20 दिसंबर 2025, Odesa Port: यूक्रेन के दक्षिणी शहर Odesa के बंदरगाह पर रूसी मिसाइल हमले ने एक बार फिर युद्ध की भयावहता को उजागर कर दिया है। शुक्रवार रात (19 दिसंबर) को हुए इस घातक हमले में कम से कम 8 लोग मारे गए, जबकि 27 अन्य घायल हो गए। यूक्रेनी आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, हमला बंदरगाह की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर केंद्रित था, जहां एक बस को निशाना बनाया गया, जिसमें कई मजदूर सवार थे। यह घटना न केवल मानवीय क्षति का प्रतीक है, बल्कि रूस की आक्रामक रणनीति का भी, जो यूक्रेन के अनाज निर्यात को चुपचाप बाधित करने की कोशिश कर रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरों के बीच यह हमला यूक्रेन के निरंतर संघर्ष को नई तीव्रता देता है, जहां शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। इस रिपोर्ट में हम इस हमले के विवरण, पृष्ठभूमि, प्रभावों और वैश्विक प्रतिक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
हमले की घटना शुक्रवार रात करीब 11 बजे हुई, जब रूसी सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के संयोजन से Odesa क्षेत्र के पिव्डेन्नी बंदरगाह को निशाना बनाया। यूक्रेनी वायु सेना के अनुसार, रूस ने कुल 15 स्थलों पर हमले किए, लेकिन ओडेसा पर फोकस सबसे घातक साबित हुआ। मिसाइलें सीधे बंदरगाह की सुविधाओं पर गिरीं, जहां अनाज भंडारण और लोडिंग का काम चल रहा था। बचाव कार्यकर्ताओं ने बताया कि विस्फोट इतने जोरदार थे कि आसपास की इमारतें ध्वस्त हो गईं, और आग की लपटें रात भर सुलगती रहीं। एक बस, जो बंदरगाह के कर्मचारियों को ले जा रही थी, हमले के केंद्र में फंस गई, जिसमें सवार अधिकांश लोग तुरंत मारे गए। ओडेसा के क्षेत्रीय गवर्नर ओलेह किपर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “यह न केवल हमारी अर्थव्यवस्था पर हमला है, बल्कि निर्दोष नागरिकों की जिंदगियों पर भी। हम हर संभव सहायता पहुंचा रहे हैं।”
मृतकों में ज्यादातर बंदरगाह के मजदूर और स्थानीय निवासी थे, जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है। घायलों को Odesa के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर है। यूक्रेनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चोटें शार्पनेल और विस्फोट के धमाके से लगी हैं, जिनमें कई लोगों को आंखों और छाती में गंभीर क्षति पहुंची। बचाव कार्य अभी भी जारी है, और मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश चल रही है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने हमले की निंदा करते हुए कहा, “रूस का यह कृत्य युद्ध अपराध है। हम अंतरराष्ट्रीय अदालत में इसका जवाब देंगे।” जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है।
यह हमला यूक्रेन-रूस युद्ध के 1037वें दिन का हिस्सा है, जो फरवरी 2022 से चला आ रहा है। Odesa बंदरगाह, जो ब्लैक सी पर स्थित है, यूक्रेन का प्रमुख अनाज निर्यात केंद्र है। युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने बार-बार इस क्षेत्र को निशाना बनाया है, ताकि यूक्रेन की वैश्विक खाद्य आपूर्ति बाधित हो। जुलाई 2023 के अनाज समझौते के बाद भी हमले जारी हैं, जिससे वैश्विक अनाज कीमतें प्रभावित हुई हैं। हाल के महीनों में रूस ने ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ाया है, खासकर सर्दियों में जब यूक्रेन की वायु रक्षा कमजोर पड़ती है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने ओडेसा पर 12 से अधिक हमले हो चुके हैं, जिनमें 50 से ज्यादा मौतें हुई हैं। यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई में रूसी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले किए, जिससे मॉस्को की अर्थव्यवस्था को झटका लगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की तीखी निंदा हो रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा, “रूस की आक्रामकता अस्वीकार्य है। हम यूक्रेन को अतिरिक्त हथियार भेजेंगे।” दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच वाशिंगटन में एक क्रेमलिन राजदूत की मेजबानी हो रही थी, जो शांति वार्ताओं का हिस्सा बताई जा रही है। यूरोपीय संघ ने अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की, जबकि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने “तत्काल युद्धविराम” की अपील की। भारत ने भी हमले की निंदा की है, विदेश मंत्रालय ने कहा कि “हम शांति और संवाद के पक्षधर हैं।” हालांकि, वैश्विक ध्यान फिलहाल सीरिया और मध्य पूर्व पर केंद्रित है, जिससे यूक्रेन का मुद्दा पीछे छूट रहा है।
इस हमले के आर्थिक प्रभाव गंभीर हैं। ओडेसा बंदरगाह से यूक्रेन का 60% अनाज निर्यात होता है, जो अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों के लिए महत्वपूर्ण है। हमले से अनाज भंडार नष्ट हो गए, जिससे अगले कुछ हफ्तों में निर्यात रुक सकता है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, युद्ध से यूक्रेन की जीडीपी में 30% की गिरावट आ चुकी है, और बंदरगाह हमलों से यह और बढ़ेगी। पर्यावरणीय क्षति भी चिंताजनक है – विस्फोट से ब्लैक सी में तेल रिसाव का खतरा है, जो समुद्री जीवन को प्रभावित करेगा। मानवीय संकट और गहरा गया है; ओडेसा में 2 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं, और सर्दियों में सहायता पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली, जिसमें पेट्रियट मिसाइलें शामिल हैं, ने कई मिसाइलों को रोका, लेकिन सभी को नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की हाइपरसोनिक मिसाइलें नई चुनौती पेश कर रही हैं। यूक्रेनी सेना ने दावा किया कि उन्होंने 80% ड्रोनों को मार गिराया। लेकिन नागरिक हानि से जनता में गुस्सा भड़क रहा है। ओडेसा की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां लोग “रूस गो होम” के नारे लगा रहे हैं।
निष्कर्षतः Odesa हमला यूक्रेन के संघर्ष की कड़वी सच्चाई को बयां करता है – जहां हर दिन नई त्रासदी लिखी जा रही है। रूस की रणनीति स्पष्ट है: आर्थिक घुटन और मानवीय दबाव से यूक्रेन को झुकाना। लेकिन जेलेंस्की सरकार का हौसला बरकरार है। वैश्विक नेताओं को अब ठोस कदम उठाने होंगे, वरना यह युद्ध अनिश्चित काल तक चलेगा। ओडेसा के शहीदों को श्रद्धांजलि, और शांति की प्रार्थना। क्या 2026 में कोई बदलाव आएगा? उम्मीद की किरण बाकी है, लेकिन वास्तविकता क्रूर।