7 जनवरी 2026, Sensex और NIFTY में तीसरे दिन की गिरावट: को भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 102 अंक या 0.12% गिरकर 84,961.14 पर बंद हुआ, जबकि NSE NIFTY 50 38 अंक या 0.14% की गिरावट के साथ 26,140.75 पर पहुंचा। यह गिरावट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक चिंताओं, जैसे अमेरिका-वेनेजुएला संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध, तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर उच्च टैरिफ लगाने की धमकियों से प्रभावित रही। बाजार में हेवीवेट शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा, जिसने समग्र सेंटीमेंट को प्रभावित किया। तीन दिनों में Sensex 1,144 अंक से अधिक गिर चुका है, जबकि निफ्टी में लगभग 1% की कमी आई है। यह रिपोर्ट बाजार के प्रदर्शन, कारणों, टॉप गेनर्स और लूजर्स, सेक्टर-वाइज विश्लेषण और भविष्य के आउटलुक पर विस्तार से चर्चा करती है।
पृष्ठभूमि: हाल की गिरावट का संदर्भ
भारतीय शेयर बाजार 2025 के अंत से ही उतार-चढ़ाव का शिकार रहा है। जनवरी 2026 की शुरुआत में, 2 जनवरी को Sensex 85,762.01 पर बंद हुआ था, लेकिन उसके बाद से निरंतर गिरावट देखी गई। 5 जनवरी को बाजार में मामूली गिरावट आई, 6 जनवरी को 322 अंक की गिरावट दर्ज हुई, और अब 7 जनवरी को यह सिलसिला जारी रहा। वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में बिकवाली, जैसे हांगकांग का हैंग सेंग 1.2% और जापान का निक्केई 1% नीचे, ने भारतीय बाजार पर असर डाला। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) की बिकवाली भी एक प्रमुख कारक रही, जिसने बाजार को दबाव में रखा। 2025 में FII ने भारतीय बाजार से बड़ी निकासी की, और 2026 में यह ट्रेंड जारी रहा। ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने भारत जैसे देशों पर टैरिफ बढ़ाने की धमकियां दीं, खासकर यदि भारत रूसी तेल खरीदना जारी रखे। यह भू-राजनीतिक तनाव वेनेजुएला संकट से और बढ़ा, जहां अमेरिकी सेना की कार्रवाई ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर किया।
वर्तमान विकास: बाजार का प्रदर्शन
दिन की शुरुआत में बाजार सपाट रहा, लेकिन दोपहर बाद बिकवाली बढ़ी। Sensex दिन के निचले स्तर 84,617.49 तक गिरा, लेकिन अंत में थोड़ा रिकवर होकर 84,961.14 पर बंद हुआ। NIFTY भी 26,100 के नीचे गया, लेकिन 26,140.75 पर सेटल हुआ। वॉल्यूम सामान्य से अधिक रहा, जो निवेशकों की चिंता दर्शाता है। गिफ्ट NIFTY फ्यूचर्स में भी गिरावट देखी गई, जो अगले दिन की कमजोरी का संकेत देता है। बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट रही, लेकिन आईटी और फार्मा सेक्टरों में कुछ मजबूती दिखी। कुल मिलाकर, बाजार रेंज-बाउंड रहा, लेकिन नेगेटिव बायस के साथ।
गिरावट के प्रमुख कारण
- भू-राजनीतिक चिंताएं: अमेरिका-वेनेजुएला संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया। ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल आयात पर रोक लगाई, जिससे ऊर्जा कीमतें बढ़ीं।
- टैरिफ बढ़ोतरी की आशंकाएं: ट्रंप ने भारत को उच्च टैरिफ की चेतावनी दी, यदि भारत रूसी तेल खरीदना जारी रखे। यह भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
- FII बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की, जिससे बाजार में तरलता घटी।
- तकनीकी कारक: बाजार में कंसोलिडेशन और वोलेटिलिटी रिस्क बढ़ा, जो प्रॉफिट बुकिंग को बढ़ावा दे रहा है।
- वैश्विक संकेत: एशियाई और यूरोपीय बाजारों में गिरावट ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया।
टॉप गेनर्स और लूजर्स
टॉप गेनर्स में टाटा स्टील और टाइटन शामिल रहे। टाइटन कंपनी 2-3% ऊपर रही, जबकि टाटा स्टील में भी मजबूती दिखी। अन्य गेनर्स: एचसीएल टेक, इंफोसिस, टाटा एल्क्सी (9.31% ऊपर), सोनाटा सॉफ्टवेयर (5.65%)। लूजर्स में ऑटो स्टॉक्स प्रमुख रहे, जैसे मारुति सुजुकी (3% नीचे), टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (2%), सिप्ला (4.40% नीचे), एशियन पेंट्स। अन्य लूजर्स: सन टीवी नेटवर्क (3.48%), महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल (3.46%)।
सेक्टर-वाइज विश्लेषण
आईटी और फार्मा सेक्टरों में मजबूती रही, जहां मिडकैप स्टॉक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखी गई, जबकि बैंकिंग, रियल एस्टेट और रेट-सेंसिटिव सेक्टर दबाव में रहे। ऑटो सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा, टैरिफ चिंताओं से। मेटल सेक्टर मिश्रित रहा, लेकिन ओवरऑल कंसोलिडेशन दिखा। NSE पर टॉप सेक्टर: आईटी (+0.5%), फार्मा (+0.3%); बॉटम: ऑटो (-1.2%), ऑयल एंड गैस (-0.8%)।
विशेषज्ञों की राय
दीपन मेहता (टाइटन पर): “टाइटन का प्रदर्शन शानदार है, लेकिन वैल्यूएशन में गलती की गुंजाइश कम है। लॉन्ग-टर्म ग्रोथ 15% के आसपास रह सकती है।” डॉ. वीके विजयकुमार: “बाजार में ट्रेंड की कमी है, मेगा स्टॉक्स बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। ट्रंप की कार्रवाइयां वोलेटिलिटी बढ़ा सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ फैसला महत्वपूर्ण होगा।” इनक्रेड इक्विटीज: 2026 में 9 लार्जकैप स्टॉक्स में 38% तक अपसाइड, एफआईआई बिकवाली के बावजूद आशावादी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक डिफेंसिव स्टॉक्स पर फोकस करें और वोलेटिलिटी से बचें।
निष्कर्ष: भविष्य का आउटलुक
बाजार में गिरावट जारी रह सकती है, यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़े। हालांकि, आईटी और फार्मा में अवसर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार रेंज-बाउंड रहेगा, लेकिन ट्रंप की नीतियां और वैश्विक घटनाएं वोलेटिलिटी बढ़ा सकती हैं। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ वाले स्टॉक्स चुनें। 2025-26 में जीडीपी 7.4% ग्रोथ का अनुमान बाजार को सपोर्ट कर सकता है, लेकिन शॉर्ट-टर्म चुनौतियां बनी रहेंगी।
Sources: BSE वेबसाइट,NSE वेबसाइट