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6 जनवरी 2026, Katihar: Shakil Ahmad का भाजपा पर हमला: बिहार के Katihar जिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shakil Ahmad ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ग्रामीण रोजगार को नष्ट करने की कोशिश कर रही है, जो गरीबों और किसानों के लिए जीवन रेखा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था ठंड और बेरोजगारी की मार झेल रही है। इस रिपोर्ट में इस घटना की पृष्ठभूमि, शकील अहमद के बयान के विवरण, भाजपा की प्रतिक्रिया, मनरेगा की स्थिति और इसके राजनीतिक निहितार्थ पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह रिपोर्ट आम नागरिकों को जागरूक बनाने और राजनीतिक बहस को समझने में मदद करेगी।

घटना की पृष्ठभूमि

Shakil Ahmad, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के प्रमुख चेहरे हैं, ने कटिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह आरोप लगाया। कटिहार, जो सीमांचल क्षेत्र में आता है, यहां ग्रामीण बेरोजगारी और गरीबी की समस्या गंभीर है। मनरेगा, 2005 में UPA सरकार द्वारा शुरू की गई योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों का गारंटीड रोजगार प्रदान करती है। बिहार में यह योजना लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों के लिए जो महामारी के बाद लौटे हैं। हाल के वर्षों में, केंद्र सरकार पर मनरेगा के फंड में कटौती और योजना को कमजोर करने के आरोप लगते रहे हैं। 2025-26 के बजट में मनरेगा के लिए आवंटन में कमी की आलोचना हो रही है, जिसे विपक्षी दल भाजपा की ‘एंटी-पुअर’ नीति बता रहे हैं। शकील अहमद का यह बयान बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी में देखा जा रहा है, जहां ग्रामीण मुद्दे प्रमुख हैं।

Shakil Ahmad के बयान का विवरण

जनसभा में Shakil Ahmad ने कहा, “भाजपा मनरेगा को खत्म करने की साजिश रच रही है। वे ग्रामीण रोजगार को नष्ट करना चाहते हैं ताकि गरीब और मजदूर शहरों की ओर पलायन करें और कॉरपोरेट्स को फायदा हो।” उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार मनरेगा के फंड को अन्य योजनाओं में डायवर्ट कर रही है और राज्य सरकारें इसे लागू करने में लापरवाही बरत रही हैं। अहमद ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि बिहार में मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारकों की संख्या घट रही है और मजदूरी भुगतान में देरी हो रही है। उन्होंने कांग्रेस की यूपीए सरकार की तुलना की, जब मनरेगा ने करोड़ों को रोजगार दिया। यह बयान कटिहार के ग्रामीण इलाकों में गूंजा, जहां ठंड के मौसम में काम की कमी से लोग परेशान हैं। अहमद ने भाजपा को ‘किसान विरोधी’ बताते हुए कहा कि कृषि कानूनों की तरह मनरेगा भी उनके निशाने पर है। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस बयान का समर्थन किया, मांग की कि मनरेगा को मजबूत किया जाए।

भाजपा की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बहस

भाजपा ने Shakil Ahmad के आरोपों को खारिज करते हुए इसे ‘झूठी राजनीति’ बताया। स्थानीय भाजपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा को और मजबूत कर रही है, और 2025-26 में फंड बढ़ाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में मनरेगा में भ्रष्टाचार था, जबकि अब डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता आई है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “Shakil Ahmad चुनावी हताशा में ऐसे बयान दे रहे हैं। भाजपा ने पीएम किसान और अन्य योजनाओं से ग्रामीणों को लाभ पहुंचाया है।” यह बहस बिहार की राजनीति में कांग्रेस-भाजपा की पुरानी दुश्मनी को दर्शाती है। विपक्षी दल जैसे राजद और लेफ्ट भी मनरेगा पर हमलावर हैं, दावा करते हैं कि योजना का बजट GDP के 0.3% से कम है, जबकि जरूरत 1% की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान 2025 के उपचुनावों और 2026 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है, जहां ग्रामीण वोटर निर्णायक हैं।

मनरेगा की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

मनरेगा बिहार में महत्वपूर्ण है, जहां 70% आबादी ग्रामीण है। 2025 में, राज्य में 2 करोड़ से ज्यादा जॉब कार्ड हैं, लेकिन औसत रोजगार दिन 40 से कम हैं। चुनौतियां जैसे फंड की कमी, मजदूरी में देरी (कभी-कभी महीनों की) और काम की उपलब्धता में कमी हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि आधार लिंकिंग और DBT से सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण संगठनों की रिपोर्ट्स विपरीत हैं। ठंड के मौसम में मनरेगा कार्य रुक जाते हैं, जिससे मजदूरों की परेशानी बढ़ती है। शकील अहमद के आरोप केंद्र की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति पर सवाल उठाते हैं, जो ग्रामीण रोजगार पर जोर देती है लेकिन आलोचकों के अनुसार कॉरपोरेट्स को प्राथमिकता देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मनरेगा को मजबूत करने के लिए बजट बढ़ाना, काम के प्रकार बढ़ाना (जैसे जल संरक्षण) और निगरानी मजबूत करनी होगी।

राजनीतिक निहितार्थ और आगे की दिशा

Shakil Ahmad का यह हमला कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां वे ग्रामीण मुद्दों पर भाजपा को घेर रही है। बिहार में NDA सरकार पर भी दबाव है, क्योंकि मनरेगा राज्य-केंद्र समन्वय पर निर्भर है। यदि आरोप सही साबित हुए, तो ग्रामीण वोटरों में असंतोष बढ़ सकता है। वहीं, भाजपा इसे विपक्ष की ‘नकारात्मक राजनीति’ बताकर पलटवार कर सकती है। आम नागरिकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे मनरेगा के लाभ जानें और अनियमितताओं पर शिकायत करें। ऑनलाइन पोर्टल्स जैसे मनरेगा ऐप से ट्रैकिंग संभव है। निष्कर्ष में, यह घटना बिहार की राजनीति में ग्रामीण विकास की बहस को तेज करेगी। सरकार को मनरेगा को बचाने और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल हो।

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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