Sensex falls marginallySensex falls marginally

15 दिसंबर 2025, Sensex falls marginally: भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को मिश्रित सिग्नल्स के बीच सतर्क शुरुआत की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 54.30 अंक (0.06%) की मामूली गिरावट के साथ 85,213.36 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 इंडेक्स 26,050 के नीचे लुढ़क गया, जो 0.04% की गिरावट दर्शाता है। यह गिरावट ऑटो और बैंकिंग सेक्टरों पर दबाव का परिणाम रही, जहां वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। नवंबर 2025 में व्यापार घाटे के 61% घटकर 6.6 अरब डॉलर रहने की सकारात्मक खबर के बावजूद, बाजार ने वैश्विक बाजारों की कमजोरी को झेला। अमेरिकी फेड रिजर्व की ब्याज दरों पर आगामी फैसले और यूरोपीय बाजारों की नरमी ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया। इस रिपोर्ट में हम बाजार के समग्र प्रदर्शन, सेक्टर-वाइज विश्लेषण, प्रमुख शेयरों की हलचल, वैश्विक प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बाजार का समग्र प्रदर्शन: सतर्कता का दौर दिन की शुरुआत सकारात्मक रही, जब सेंसेक्स 85,400 के ऊपर खुला, लेकिन दोपहर होते-होते लाभ मिट गया। मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्सों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जहां बीएसई मिडकैप 0.12% ऊपर रहा। कुल कारोबार मूल्य 12,500 करोड़ रुपये के आसपास रहा, जो पिछले सत्र से थोड़ा कम है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, 2,150 शेयरों में तेजी आई, जबकि 1,800 में गिरावट दर्ज की गई। एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) ने 1,200 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशक) ने 800 करोड़ की खरीदारी से बाजार को सहारा दिया। यह गिरावट नवंबर के व्यापार घाटे के सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद आई, जहां माल निर्यात में 8% की वृद्धि और आयात में 5% की कमी दर्ज की गई। ईसीबी (यूरोपीय सेंट्रल बैंक) की ब्याज दरों में 25 बीपीएस कटौती की उम्मीद ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया, जिसका असर भारत पर पड़ा। सेंसेक्स का यह स्तर 52-सप्ताह के उच्चतम 86,500 से महज 1,300 अंक नीचे है, जो बाजार की मजबूती दर्शाता है। लेकिन निवेशक फेड की 18 दिसंबर की बैठक का इंतजार कर रहे हैं, जहां 25 बीपीएस कटौती की संभावना 90% है।

सेक्टर-वाइज एनालिसिस: ऑटो और बैंकिंग पर दबाव बाजार की गिरावट का मुख्य कारण ऑटो सेक्टर की कमजोरी रही। एनएसई ऑटो इंडेक्स 1.2% लुढ़क गया, जहां महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) 1.22% नीचे बंद हुआ। कारण: वैश्विक चिप की कमी और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) सब्सिडी पर अनिश्चितता। इसके विपरीत, एफएमसीजी सेक्टर ने 0.8% की तेजी दिखाई, जहां हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) प्रमुख गेनर रहा। बैंकिंग सेक्टर में निफ्टी बैंक 0.5% नीचे रहा, कोटक महिंद्रा बैंक 0.70% गिरा। आरबीआई की हालिया रिपोर्ट में एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) में वृद्धि का जिक्र निवेशकों को चिंतित कर गया। आईटी सेक्टर मिश्रित रहा, जहां टीसीएस 0.3% ऊपर, लेकिन इंफोसिस 0.2% नीचे। मेटल सेक्टर ने 0.6% की तेजी दिखाई, टाटा स्टील के नेतृत्व में। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में गोदावरी पावर का 1,625 करोड़ का बैटरी प्रोजेक्ट निवेश ने सकारात्मक सेंटिमेंट पैदा किया। कुल मिलाकर, डिफेंसिव सेक्टरों (एफएमसीजी, फार्मा) ने बाजार को संभाला, जबकि साइक्लिकल सेक्टरों (ऑटो, बैंक) पर दबाव रहा।

टॉप गेनर्स और लूजर्स: प्रमुख शेयरों की हलचल दिन के टॉप गेनर्स में एचयूएल 0.80% ऊपर (2,279.20 पर बंद) प्रमुख रहा, जहां कंपनी की तिमाही रिपोर्ट में 12% लाभ वृद्धि ने निवेशकों को आकर्षित किया। एशियन पेंट्स 0.74% चढ़ा (2,786 पर), पेंट सेक्टर की मांग बढ़ने से। अन्य गेनर्स: टाटा स्टील (0.65%), विप्रो (0.55%)—जो गूगल क्लाउड के साथ एआई साझेदारी से चमका। लूजर्स की सूची में बजाज फाइनेंस 0.91% नीचे (1,650 पर), जहां कर्ज वितरण में कमी का असर पड़ा। कोटक बैंक 0.70% गिरा (1,950 पर), और एमएंडएम 1.22% नीचे (2,100 पर)। अन्य: हीरो मोटोकॉर्प (1.0%), एचडीएफसी बैंक (0.4%)। आईपीओ फ्रंट पर आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी 72% सब्सक्राइब हुआ, जबकि कोरोना रेमेडीज का आईपीओ लिस्टिंग के लिए तैयार। ये हलचलें बताती हैं कि निवेशक सेलेक्टिव खरीदारी पर फोकस कर रहे हैं।

ग्लोबल क्यूज और प्रभाव: वैश्विक बाजारों का असर भारतीय बाजार वैश्विक संकेतों से प्रभावित रहा। अमेरिकी डाउ जोन्स 0.2% नीचे बंद हुआ, नास्डैक 0.1% गिरा, फेड की दर कटौती पर सतर्कता के कारण। एशियाई बाजारों में निक्केई 0.3% ऊपर, लेकिन हांगकांग का हैंग सेंग 0.5% नीचे। यूरोपीय बाजारों में डीएक्सआईए 0.4% गिरा, ईसीबी की नीति पर चिंता से। क्रूड ऑयल (ब्रेंट) 72 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा, जो ऑटो सेक्टर के लिए राहत। रुपया 83.45 पर डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, जो एक्सपोर्टर्स के लिए सकारात्मक। यूक्रेन शांति वार्ता की प्रगति ने ऊर्जा बाजारों को स्थिर किया। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताएं भारतीय बाजार को दबाव में रख रही हैं, लेकिन घरेलू व्यापार घाटे की कमी ने सकारात्मक आधार दिया।

भविष्य की अपेक्षाएं: सतर्क आशावाद अगले सत्रों में सेंसेक्स 85,000-86,000 के बीच रह सकता है। फेड की बैठक (18 दिसंबर) और आईपीएल 2026 नीलामी जैसे इवेंट्स बाजार को प्रभावित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि रिन्यूएबल और आईटी सेक्टरों में तेजी आएगी। एसबीआई सिक्योरिटीज ने बीएचईएल और अशोक लेलैंड पर खरीद सलाह दी। लंबी अवधि में, जीडीपी ग्रोथ 7% रहने से बाजार मजबूत रहेगा। लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क्स पर नजर रखनी होगी।

निष्कर्ष सेंसेक्स की मामूली गिरावट बाजार की लचीलापन दर्शाती है। निवेशकों को डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो पर फोकस करना चाहिए। क्या बाजार 86,000 तोड़ेगा? कमेंट्स में बताएं। हमारी वेबसाइट पर लाइव अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

By SHAHID

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