Express Way ProjectExpress Way Project

सीमांचल क्षेत्र, बिहार का यह पिछड़ा लेकिन समृद्ध सांस्कृतिक हृदय, लंबे समय से बेहतर सड़क नेटवर्क की बाट जोह रहा है। लेकिन 2025 के अंत तक आते-आते एक बड़ी खुशखबरी मिली है – गोरखपुर-सिलीगुड़ी Express Way Project पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। लगभग 41,000 करोड़ रुपये की इस मेगा परियोजना से न केवल सीमांचल की आर्थिक तस्वीर बदलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़कर पूर्वी भारत को दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों से जोड़ने में नया आयाम जुड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा जारी नवीनतम रूट चार्ट के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे अररिया जिले के नरपतगंज, फारबिसगंज, कुरसकांटा, सिकटी और पलासी ब्लॉकों से होकर गुजरेगा, जबकि किशनगंज में बहादुरगंज की 25 पंचायतें लाभान्वित होंगी। दिसंबर 2025 तक भूमि अधिग्रहण और सर्वे कार्य तेज हो चुके हैं, जो 2026 में निर्माण शुरू होने का संकेत दे रहे हैं।

यदि आप बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर अपडेट्स, सीमांचल डेवलपमेंट या गोरखपुर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे 2025 की लेटेस्ट खबरें ढूंढ रहे हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। हम यहां प्रोजेक्ट के हर पहलू – रूट, लाभ, प्रगति और चुनौतियों – पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: प्रोजेक्ट का समग्र अवलोकन

भारतमाला परियोजना का हिस्सा यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने का एक प्रमुख कदम है। कुल लंबाई 519 किलोमीटर (कुछ स्रोतों में 568 किमी तक उल्लिखित) की इस ग्रीनफील्ड परियोजना की अनुमानित लागत 38,645 से 41,000 करोड़ रुपये के बीच है, जो निर्माण सामग्री की महंगाई और भूमि अधिग्रहण पर निर्भर करती है। यह चार लेन का होगा, जिसे भविष्य में छह लेन तक बढ़ाया जा सकेगा, और डिजाइन स्पीड 120 किमी/घंटा रखी गई है। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड में बनने वाला यह हाईवे नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ व्यापार को बढ़ावा देगा।

केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में इसे मंजूरी दी, जबकि बिहार सरकार का योगदान करीब 27,000 करोड़ का है। दिसंबर 2025 तक, डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) उत्तर प्रदेश-बिहार बॉर्डर तक मंजूर हो चुकी है, और निविदा प्रक्रिया चल रही है। पूरा होने पर गोरखपुर से सिलीगुड़ी की दूरी 640 किमी से घटकर 519 किमी रह जाएगी, और यात्रा समय 14-15 घंटे से घटकर 8-9 घंटे हो जाएगा। यह न केवल ईंधन बचत करेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को 30-40% कम कर देगा।

रूट का विस्तृत विवरण: सीमांचल पर विशेष जोर

यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों – उत्तर प्रदेश (84 किमी), बिहार (416 किमी) और पश्चिम बंगाल (19 किमी) – से गुजरेगा। बिहार में आठ जिले कवर होंगे: पश्चिम चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), शेओहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज। कुल 313 गांव और 39 ब्लॉक प्रभावित होंगे।

सीमांचल फोकस में, अररिया जिले में 59.5 किमी का हिस्सा नरपतगंज (6 मौजा), फारबिसगंज (15 मौजा), अररिया (4 मौजा), कुरसकांटा (8 मौजा), सिकटी (3 मौजा) और पलासी (12 मौजा) से होकर गुजरेगा। सिकटी ब्लॉक के बेलबारी, पोठिया, करहाबारी और सोहदी जैसे गांवों में गुज्जन चौक से दक्षिण की ओर निर्माण शुरू होगा। किशनगंज में 72.5 किमी लंबा सेक्शन तेघागाछ (5 मौजा), बहादुरगंज (23-25 पंचायतें) और ठाकुरगंज (30 मौजा) से कनेक्ट होगा। हालिया बदलाव के तहत, एलाइनमेंट में संशोधन हुआ है – अब ठाकुरगंज के पूर्वी इलाकों से गुजरेगा, जो पहले देवरिया (यूपी) से जुड़ा था।

