9 जनवरी 2026, Sensex में 604 अंकों की गिरावट जबकि Nifty 193 पॉइंट्स गिरकर 25,683 पर पहुंचा: भारतीय शेयर बाजार में आज फिर गिरावट का दौर जारी रहा। BSE Sensex 604 पॉइंट्स गिरकर 84,367 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 193 पॉइंट्स गिरकर 25,683 पर पहुंचा। यह लगातार पांचवें दिन की गिरावट है, जो पिछले तीन महीनों में बाजार का सबसे खराब सप्ताह साबित हुआ है। निवेशकों में अमेरिकी टैरिफ नीतियों की चिंता और वैश्विक अनिश्चितताओं ने बाजार को प्रभावित किया। इस रिपोर्ट में हम गिरावट के कारणों, प्रभावों, सेक्टर-वाइज विश्लेषण और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
बाजार की गिरावट के प्रमुख आंकड़े
सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन
आज का कारोबार शुरुआत में थोड़ी तेजी के साथ हुआ, लेकिन जल्द ही बिकवाली का दबाव हावी हो गया। BSE Sensex ने दिन के दौरान 700 पॉइंट्स तक की गिरावट देखी, लेकिन अंत में 604 पॉइंट्स (0.71%) की गिरावट के साथ 84,367 पर बंद हुआ। इसी तरह, NSE निफ्टी 193 पॉइंट्स (0.75%) गिरकर 25,683 पर बंद हुआ। सप्ताह के दौरान Sensex ने कुल 2,200 पॉइंट्स गंवाए, जो सितंबर 2025 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
ब्रॉडर मार्केट का हाल
ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में रहा। BSE पर कुल 4,289 शेयरों में से 3,089 में गिरावट आई, जबकि केवल 1,022 में तेजी देखी गई। 70 शेयरों ने 52-वीक हाई बनाया, लेकिन 305 ने 52-वीक लो छुआ। निफ्टी 500 में कई शेयरों ने नए निचले स्तर देखे, जो बाजार की कमजोरी को दर्शाता है।
गिरावट के प्रमुख कारण
अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताएं
बाजार की गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां हैं। निवेशक चिंतित हैं कि अमेरिका भारत समेत कई देशों पर नए टैरिफ लगा सकता है, जो निर्यात-निर्भर सेक्टरों को प्रभावित करेगा। पिछले चार दिनों में बाजार ने इस चिंता से 1,600 पॉइंट्स गंवाए। इसके अलावा, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल ट्रेड डील्स की अनिश्चितता ने भी दबाव बढ़ाया।
FII आउटफ्लो और VIX में उछाल
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगातार बिकवाली की, जिससे बाजार में लिक्विडिटी प्रभावित हुई। VIX इंडेक्स इस सप्ताह 16% उछला, जो बाजार की वोलेटिलिटी को दर्शाता है। घरेलू निवेशक भी सतर्क रहे, क्योंकि कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुस्ती देखी गई।
सेक्टरल प्रेशर
IT, मेटल और ऑयल & गैस सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 8% की गिरावट आई, जिससे मार्केट कैप में 2 ट्रिलियन रुपये का नुकसान हुआ।
बाजार पर प्रभाव
निवेशकों का सेंटीमेंट
इस गिरावट ने निवेशकों के सेंटीमेंट को झटका दिया है। छोटे निवेशक, जो हाल के महीनों में बाजार में सक्रिय थे, अब साइडलाइन पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ की चिंता बढ़ी, तो और गिरावट आ सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में बाजार रिकवर कर सकता है, क्योंकि 2026 में अर्निंग्स ग्रोथ की उम्मीद है।
अर्थव्यवस्था पर असर
यह गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है। अगर निर्यात प्रभावित हुआ, तो जीडीपी ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। हालांकि, RBI की मॉनेटरी पॉलिसी से कुछ राहत मिल सकती है। प्राइमरी मार्केट में भी प्रभाव पड़ा, लेकिन भारत कोकिंग कोल का IPO पहले दिन ही 5 गुना ओवरसब्सक्राइब्ड हो गया, जो कुछ पॉजिटिव सिग्नल देता है।
IPO और अन्य डेवलपमेंट्स
प्राइमरी मार्केट में अमागी मीडिया लैब्स का 1,788 करोड़ का IPO 13 जनवरी को खुलेगा। NSE ने 15 जनवरी को करेंसी डेरिवेटिव्स के लिए ट्रेडिंग हॉलिडे घोषित किया है।
सेक्टर-वाइज विश्लेषण
सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर
IT सेक्टर में TCS और टेक महिंद्रा के शेयरों में 3% गिरावट आई। मेटल सेक्टर में टाटा स्टील 2.2% गिरा। ऑयल & गैस में रिलायंस का गिरना प्रमुख रहा। बैंकिंग सेक्टर में ICICI बैंक और अडानी एंटरप्राइजेज 2% गिरे।
पॉजिटिव सेक्टर
कुछ सेक्टरों में रेजिलिएंस दिखा। एशियन पेंट्स टॉप गेनर रहा, जबकि BEL और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में तेजी देखी गई। फाइनेंशियल सर्विसेज में बजाज फाइनेंस ने थोड़ी बढ़त दिखाई।
टॉप गेनर्स और लूजर्स
टॉप गेनर्स
Nifty 50 में एशियन पेंट्स ने सबसे ज्यादा बढ़त दिखाई। अन्य में ICICI बैंक (0.50%), बजाज फाइनेंस (0.33%) और BEL शामिल हैं।
टॉप लूजर्स
अडानी एंटरप्राइजेज, NTPC, ICICI बैंक (कुछ रिपोर्ट्स में लूजर), टाटा कंसल्टेंसी और लार्सन & टुब्रो बड़े लूजर्स रहे। Elecon Engineering के शेयर 17% गिरे, क्योंकि प्रॉफिट 33% घटा।
ग्लोबल कंटेक्स्ट और भविष्य की संभावनाएं
वैश्विक बाजारों का प्रभाव
एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी गई, जबकि अमेरिकी बाजार ट्रंप की नीतियों से प्रभावित हैं। गोल्डमैन सैक्स ने MSCI चाइना के लिए 20% ग्रोथ की भविष्यवाणी की है। भारत के लिए BNP Paribas ने निफ्टी को 29,500 तक पहुंचने की उम्मीद जताई है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 EMS सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण होगा। बाजार में सुधार के लिए कॉर्पोरेट अर्निंग्स और पॉलिसी सपोर्ट जरूरी है।
निष्कर्ष और सलाह
यह गिरावट अल्पकालिक लगती है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। लंबी अवधि में, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, और 2026 में रिटर्न्स की उम्मीद है। निवेशक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाएं और VIX को मॉनिटर करें। आने वाले दिनों में Q3 रिजल्ट्स और बजट पर नजर रहेगी।
Sources: BSE वेबसाइट, NSE वेबसाइट