SENSEX NIFTY SLIPSSENSEX NIFTY SLIPS

19 जनवरी 2026, Sensex 324 अंक टूटा, NIFTY 25,600 से नीचे बंद: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 324 अंक की गिरावट के साथ 83,246 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 109 अंक फिसलकर 25,586 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कमजोर तिमाही नतीजे, वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाएं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मुख्य कारण रहे। सबसे बड़ा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से पड़ा, जिसने ग्लोबल मार्केट्स में अनिश्चितता बढ़ा दी।

बाजार का समग्र प्रदर्शन

कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने दिन की ऊंचाई 83,700 के करीब छुई, लेकिन अंत में 0.39% की गिरावट दर्ज की। निफ्टी ने भी 25,700 के स्तर से नीचे फिसलते हुए 0.42% का नुकसान उठाया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी कमजोरी रही – BSE मिडकैप 0.8% और स्मॉलकैप 1.2% नीचे बंद हुए। कुल मिलाकर बाजार की चौड़ाई नकारात्मक रही, जहां एडवांस-डिक्लाइन रेशियो 1:3 के आसपास रहा।

सेक्टरवार प्रदर्शन और टॉप गेनर्स-लूजर्स

सबसे ज्यादा नुकसान रियल्टी, मीडिया, ऑयल एंड गैस और मेटल सेक्टर्स में हुआ। रियल्टी इंडेक्स 3% से अधिक गिरा, जबकि मीडिया 2.5% नीचे रहा। IT सेक्टर में भी दबाव दिखा, जहां विप्रो के शेयर 8% तक धराशायी हो गए – कंपनी के कमजोर Q3 नतीजों के कारण। दूसरी ओर एविएशन सेक्टर चमका, जहां इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) 4.16% चढ़कर टॉप गेनर रहा। टेक महिंद्रा, HUL, कोटक बैंक और मारुति सुजुकी भी 1-2% की बढ़त के साथ मजबूत रहे। हैवीवेट्स जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक और HDFC बैंक में बिकवाली से इंडेक्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

ट्रंप की टैरिफ धमकी: वैश्विक अनिश्चितता का मुख्य ट्रिगर

बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ा वैश्विक फैक्टर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी रहा। ग्रीनलैंड विवाद को लेकर ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ की चेतावनी दी है, जिससे व्यापार युद्ध की आशंकाएं फिर से उभर आई हैं। यूरोपीय मार्केट्स पहले ही लाल निशान में बंद हुए, जबकि एशियाई बाजारों (निक्केई, हैंग सेंग) में भी 1-2% की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी फ्यूचर्स भी कमजोर ट्रेड कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होगी, जिसका सीधा असर भारत के निर्यात (खासकर IT, फार्मा और ऑटो) पर पड़ेगा।

अन्य कारण और घरेलू फैक्टर्स

घरेलू स्तर पर Q3 नतीजों का सीजन निराशाजनक रहा। कई बड़ी कंपनियों के मार्जिन सिकुड़ने और रेवेन्यू ग्रोथ कम रहने से निवेशकों का सेंटीमेंट खराब हुआ। FIIs की लगातार बिकवाली (पिछले सप्ताह 15,000 करोड़ से अधिक) और DIIs की सीमित खरीदारी ने भी बाजार को सहारा नहीं दिया। रुपये में कमजोरी (74.50 के करीब) और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने आयात निर्भर सेक्टर्स पर दबाव बढ़ाया। इसके अलावा भारत-यूएई व्यापार समझौतों की सकारात्मक खबरें भी बाजार को संभाल नहीं पाईं।

आगे की संभावना और विशेषज्ञ राय

विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। यदि ट्रंप की धमकी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहती है, तो बाजार में रिकवरी आ सकती है। सपोर्ट लेवल्स – सेंसेक्स के लिए 82,800 और निफ्टी के लिए 25,300 महत्वपूर्ण हैं। ऊपरी स्तर पर 84,000 और 25,800 रेजिस्टेंस जोन हैं। निवेशकों को सतर्क रहने और क्वालिटी स्टॉक्स (एविएशन, FMCG) पर फोकस करने की सलाह दी जा रही है। लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता से बचाव जरूरी है।

यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है, लेकिन वैश्विक व्यापार युद्ध की छाया निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बाजार कल कैसे खुलेगा, यह अमेरिकी मार्केट्स और ट्रंप के अगले बयान पर निर्भर करेगा।

Sources: NSE वेबसाइट, BSE वेबसाइट

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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