16 फरवरी 2026, Bihar में भूमाफियाओं पर सख्ती: बिहार में भूमाफियाओं के खिलाफ नीतीश सरकार की मुहिम अब और तेज हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि हर अंचल में कम से कम चार भूमाफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो वह खुद मौके पर जाकर कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। यह घोषणा भूमि सुधार और सरकारी जमीनों की रक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान को नई धार देने वाली है।
विधानसभा में विजय सिन्हा का सख्त तेवर
सोमवार को बिहार विधानसभा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विजय कुमार सिन्हा ने सदन को संबोधित करते हुए भूमाफियाओं पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “हर अंचल में कम से कम चार जमीन माफिया की पहचान करके उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। अगर जरूरत पड़ी तो मैं खुद अंचल में जाऊंगा और कार्रवाई कराऊंगा।” मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमाफियाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
विजय सिन्हा ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों, फर्जी दस्तावेज बनाने वालों और दलालों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग ने पहले ही कई जिलों में अभियान चलाकर सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन मुक्त कराई है और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।
भूमाफियाओं के खिलाफ चल रहा अभियान
बिहार में भूमाफिया लंबे समय से सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर कब्जा जमाए हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में गैरमजरुआ, नदी-तालाब और रेलवे की जमीनों पर अवैध निर्माण आम बात हो गई थी। नीतीश सरकार के पिछले कार्यकालों में भी कई बार अभियान चलाए गए, लेकिन इस बार NDA सरकार ने इसे प्राथमिकता का मुद्दा बना लिया है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने नवंबर 2025 में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार संभालते ही भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। जनवरी 2026 में उन्होंने ऐलान किया था कि मार्च तक भूमाफियाओं पर बड़े स्तर पर कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके तहत फर्जी जमाबंदी रद्द करने, जाली दस्तावेजों पर सीधे FIR दर्ज करने और विशेष भूमि सर्वे को तेज करने के निर्देश दिए गए थे।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में राज्य भर में हजारों एकड़ सरकारी जमीन मुक्त कराई जा चुकी है। कई जिलों में अंचलाधिकारियों (सीओ) और राजस्व कर्मियों की जवाबदेही तय की गई है। अगर कोई अधिकारी लापरवाही बरतता है या भूमाफियाओं से मिलीभगत करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी दस्तावेज और जाली जमाबंदी पर सख्ती
भूमाफियाओं की सबसे बड़ी ताकत फर्जी दस्तावेज और जाली जमाबंदी रही है। विभाग ने 1 फरवरी 2026 से नया नियम लागू किया है कि जाली दस्तावेज पेश करने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से FIR दर्ज होगी। दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, अवैध या संदिग्ध जमाबंदी को 45 दिनों के अंदर रद्द करने का निर्देश दिया गया है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और एडीएम को पत्र लिखकर कहा है कि सरकारी जमीन से जुड़ी किसी भी गलत या फर्जी जमाबंदी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर अंचलाधिकारी FIR दर्ज नहीं करते हैं, तो वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
जनता के लिए राहत, उद्योगों के लिए जमीन
इस अभियान का एक बड़ा फायदा आम जनता को मिल रहा है। भूमि विवादों के निपटारे में तेजी आई है। ‘परिमार्जन प्लस’ पोर्टल को मजबूत किया गया है, जिससे दाखिल-खारिज और अन्य प्रक्रियाएं पारदर्शी हो रही हैं। साथ ही, औद्योगिक विकास के लिए सभी जिलों में लैंड बैंक बनाने की योजना है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि 20 जिलों में 13 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे नए औद्योगिक पार्क बनेंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
चुनौतियां और आगे की राह
भले ही सरकार सख्ती दिखा रही हो, लेकिन कुछ इलाकों में अभी भी भूम भूमाफिया सक्रिय हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और सीमावर्ती जिलों में जमीन विवाद ज्यादा हैं। विपक्षी दल इसे केवल दिखावा बता रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष का दावा है कि यह अभियान ऐतिहासिक है।
विजय कुमार सिन्हा ने सदन में कहा, “मुझे किसी का डर नहीं है। मैं कफन बांधकर निकला हूं। गलत करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” उनका यह बयान विभागीय अधिकारियों और आम जनता में नई ऊर्जा भर रहा है।
बिहार में भूमाफियाओं पर सख्ती का यह दौर राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सरकारी जमीन मुक्त होने से जहां एक ओर गरीबों और जरूरतमंदों को लाभ मिलेगा, वहीं औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक अभियान का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाएगा। अब देखना यह है कि यह ऐलान धरातल पर कितना असर दिखाता है। जनता को उम्मीद है कि सदियों पुराने भूमि विवादों से मुक्ति मिलेगी और बिहार वाकई सुशासन का मॉडल बनेगा।
Sources: हिंदुस्तान