rohtas rope way insidentrohtas rope way insident

27 दिसंबर 2025, Rohtas– बिहार के Rohtas जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई एक महत्वाकांक्षी परियोजना तब हादसे का शिकार हो गई, जब उद्घाटन से महज कुछ दिन पहले ही रोपवे का ट्रायल रन विफल हो गया। रोहतासगढ़ किले तक पहुंचने के लिए 13 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से विकसित इस रोपवे का एक केबिन-डोला ट्रायल के दौरान टूटकर धरातल पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इससे परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का नंगा नाच बताते हुए सरकार पर हमला बोला है, जबकि प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

परियोजना की पृष्ठभूमि: पर्यटन का सपना या विकास का दिखावा?

Rohtas रोपवे प्रोजेक्ट बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक था, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किले और रोहितेश्वर धाम को पर्यटकों के लिए सुलभ बनाना था। कैमूर पहाड़ियों पर स्थित यह किला, जो मुगल काल के प्रसिद्ध शासक शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित है, अपनी भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। लेकिन पहाड़ी इलाके होने के कारण यहां पहुंचना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए 2019 में शुरू हुई इस परियोजना को छह साल की मशक्कत के बाद पूरा किया गया। कुल लंबाई लगभग 1.2 किलोमीटर की इस रोपवे में 12 टावर (पिलर) और चार केबिन-डोले लगाए गए थे, जो एक साथ 20-25 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखते।

परियोजना का उद्घाटन नए साल, यानी 1 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों होने वाला था। यह न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने वाला था, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का भी माध्यम माना जा रहा था। Rohtas जिला प्रशासन के अनुसार, प्रोजेक्ट को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की सहायता से विकसित किया गया था, और इससे प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक आकर्षित होने की उम्मीद थी। लेकिन ट्रायल के दौरान हुई यह घटना न केवल उद्घाटन को अनिश्चित कर देगी, बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा देगी।

हादसे का विवरण: ट्रायल में टूटा भरोसा

घटना 26 दिसंबर 2025 की दोपहर करीब 2 बजे Rohtas के अकबरपुर इलाके में घटी। रोपवे का अंतिम ट्रायल रन चल रहा था, जिसमें इंजीनियरों और तकनीकी टीम की मौजूदगी में केबिन को परीक्षण के लिए ऊपर चढ़ाया गया। अचानक ही चौथा और पांचवां पिलर अपनी जगह से हिल गए, और देखते ही देखते दो टावर पूरी तरह धराशायी हो गए। इसके साथ ही चार झूले (स्विंग्स) और मुख्य केबिन-डोला टूटकर 50 फीट नीचे गिर पड़ा। वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि धातु की चरचिंग आवाज के साथ पूरा सिस्टम ढह गया, और मलबा चारों ओर बिखर गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे के समय आसपास के ग्रामीण दहशत में भागे, लेकिन चूंकि यह ट्रायल था, इसलिए कोई यात्री सवार नहीं था। रोहतास के एसपी मनोज कुमार ने बताया कि तत्काल बचाव टीम को मौके पर भेजा गया, और घटनास्थल को सील कर दिया गया। “कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन प्रोजेक्ट की सुरक्षा जांच अब और सख्त होगी,” उन्होंने कहा। प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, नुकसान की अनुमानित राशि 2-3 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा है।

संभावित कारण: तकनीकी खामी या लापरवाही?

हादसे के पीछे क्या कारण है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता या आधारभूत संरचना में दोष प्रमुख कारक हो सकते हैं। रोपवे के पिलरों को पहाड़ी की चट्टानी मिट्टी में गहराई तक जमा किया जाना था, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ पिलरों की नींव कमजोर थी। एक वरिष्ठ इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ट्रायल के दौरान वजन परीक्षण में असफलता से साफ है कि लोड-बेयरिंग कैपेसिटी का आकलन गलत था।”

बिहार सरकार ने घटना के तुरंत बाद एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसमें केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति को 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। Rohtas जिला मजिस्ट्रेट ने कहा, “हम सभी संभावित पहलुओं की जांच करेंगे, जिसमें ठेकेदार की भूमिका भी शामिल है।” ठेकेदार कंपनी, जो दिल्ली आधारित है, ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन स्रोतों के अनुसार, वे तकनीकी खराबी का हवाला दे रहे हैं।

राजनीतिक तूफान: भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई सियासत

इस हादसे ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बताते हुए तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष एजाज अहमद ने कहा, “13 करोड़ की परियोजना छह साल में बनी, लेकिन ट्रायल में ही गिर गई। यह अमृत काल का विकास है? नीतीश सरकार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रही है।” कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ऋषि मिश्रा ने भी आरोप लगाया कि “टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई, और गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।”

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह एक तकनीकी दुर्घटना है, और जांच में सच्चाई सामने आएगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “विपक्ष हमेशा नकारात्मकता फैलाता है। सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है।” इस बीच, सोशल मीडिया पर #RohtasRopewayFail ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग पुरानी घटनाओं जैसे पुल हादसों से तुलना कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों में उठाया जा सकता है।

प्रभाव: पर्यटन पर संकट और आर्थिक नुकसान

इस हादसे का सबसे बड़ा असर स्थानीय पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा। रोहतासगढ़ किला, जो पहले से ही सीमित पहुंच के कारण कम पर्यटकों को आकर्षित करता था, अब और अलग-थलग हो सकता है। स्थानीय होटल और गाइड एसोसिएशन ने चिंता जताई है कि इससे नए साल के पर्यटन सीजन पर बुरा असर पड़ेगा। आर्थिक रूप से, प्रोजेक्ट के ठप होने से सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो सकते हैं, जो निर्माण के दौरान लगे हुए थे।

वातावरणीय दृष्टि से भी यह चिंताजनक है। मलबे के कारण कैमूर पहाड़ियों का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है, और पुनर्निर्माण में अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। सरकार को अब न केवल मरम्मत करनी होगी, बल्कि सार्वजनिक विश्वास बहाल करने के लिए कड़े सुरक्षा मानकों को लागू करना होगा। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि भविष्य की परियोजनाओं में स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य हो।

निष्कर्ष: सबक और सुधार की आवश्यकता

Rohtas रोपवे हादसा बिहार के विकास मॉडल की कमजोरियों को उजागर करता है। जहां एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, वहीं गुणवत्ता की अनदेखी ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है। यह समय है कि जांच न केवल दोषियों को सजा दे, बल्कि सिस्टम में सुधार लाए। यदि समय रहते सबक लिया गया, तो रोहतासगढ़ का सपना फिर से साकार हो सकता है। अन्यथा, यह करोड़ों के टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी मात्र साबित होगा। बिहारवासियों को उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी, और ऐसी दुर्घटनाएं भविष्य में न हों।

Sources: प्रभात खबर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *