हादी को पहले ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर एवरकेयर अस्पताल और अंत में 15 दिसंबर को एयर एम्बुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया। सिंगापुर जनरल अस्पताल के न्यूरोसर्जिकल इंटेंसिव केयर यूनिट में छह दिनों तक जीवन रक्षक प्रणाली पर रहने के बाद 18 दिसंबर को उनका निधन हो गया। इस घटना ने बांग्लादेश को शोक और गुस्से की लहर में डुबो दिया है, जहां ढाका सहित कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। मीडिया हाउसों पर आगजनी, पुलिस से झड़पें और भारत विरोधी नारे पूरे देश में गूंज रहे हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने शनिवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
Sharif Osman Hadi कौन थे? एक रैडिकल और विवादास्पद नेता का उदय
Sharif Osman Hadi का जन्म 1993 के आसपास हुआ था और वे मात्र 32 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे बन चुके थे। वे इंकिलाब मंच (Inqilab Mancha) के संयोजक और प्रवक्ता थे, जो 2024 के जुलाई विद्रोह (July Uprising) का एक कट्टरपंथी धड़ा था। यह आंदोलन छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ था, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की 15 साल की तानाशाही को उखाड़ फेंका। हसीना अगस्त 2024 में भारत भाग गईं और तब से अंतरिम सरकार नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही है।
Sharif Osman Hadi जुलाई विद्रोह के फ्रंटलाइन लड़ाकों में से एक थे। वे खुले तौर पर भारत विरोधी और शेख हसीना विरोधी थे। उनके भाषणों में अक्सर “भारतीय वर्चस्व” के खिलाफ नारे लगते थे। वे “ग्रेटर बांग्लादेश” के नक्शे सर्कुलेट करने के लिए भी चर्चित थे, जिसमें भारत के कुछ हिस्से शामिल दिखाए जाते थे। चुनावी उम्मीदवार के रूप में वे ढाका-8 सीट से स्वतंत्र रूप से लड़ने वाले थे। फरवरी 2026 के संसदीय चुनावों की तैयारी में वे कैंपेन कर रहे थे, जब उन पर हमला हुआ। हादी को रैडिकल इस्लामिस्ट और कट्टरपंथी माना जाता था, लेकिन उनके समर्थक उन्हें “जुलाई क्रांति का शहीद” और “लोकतंत्र का योद्धा” कहते हैं। उनके निधन की खबर फैलते ही इंकिलाब मंच ने फेसबुक पर पोस्ट किया: “भारतीय वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष में अल्लाह ने महान क्रांतिकारी उस्मान हादी को शहीद के रूप में स्वीकार कर लिया।”
हमला और निधन: साजिश की आशंकाएं
12 दिसंबर को ढाका के पल्टन इलाके में कुलवर्ट रोड पर बैटरी चालित रिक्शा में जा रहे हादी पर नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मारी। हमलावर मौके से फरार हो गए। हादी को तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इमरजेंसी ब्रेन सर्जरी हुई। स्थिति बिगड़ने पर एवरकेयर अस्पताल शिफ्ट किया गया। अंतरिम सरकार ने उन्हें सिंगापुर भेजा, लेकिन सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा: “डॉक्टरों के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद Sharif Osman Hadi अपनी चोटों से उबर नहीं सके।” उनके शव को वापस ढाका लाया जा रहा है, जहां शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद विशेष दुआएं और शनिवार को राष्ट्रीय शोक मनाया जाएगा।
समर्थकों का आरोप है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी। कुछ नेताओं ने भारत पर हमलावरों को शरण देने का आरोप लगाया है। नेशनल सिटीजन पार्टी के नेता मोहम्मद सरजीस आलम ने सोशल मीडिया पर लिखा: “भारत हादी भाई के हत्यारों को लौटाए बिना भारतीय हाई कमीशन बंद रहेगा।” हालांकि भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
देशभर में हिंसा और आगजनी: शोक से गुस्सा
Sharif Osman Hadi के निधन की खबर फैलते ही ढाका में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। शाहबाग चौराहे और ढाका यूनिवर्सिटी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और न्याय की मांग की। लेकिन शोक जल्द ही हिंसा में बदल गया। प्रोथोम आलो और डेली स्टार – देश के दो प्रमुख अखबारों – के दफ्तरों में आग लगा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने इन मीडिया हाउसों पर “भारत समर्थक” होने का आरोप लगाया। डेली स्टार की रिपोर्टर जाइमा इस्लाम ने बताया कि वे आग के बीच फंस गईं और चिल्लाकर कहा, “आप मुझे मार रहे हैं!” फायर ब्रिगेड ने पत्रकारों को बचाया।
इसके अलावा छायानौट (बंगाली संस्कृति का केंद्र) पर हमला हुआ, अवामी लीग के दफ्तर जलाई गईं और शेख मुजीबुर रहमान के धानमोंडी स्थित पैतृक घर को फिर से तोड़ा गया। राजशाही में भारतीय सहायक हाई कमीशन पर हमला करने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस ने रोक लिया। चटगांव सहित अन्य शहरों में भी हिंसा की खबरें हैं। पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस को तैनात किया गया है।
अंतरिम सरकार की प्रतिक्रिया: शोक और अपील
मुहम्मद यूनुस ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा: “Sharif Osman Hadi का निधन राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। लोकतंत्र की राह को डर, आतंक या खून से नहीं रोका जा सकता।” उन्होंने हत्यारों को पकड़ने का वादा किया और शांति की अपील की। शनिवार को राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी धार्मिक स्थलों पर विशेष प्रार्थनाएं होंगी। बीएनपी नेता तारिक रहमान ने भी शोक व्यक्त किया और कहा कि हादी ने जुलाई लड़ाकों के अधिकारों की रक्षा की।
राजनीतिक प्रभाव: चुनावों पर संकट
फरवरी 2026 के चुनाव नजदीक हैं और Sharif Osman Hadi की मौत ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। इंकिलाब मंच जैसे रैडिकल ग्रुप मजबूत हो रहे हैं, जबकि भारत-बांग्लादेश संबंधों पर तनाव बढ़ गया है। हसीना की अनुपस्थिति में अवामी लीग कमजोर है, लेकिन रैडिकल ताकतें उभर रही हैं। यूनुस सरकार पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव है।
निष्कर्ष: शोक से आगे का रास्ता
Sharif Osman Hadi का निधन बांग्लादेश के लिए एक बड़ा झटका है। वे एक विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली नेता थे, जिन्होंने युवाओं को प्रेरित किया। लेकिन उनकी मौत ने शोक को हिंसा में बदल दिया, जो देश की स्थिरता के लिए खतरा है। अंतरिम सरकार को जांच तेज करनी होगी और शांति बहाल करनी होगी, वरना चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बांग्लादेश फिर से एक मोड़ पर खड़ा है – शोक या अराजकता, समय बताएगा।