10 जनवरी 2026, बिहार Congress में टूट की अफवाहें: बिहार की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल मची हुई है। कांग्रेस पार्टी के विधायकों में दलबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के बाद Congress के कई विधायक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो सकते हैं। यह अफवाहें तब और तेज हुईं जब प्रदेश Congress की एक महत्वपूर्ण बैठक में तीन विधायक अनुपस्थित रहे। जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने इस पर बड़े दावे किए हैं, जबकि कांग्रेस इसे विपक्ष की साजिश करार दे रही है। इस रिपोर्ट में हम इस मुद्दे की विस्तृत पड़ताल करेंगे, जिसमें पृष्ठभूमि, वर्तमान घटनाक्रम, नेताओं के बयान और संभावित प्रभाव शामिल हैं।
पृष्ठभूमि: कांग्रेस की आंतरिक कलह
बिहार विधानसभा में Congress के पास फिलहाल 19 विधायक हैं, जो महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दलों का गठबंधन) का हिस्सा है। 2020 के विधानसभा चुनावों में Congress ने 19 सीटें जीती थीं, लेकिन उसके बाद से पार्टी में आंतरिक कलह और दलबदल की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। उदाहरण के लिए, 2025 में खगड़िया के पूर्व विधायक छत्रपति यादव और गजानंद शाही को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए नोटिस जारी किया गया था। हाल के लोकसभा चुनावों में बिहार में Congress का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां महागठबंधन को करारी हार मिली। NDA की भारी जीत के बाद कांग्रेस में असंतोष की लहर दौड़ गई है, और कई विधायक अपने राजनीतिक भविष्य की तलाश में जुटे हैं।
पिछली दलबदल की घटनाएं
बिहार की राजनीति में दलबदल कोई नई बात नहीं है। 2022 में भी कांग्रेस के कुछ विधायकों ने JDU का दामन थामा था, जिससे महागठबंधन कमजोर हुआ। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दलबदल कानून के बावजूद पार्टियां विधायकों को लुभाने में सफल रहती हैं। महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में हाल की घटनाओं ने बिहार में भी इसी पैटर्न को प्रेरित किया है। नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने दलबदल को आसान बना दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर स्थिति भी बिहार में इसका असर दिखा रही है, जहां स्थानीय नेता राष्ट्रीय नेतृत्व से असंतुष्ट हैं।
वर्तमान घटनाक्रम: अफवाहों का दौर
वर्तमान अफवाहों की शुरुआत हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह द्वारा बुलाई गई बैठक से हुई। इस बैठक में तीन प्रमुख विधायक अनुपस्थित रहे, जिसने दलबदल की चर्चाओं को हवा दी। एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इन विधायकों के नाम अभी गोपनीय हैं, लेकिन उनके एनडीए में जाने की संभावना प्रबल है। जेडीयू के नेताओं ने इस पर खुलकर दावे किए हैं। बिहार के पीएचईडी मंत्री संजय सिंह ने कहा, “मकर संक्रांति के बाद Congress के सभी विधायक NDA में आ जाएंगे।” न्यूज18 बिहार ने इस बयान को प्रमुखता से प्रसारित किया है।
नेताओं के बयान और प्रतिक्रियाएं
Congress की ओर से इन अफवाहों का जोरदार खंडन किया जा रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इसे NDA की साजिश बताया, जिसका मकसद महागठबंधन को तोड़ना है। ओकिनावा टाइम्स की रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि मकर संक्रांति के बाद ऐसी टूट असंभव है। वहीं, कैरवन मैगजीन के फेसबुक पोस्ट में एनडीए की जीत को कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी से जोड़ा गया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि वे गठबंधन बचाने के प्रयास में जुटे हैं। आईपीए न्यूजपैक ने इसे ‘त्योहार के बाद की टूट’ का नाम दिया है।
संभावित प्रभाव: राजनीतिक और विकास पर असर
यदि ये अफवाहें सच्ची साबित हुईं, तो बिहार की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा। महागठबंधन की कमजोरी से NDA की सरकार और मजबूत हो जाएगी, और विपक्ष की आवाज दब जाएगी। स्टेट्समैन की रिपोर्ट से पता चलता है कि चुनावों से पहले दलबदल की लहर आम है। इससे राज्य की विकास योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता से प्रशासनिक फैसले रुक जाते हैं। उदाहरण के लिए, बिहार बजट में प्रस्तावित 3.20 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी पर असर पड़ सकता है।
विपक्ष की रणनीति और NDA की तैयारी
आरजेडी ने पहले दलबदल कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग की थी, जैसा कि यूएनआई की 2025 की रिपोर्ट में है। तेलंगाना में बीआरएस विधायकों के मामले में स्पीकर के फैसले ने बिहार में भी प्रेरणा दी है। NDA की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधायकों को लुभाने में माहिर हैं, और उनकी रणनीति विपक्ष को कमजोर करने की है।
विश्लेषण: कारण और समाधान
इस टूट की अफवाहों के पीछे कई कारण हैं। पहला, कांग्रेस में नेतृत्व का संकट। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी संघर्ष कर रही है। दूसरा, एनडीए की मजबूत स्थिति। तीसरा, आगामी चुनावों की तैयारी। विश्लेषकों का मानना है कि Congress को विधायकों से संवाद बढ़ाना चाहिए। यदि टूट हुई, तो तेजस्वी यादव की स्थिति प्रभावित होगी।
भविष्य की संभावनाएं
मकर संक्रांति तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि दलबदल हुआ, तो विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की नौबत आ सकती है। कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व का हस्तक्षेप चाहिए।
निष्कर्ष: सस्पेंस बरकरार
बिहार की राजनीति में ये अफवाहें व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती हैं। आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं, जो राज्य की दिशा तय करेंगे। राजनीतिक स्थिरता के लिए सभी दलों को एकजुट रहना होगा।
Sources: हिंदुस्तान टाइम्स