मुख्य जंक्शनों में फारबिसगंज पर NH-27 और किशनगंज पर NH-327 से कनेक्शन शामिल हैं। स्पर रोड्स बेतिया, मोतिहारी, दरभंगा और मधुबनी जैसे शहरों तक पहुंच प्रदान करेंगे। नेपाल सीमा के समांतर चलने से सीमा व्यापार में वृद्धि अपेक्षित है। दिसंबर 2025 में गजट नोटिफिकेशन जारी होने से रूट फाइनल हो गया है।

सीमांचल और बिहार के लिए अपेक्षित लाभ: आर्थिक क्रांति की शुरुआत

सीमांचल – अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज का यह क्षेत्र – बाढ़, गरीबी और खराब कनेक्टिविटी से जूझता रहा है। यह एक्सप्रेसवे इन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेगा।

आर्थिक उछाल और रोजगार अवसर

प्रोजेक्ट से औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होंगे, जिससे हजारों नौकरियां पैदा होंगी। किसानों को चाय, जूट, सब्जियां और अनाज जैसे उत्पादों को तेजी से बाजार पहुंचाने में मदद मिलेगी। परिवहन लागत घटने से बिहार की जीएसडीपी में 4-5% का इजाफा संभव है। नेपाल-बांग्लादेश व्यापार बढ़ेगा, जबकि सिलीगुड़ी के रास्ते पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच आसान हो जाएगी। रियल एस्टेट में निवेश बढ़ेगा, खासकर अररिया और किशनगंज में।

सामाजिक और पर्यावरणीय फायदे

बेहतर सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को बढ़ावा देंगी। सिलीगुड़ी का प्रवेश द्वार बनने से दार्जिलिंग-कलिम्पोंग जैसे पर्यटन स्थलों की यात्रा सुगम होगी। पर्यावरण के लिए, एक्सप्रेसवे किनारे हरित पट्टी विकसित की जाएगी। पीएम मोदी ने नवंबर 2025 के फारबिसगंज रैली में कहा कि यह सीमांचल की किस्मत बदल देगा।

निर्माण प्रगति, चुनौतियां और समयसीमा: 2025 के अंत की स्थिति

अगस्त 2025 से सर्वे शुरू हो चुके हैं – पूर्वी चंपारण में 491 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण चल रहा है। किशनगंज और अररिया में मौजा-आधारित सर्वे पूर्ण हो चुके हैं। नवंबर 2025 तक निविदाएं आमंत्रित की गईं, और 2026 में पूर्ण निर्माण शुरू होगा। लक्ष्य 2028 तक पूरा करना है, लेकिन चुनावी गति से यह 2027 के अंत तक संभव लगता है।

चुनौतियां: भूमि विवाद, बाढ़ प्रभावित इलाके और पर्यावरण मंजूरी। हालांकि, ग्रीनफील्ड होने से घनी आबादी से बचाव हुआ है। केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत है।

निष्कर्ष: सीमांचल का सुनहरा भविष्य

41,000 करोड़ का यह मेगा एक्सप्रेसवे सीमांचल को विकास की मुख्यधारा में लाएगा। 2025 की ताजा अपडेट्स से साफ है कि प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ चुका है। NHAI और बिहार सरकार के प्रयास सराहनीय हैं। यदि आप गोरखपुर सिलीगुड़ी Express Way Project 2025 अपडेट्स या सीमांचल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक जानना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करें। आपका जिला इस रूट पर है? कमेंट्स में शेयर करें!

By SHAHID

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *