10 दिसंबर 2025: बिहार की राजनीति में छात्र संगठनों का प्रभाव हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा है, और अब दरभंगा के प्रमुख छात्र नेता दिलीप कुमार ने विधान परिषद (MLC) चुनाव लड़ने का ऐलान कर एक नई लहर पैदा कर दी है। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 2026 में होने वाले इस चुनाव के लिए कुमार ने अपने समर्थकों और युवा स्नातकों से वोटर बनने की अपील की है। खास बात यह है कि आज, 10 दिसंबर, वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने की अंतिम तिथि है, जिससे युवाओं में उत्साह का संचार हो गया है। यह घोषणा न केवल स्थानीय छात्र आंदोलनों को नई दिशा देगी, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा और युवा सशक्तिकरण की बहस को भी तेज करेगी।
दिलीप कुमार, जो लंबे समय से दरभंगा के छात्र संगठनों में सक्रिय हैं, ने अपनी राजनीतिक यात्रा को औपचारिक रूप देने का फैसला किया है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के पूर्व छात्र नेता के रूप में वे छात्रों के अधिकारों, परीक्षा सुधारों और रोजगार के मुद्दों पर आंदोलन चला चुके हैं। 2018 में विश्वविद्यालय में अनियमितताओं के खिलाफ उनके नेतृत्व में चले आंदोलन ने उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। कुमार ने कहा, “मैं छात्रों की आवाज को विधान परिषद तक पहुंचाना चाहता हूं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी है। हम शिक्षा, रोजगार और बेरोजगारी के खिलाफ लड़ेंगे।” उनकी यह घोषणा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां #DilipForMLC हैशटैग ट्रेंड कर रहा है।
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र एक महत्वपूर्ण सीट है, जो दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगुसराय जिलों को कवर करता है। यहां करीब 4 लाख स्नातक वोटर हैं, लेकिन वोटर लिस्ट में केवल 2.5 लाख नाम दर्ज हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 2026 के अक्टूबर-नवंबर में होने वाले इस चुनाव के लिए वोटर बनने की पात्रता 2 नवंबर 2022 से पहले स्नातक होने की है। कुमार ने विशेष अपील की है कि सरकारी नौकरी करने वाले स्नातक, जो इन जिलों में रहते हैं, जल्द से जल्द नाम दर्ज कराएं। वोटर बनने के लिए आवश्यक दस्तावेजों में ग्रेजुएशन मार्कशीट, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर शामिल हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, “अगर हम वोट नहीं देंगे, तो हमारी आवाज दब जाएगी। आज अंतिम दिन है, देर न करें।”
यह ऐलान छात्र राजनीति को नई ऊर्जा दे रहा है। पूर्व MLC और वरिष्ठ नेता रामविलास पासवान के पुत्र तेजस्वी पासवान ने ट्वीट कर कुमार को शुभकामनाएं दीं, जबकि स्थानीय BJP नेता ने इसे ‘युवा उभार’ बताया। हालांकि, कुछ आलोचक इसे छात्र संगठनों के राजनीतिकरण का प्रयास बता रहे हैं। कुमार की पार्टी संबद्धता स्पष्ट नहीं है, लेकिन वे स्वतंत्र छवि के धनी माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुमार वोटर टर्नआउट बढ़ा पाए, तो यह सीट छात्र-केंद्रित मुद्दों का केंद्र बन सकती है।
बिहार में स्नातक MLC चुनाव हमेशा से ही युवा मतदाताओं की परीक्षा रहे हैं। पिछले चुनाव में वोटिंग प्रतिशत मात्र 45% था, जो चिंता का विषय है। कुमार का कदम इस कमी को पूरा करने का प्रयास लगता है। आने वाले दिनों में उनकी मुहिम और तेज होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह घोषणा बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रही है, जहां छात्रों की आवाज विधायी सदन तक पहुंचने को बेताब है। युवा वर्ग को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हों।