भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा हाल ही में जारी आदेश ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। नए स्मार्टफोन्स पर संचार साथी (Sanchar Saathi) ऐप को पूर्व-स्थापित (pre-installed) करने का निर्देश दिया गया है, जो मार्च 2026 तक लागू होगा। यह ऐप साइबर फ्रॉड और चोरी के फोनों को रोकने का दावा करता है, लेकिन विपक्ष इसे ‘जासूसी का हथियार’ बता रहा है। इस रिपोर्ट में हम इस विवाद की गहराई में उतरेंगे, सरकारी दावों, विपक्षी आरोपों, जन प्रतिक्रियाओं और विशेषज्ञ मतों का विश्लेषण करेंगे।
संचार साथी ऐप: क्या है यह और कैसे काम करता है?
संचार साथी ऐप DoT द्वारा विकसित एक सरकारी ऐप है, जो 2023 से उपलब्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य टेलीकॉम फ्रॉड से बचाव है। ऐप के प्रमुख फीचर्स:
- चोरी/खोए फोन ट्रैकिंग: IMEI नंबर के जरिए फोन को पूरे देश में ब्लॉक कर देना। 2025 तक 37 लाख से अधिक फोन ब्लॉक हो चुके हैं, जिनमें से 22 लाख रिकवर हो चुके।
- फर्जी सिम चेक: उपयोगकर्ता अपने नाम पर रजिस्टर्ड कितने नंबर हैं, यह जांच सकता है। 30 मिलियन से अधिक फर्जी कनेक्शन डीएक्टिवेट हो चुके।
- संदिग्ध कॉल/एसएमएस रिपोर्टिंग: CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल से जुड़कर फ्रॉड रिपोर्ट करना।
- IMEI वेरिफिकेशन: नकली डिवाइसों से बचाव।
सरकार का कहना है कि यह ऐप लाखों उपयोगकर्ताओं द्वारा पहले से डाउनलोड किया जा चुका है और साइबर क्राइम में कमी लाया है। लेकिन 28 नवंबर 2025 के DoT आदेश ने इसे अनिवार्य बना दिया – सभी नए फोन्स (Apple, Samsung, Vivo आदि) पर प्री-इंस्टॉल, और शुरुआत में डिलीट न करने योग्य। पुराने फोन्स पर अपडेट के जरिए जोड़ा जाएगा।
सरकारी पक्ष: ‘सुरक्षा के लिए जरूरी, कोई जासूसी नहीं’
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में स्पष्ट किया कि ऐप वैकल्पिक है और उपयोगकर्ता इसे डिलीट कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “संचार साथी से कोई जासूसी नहीं हो रही। जो नहीं चाहें, वे ऐप हटा दें।” DoT के अनुसार, यह ‘डिजिटल इंडिया’ का हिस्सा है, जो फेक हैंडसेट्स और साइबर फ्रॉड रोकने के लिए है।
सरकार ने जोर दिया कि ऐप केवल उपयोगकर्ता की सहमति से काम करता है – डेटा कलेक्शन रिपोर्टिंग तक सीमित है, न कि सामान्य निगरानी के लिए। 2025 में साइबर फ्रॉड के 5 मिलियन से अधिक केस दर्ज हुए, जिनमें से अधिकांश टेलीकॉम से जुड़े थे। यह कदम इनकी रोकथाम के लिए उठाया गया है।
विपक्ष का तीखा विरोध: ‘पेगासस 2.0, निजता पर हमला’
विपक्ष ने इस आदेश को असंवैधानिक करार दिया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे ‘स्नूपिंग ऐप’ बताया और कहा, “यह डिजिटल तानाशाही है। नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है।” महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पेगासस जासूसी कांड से जोड़ते हुए कहा, “यह पूरे देश पर निगरानी का प्रयास है।” राहुल गांधी ने संसद में चर्चा की मांग की, बोले, “यहां नहीं बोलेंगे, डिबेट में बोलेंगे।”
शिवसेना (UBT) और अन्य दलों ने ‘विशेष संसदीय समिति’ गठन की मांग की है। उनका आरोप: ऐप IMEI, सिम डेटा और कॉल लॉग्स एक्सेस करता है, जो बैकग्राउंड में ट्रैकिंग का खतरा पैदा करता है। सुप्रीम कोर्ट के 2017 के प्राइवेसी राइट फैसले का हवाला देते हुए विपक्ष अदालत जाने की चेतावनी दे रहा है।
सोशल मीडिया पर जनाक्रोश: #SancharSaathi ट्रेंडिंग
X (पूर्व ट्विटर) पर #SancharSaathi टॉप ट्रेंड बन चुका है। विपक्षी समर्थक इसे ‘मोदी सरकार का नया पेगासस’ बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा: “पेगासस के बाद अब यह ऐप आम आदमी पर निगरानी लगाने का प्लान है।” दूसरी ओर, समर्थक इसे सुरक्षा का जरिया मान रहे: “सरकार कुछ भी करें, विपक्ष को सिर्फ रोना-धोना ही करना है। मोबाइल सिक्योरिटी चाहिए या नहीं?”
कुछ पोस्ट्स में मीम्स वायरल हैं, जैसे ‘स्टॉकर साथी’। कुल मिलाकर, 20 हालिया पोस्ट्स में 70% विपक्षी आलोचना पर केंद्रित हैं, जबकि 30% फायदों पर।
विशेषज्ञों की राय: बैलेंस की जरूरत
प्राइवेसी एडवोकेट मिशी चौधरी ने कहा, “यूजर कंसेंट खत्म हो गया – यह सरकारी ट्रैकर बन गया।” लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि फायदे अधिक हैं: “रूस के MAX ऐप जैसा, लेकिन भारत के संदर्भ में उपयोगी।” डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत शिकायत का विकल्प उपलब्ध है, लेकिन पब्लिक कंसल्टेशन की कमी विवाद बढ़ा रही है।
| पक्ष | मुख्य दावा | उदाहरण/आंकड़े |
|---|---|---|
| सरकार | साइबर सुरक्षा मजबूत | 37 लाख फोन ब्लॉक, 22 लाख रिकवर |
| विपक्ष | निजता उल्लंघन | पेगासस जैसी जासूसी का डर |
| जनता (X पर) | मिश्रित | 70% विरोध, 30% समर्थन |
| विशेषज्ञ | बैलेंस जरूरी | कंसेंट और ट्रांसपेरेंसी की मांग |
निष्कर्ष: संसद में चर्चा होनी चाहिए
संचार साथी ऐप साइबर सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक कदम लगता है, लेकिन अनिवार्यता और डिलीट न करने की शर्त प्राइवेसी चिंताओं को जन्म दे रही है। विपक्ष की मांग जायज है – संसद में पारदर्शी चर्चा और संशोधन जरूरी। उपयोगकर्ताओं को सलाह: ऐप डाउनलोड करें, लेकिन परमिशन्स चेक करें और VPN यूज करें।