19 दिसंबर 2025, Shivani Verma हत्याकांड: बिहार के अररिया जिले में 3 दिसंबर को हुई सनसनीखेज शिक्षिका हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के दौरान दो मुख्य साजिशकर्ता आरोपी राजा आलम और छोटू उर्फ नैय्यर आलम ने गुरुवार को स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले तीन आरोपी- दो शूटर और मुख्य साजिशकर्ता महिला- गिरफ्तार हो चुके थे। अररिया पुलिस ने दावा किया है कि अब सभी मुख्य आरोपी हिरासत में हैं और मामले को पूरी तरह सुलझा लिया गया है। जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यह घटना न केवल महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि गलत पहचान की भयावहता को भी उजागर करती है।
घटना का भयावह चित्रण: एक सुबह जो कभी न लौटी
3 दिसंबर 2025 की वह सुबह अररिया के नरपतगंज थाना क्षेत्र के कन्हैली गांव के लिए काली साबित हुई। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ निवासी 25 वर्षीय बीपीएससी शिक्षिका Shivani Verma अपनी लाल स्कूटी पर कन्हैली मध्य विद्यालय के लिए रवाना हुईं। करीब 9:20 बजे, जब वह कन्हैली शिव मंदिर के पास पहुंचीं, तो दो बाइक सवार संदिग्ध युवकों ने उन पर पीछे से हमला बोल दिया। एक ने स्कूटी रोकी, तो दूसरे ने गोली चला दी। छाती में गोली लगने से गंभीर घायल शिवानी सड़क पर लहूलुहान गिर पड़ीं। ग्रामीणों ने उन्हें तुरंत सदर अस्पताल अररिया ले जाया, लेकिन इलाज के दौरान दोपहर करीब 12 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
Shivani Verma की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी मच गई। नरपतगंज थाने में उनके पिता की शिकायत पर कांड संख्या 437/25 दर्ज किया गया। धारा 103(1)/3(5) बीएनएस और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। शुरुआत में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला। सीसीटीवी फुटेज में दो बाइक सवार युवक दिखे, लेकिन उनकी पहचान मुश्किल थी। शिवानी के परिवार ने इसे स्कूल के आंतरिक विवाद से जोड़ा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सच्चाई चौंकाने वाली निकली। यह हत्या ‘टारगेट मिस’ का मामला था- यानी गलत व्यक्ति को निशाना बनाया गया।
गलत पहचान का राज: सुपारी किलिंग का दर्दनाक मोड़
जांच में खुलासा हुआ कि Shivani Verma हत्याकांड की साजिश किसी अन्य महिला के खिलाफ रची गई थी। मुख्य साजिशकर्ता हुस्न आरा (उर्फ हुसन) को अपने पति पर अवैध संबंध का शक था। वह किसी अन्य महिला शिक्षिका को अपना ‘प्रतिद्वंद्वी’ मानती थीं, जिसे मारने के लिए उन्होंने 3 लाख रुपये की सुपारी दी। लेकिन निशाना बनी महिला उस दिन छुट्टी पर थी। हमलावरों ने शिवानी की लाल स्कूटी और रूट देखकर उन्हें गलत समझ लिया। अररिया एसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह गलतफहमी का परिणाम था। असली टारगेट छुट्टी पर होने से शूटरों ने शिवानी को निशाना बनाया।”
यह खुलासा 5 दिसंबर को हुआ, जब पुलिस ने दो शूटरों- मोहम्मद मारूफ और मोहम्मद सोहैल- को गिरफ्तार किया। मारूफ की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल यामाहा एफजेड बाइक और देसी कट्टा बरामद हो गया। अगले ही दिन हुस्न आरा को भी पकड़ा गया। उन्होंने पूछताछ में कबूल किया, “मैंने सुपारी दी थी, लेकिन शूटरों ने गलत लड़की को मार दिया।” यह सुनकर पुलिस और परिवार दोनों स्तब्ध रह गए। हुस्न आरा फारबिसगंज के रामपुर निवासी हैं, और साजिश में उनकी बहन के बेटे राजा और छोटू भी शमिल थे। राजा रामपुर (फारबिसगंज) का रहने वाला है, जबकि छोटू शेख टोला दुमरिया (नरपतगंज) से। दोनों ने हुस्न आरा के इशारे पर शूटरों को हायर किया था।
आरोपी प्रोफाइल: साजिश के सूत्रधार कौन?
- हुस्न आरा: मुख्य मास्टरमाइंड। पति के कथित अफेयर से आहत होकर सुपारी दी। 6 दिसंबर को गिरफ्तार, जेल भेजी गई।
- मोहम्मद मारूफ और मोहम्मद सोहैल: शूटर। फारबिसगंज के निवासी। 5 दिसंबर को गिरफ्तार, हथियार बरामद।
- राजा आलम: साजिशकर्ता, हुस्न आरा का भतीजा। फारबिसगंज से।
- छोटू उर्फ नैय्यर आलम: सह-साजिशकर्ता, हुस्न आरा का दूसरा भतीजा। नरपतगंज से।
ये सभी आरोपी स्थानीय हैं, जो इस घटना को और भी दुखद बनाता है। पुलिस ने बताया कि साजिश की रकम 3 लाख थी, जिसमें से शूटरों को 1.5 लाख मिलने थे।
जांच की समयरेखा: एसआईटी की भूमिका निर्णायक
घटना के तुरंत बाद अररिया पुलिस ने फारबिसगंज अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। टीम ने सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और गवाहों के बयानों से सुराग जुटाए। 4 दिसंबर तक शूटरों की पहचान हो गई। 5 दिसंबर को गिरफ्तारियां हुईं, और 6 दिसंबर को हुस्न आरा पकड़ी गई। लेकिन राजा और छोटू फरार हो गए। पुलिस ने उनके घरों पर छापेमारी की, रिश्तेदारों से पूछताछ की। एसआईटी ने 24 घंटे के अंदर लगातार दबाव बनाया। आखिरकार 18 दिसंबर को दोनों ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सरेंडर कर दिया। सीजेएम ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर जेल भेज दिया।
अररिया एसपी ने कहा, “यह हमारी सुदृढ़ जांच और सतत दबिश का नतीजा है। सभी आरोपी अब हिरासत में हैं। चार्जशीट जल्द दाखिल होगी।” एसआईटी ने मामले को ‘सुपारी किलिंग’ करार दिया, जो गलत पहचान से ट्रेजेडी बन गया।
परिवार और समाज की प्रतिक्रिया: न्याय की उम्मीद
Shivani Verma के परिवार पर यह घटना कहर बनकर टूटी। बाराबंकी से उनके पिता और भाई अररिया पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस पर शुरुआती लापरवाही का आरोप लगाया। शिवानी के पिता ने कहा, “मेरी बेटी निर्दोष थी। वह सिर्फ पढ़ाने जा रही थी। गलतफहमी में उसकी जान चली गई।” परिवार ने मांग की कि सभी आरोपी को कड़ी सजा हो। स्कूल प्रशासन ने भी शोक व्यक्त किया और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मांग की।
समुदाय में यह हत्याकांड डर का माहौल पैदा कर गया। नरपतगंज के ग्रामीणों ने बताया, “शिक्षिकाएं अब डरकर स्कूल जाती हैं। बाइक सवारों से सतर्क रहना पड़ता है।” महिला संगठनों ने प्रदर्शन किया, महिलाओं की सुरक्षा और सुपारी किलिंग पर सख्त कानून की मांग की। यह घटना बिहार-यूपी बॉर्डर पर अपराध की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जहां पारिवारिक झगड़े हिंसा में बदल जाते हैं।
व्यापक प्रभाव: शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरे की घंटी
यह मामला न केवल एक हत्या है, बल्कि समाज की विकृत मानसिकता का आईना है। गलत पहचान से निर्दोष की जान जाना दुखद है। बिहार में बीपीएससी शिक्षकों की संख्या लाखों में है, लेकिन उनकी सुरक्षा चिंताजनक है। हाल के वर्षों में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जहां शिक्षक निशाना बने। सरकार को स्कूल रूट पर सीसीटीवी, पेट्रोलिंग और हेल्पलाइन मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही, सुपारी किलिंग पर केंद्रीय कानून सख्त हो।
अररिया पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह सवाल उठाता है कि क्या ग्रामीण इलाकों में न्याय समय पर मिल पाता है? Shivani Verma की मौत ने एक परिवार को बर्बाद कर दिया, लेकिन आरोपी सरेंडर से न्याय की किरण दिखी है।
निष्कर्ष: न्याय का सफर जारी
Shivani Verma हत्याकांड अब सुलझ चुका लगता है, लेकिन घाव गहरे हैं। पांचों आरोपी- हुस्न आरा, मारूफ, सोहैल, राजा और छोटू- अब न्याय की कटघरे में हैं। अदालत में ट्रायल से सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी। यह घटना समाज को चेतावनी है- संदेह हिंसा का रूप न ले। Shivani Verma की याद में उनके स्कूल में शोक सभा हुई, जहां सहकर्मियों ने कहा, “वह एक समर्पित शिक्षिका थीं। उनकी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी।”