7 फरवरी 2026, India-Nepal सीमा सड़क परियोजना में देरी पर सख्ती: बिहार के पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने भारत-नेपाल सीमा से सटे किशनगंज जिले में चल रही महत्वाकांक्षी सीमा सड़क परियोजना में देरी करने वाले संवेदक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। मंत्री के स्पष्ट निर्देश पर लापरवाह ठेकेदार को सभी भावी निविदाओं से वंचित (ब्लैकलिस्ट) कर दिया गया है। यह कार्रवाई सीमांचल क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने की दिशा में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। परियोजना की धीमी गति से नाराज मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
परियोजना का महत्व और विवरण
भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, पोठिया और बहादुरगंज प्रखंडों में सीमा से सटे इलाकों को मजबूत कनेक्टिविटी प्रदान करने की केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना का हिस्सा है। इस परियोजना के तहत लगभग 65 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण और उन्नयन किया जाना है, जिसमें कई पुल, पुलिया और ड्रेनेज सिस्टम शामिल हैं। कुल अनुमानित लागत 450 करोड़ रुपये से अधिक है।
यह सड़क राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत-नेपाल की खुली सीमा पर गश्त और आवागमन को सुगम बनाएगी। साथ ही, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। किशनगंज से नेपाल के प्रमुख शहरों जैसे विराटनगर, काकरभिट्टा और इलाम तक माल ढुलाई आसान होगी। चाय, जूट, अनाज और सब्जियों जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। पर्यटन को भी बल मिलेगा क्योंकि दार्जिलिंग और सिक्किम की यात्रा करने वाले पर्यटक इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे।
परियोजना की शुरुआत 2023 में हुई थी और इसे 2025 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन संवेदक की लापरवाही से कई खंडों में काम रुका हुआ था, जिससे स्थानीय लोग और सुरक्षाबल परेशान थे।
देरी के कारण और मंत्री का निरीक्षण
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, संवेदक ने निर्धारित समयसीमा के बावजूद आवश्यक मशीनरी, मजदूर और सामग्री की व्यवस्था नहीं की। कई जगहों पर काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। बरसात के मौसम में भी कोई तैयारी नहीं की गई, जिससे सड़कें कीचड़ में डूब गईं। ठाकुरगंज के पास एक प्रमुख पुल का निर्माण महीनों से रुका हुआ था।
मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने हाल ही में किशनगंज का दौरा किया और परियोजना स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संवेदक की अनुपस्थिति और काम की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जताई। मंत्री ने कहा, “सीमा क्षेत्र की परियोजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास से जुड़ी हैं। यहां देरी का मतलब जनता के साथ विश्वासघात है। लापरवाह संवेदकों को बख्शा नहीं जाएगा।”
मंत्री के निर्देश पर विभागीय सचिव ने तत्काल जांच कराई। जांच रिपोर्ट में संवेदक की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। इसके बाद ज्ञापांक संख्या RCD/KISH/2025-26/89 दिनांक 5 फरवरी 2026 के माध्यम से संवेदक फर्म को तीन वर्ष के लिए सभी सरकारी निविदाओं से वंचित करने का आदेश जारी किया गया। साथ ही, जुर्माने और बैंक गारंटी जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
कार्रवाई का प्रभाव और अधिकारियों की जिम्मेदारी
यह कार्रवाई बिहार सरकार की उन सभी परियोजनाओं के लिए एक मजबूत संदेश है जहां ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। किशनगंज के डीएम और एसपी ने भी मंत्री के साथ समन्वय में परियोजना की निगरानी बढ़ा दी है। अब नए संवेदक की नियुक्ति के लिए तेजी से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि काम में देरी न हो।
स्थानीय विधायकों और सांसदों ने मंत्री की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। ठाकुरगंज के विधायक ने कहा, “लंबे समय से लोग इस सड़क की राह देख रहे थे। मंत्री जी की सख्ती से अब काम तेजी से पूरा होगा।” सीमा पर तैनात बीएसएफ के अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि खराब सड़कें उनकी गश्त में बाधा बन रही थीं।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
सरकार ने परियोजना को समयबद्ध पूरा करने के लिए नई रणनीति बनाई है। अब हर महीने प्रगति की समीक्षा होगी और जीआईएस-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। साथ ही, स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सीमा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, बाढ़ का खतरा और नेपाल पक्ष से समन्वय जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से इनका समाधान किया जा रहा है। यह परियोजना अमृत भारत स्टेशन योजना और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी योजनाओं से भी जुड़ी हुई है, जिससे पूरे सीमांचल का चेहरा बदलेगा।
डॉ. दिलीप जायसवाल की यह सख्त कार्रवाई साबित करती है कि बिहार सरकार विकास परियोजनाओं को लेकर गंभीर है। लापरवाह संवेदक को ब्लैकलिस्ट करना न केवल दंड है, बल्कि अन्य ठेकेदारों के लिए चेतावनी भी। किशनगंज के लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि भारत-नेपाल सीमा सड़क जल्द पूरी होगी और क्षेत्र को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाएगी, बल्कि दोनों देशों के बीच मैत्री और व्यापार को भी मजबूत करेगी।
Sources: दैनिक भास्कर