1 मार्च 2026, RJD संसदीय बोर्ड की बैठक: बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव 2026 अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने आज पटना में पार्टी की संसदीय बोर्ड की अहम बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य फोकस राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन रहा, और खासकर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खुद चुनाव लड़ने की अटकलें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च होने के कारण पार्टी ने फैसला अंतिम समय तक गुप्त रखने का रणनीतिक फैसला लिया है। बैठक के बाद आरजेडी के प्रवक्ताओं ने संकेत दिए कि स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी।
बैठक का एजेंडा और फैसले
आरजेडी संसदीय बोर्ड की बैठक तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में राबड़ी देवी के सरकारी आवास (10, सर्कुलर रोड) पर हुई। इसमें पार्टी के वरिष्ठ सांसद, विधायक, विधान पार्षद और रणनीतिकार शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि राज्यसभा उम्मीदवार के अंतिम चयन की जिम्मेदारी लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को सौंपी जाए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि आरजेडी नामांकन के आखिरी दिन (5 मार्च) ही अपना पर्चा दाखिल करेगी और पत्ते खोलेगी।
आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “लोग हमारे नेता तेजस्वी जी को संसद के उच्च सदन में देखना चाहते हैं। इंतजार करें, जल्द स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।” हालांकि, पार्टी ने अभी तक कोई आधिकारिक नाम घोषित नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। अन्य नामों में हिना शाहाब, प्रेम गुप्ता और कुछ मुस्लिम नेताओं की भी चर्चा हुई, लेकिन तेजस्वी की दावेदारी पर सबसे ज्यादा जोर है।
बिहार में राज्यसभा चुनाव का गणित
बिहार में राज्यसभा की कुल 5 सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए 16 मार्च को मतदान होगा। इनमें से 4 सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि उसके पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है। लेकिन पांचवीं सीट पर कड़ा मुकाबला है। राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
वर्तमान स्थिति में:
- एनडीए के पास पर्याप्त विधायक हैं।
- महागठबंधन (आरजेडी के नेतृत्व में) के पास कुल 35 विधायक हैं, जिसमें आरजेडी के अकेले 25 विधायक हैं।
- महागठबंधन को पांचवीं सीट के लिए AIMIM (5 विधायक) और BSP (1 विधायक) जैसे छोटे दलों का समर्थन जुटाना होगा।
आरजेडी के पास अकेले 41 विधायकों का आंकड़ा नहीं पहुंच रहा, इसलिए गठबंधन की एकता और बाहरी समर्थन पर सब कुछ टिका है। अगर तीन-चार विधायक भी क्रॉस-वोटिंग करते हैं, तो पांचवीं सीट हाथ से निकल सकती है।
तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की अटकलें: रणनीति या शिगूफा?
तेजस्वी यादव के राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चा पिछले कुछ दिनों से तेज है। पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद कई विश्लेषक मानते हैं कि तेजस्वी अब बिहार की सक्रिय राजनीति से थोड़ा दूर होकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि मजबूत करना चाहते हैं। दिल्ली में रहकर केंद्र सरकार पर हमला करना और युवा नेतृत्व के रूप में उभरना उनकी नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ इसे ‘शिगूफा’ मान रहे हैं। उनका कहना है कि तेजस्वी खुद के चुनाव लड़ने की बात छेड़कर पार्टी के विधायकों को एकजुट रखना चाहते हैं, ताकि कोई बागी न बने। अगर वे राज्यसभा जाते हैं, तो रघोपुर सीट से उपचुनाव होगा, जहां नया चेहरा उतारा जा सकता है। लेकिन फिलहाल फोकस राज्यसभा पर है।
एनडीए की तरफ से भी हमले तेज हैं। JDU नेता संजय झा ने तंज कसा, “बिहार में संभावना नहीं दिख रही, इसलिए भाग रहे हैं क्या?” AIMIM ने अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है, जिससे गणित और जटिल हो गया है।
फैसला अंतिम दिनों में
आरजेडी की यह बैठक बिहार की सियासत के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर तेजस्वी यादव राज्यसभा जाते हैं, तो बिहार में विपक्ष के नेता का पद खाली होगा और पार्टी नया चेहरा तलाशेगी। अगर नहीं जाते, तो यह रणनीतिक चाल मानी जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च नजदीक है, और तब तक सियासी हलचल चरम पर रहेगी। बिहार की जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षक दोनों ही इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह महागठबंधन की एकता, भविष्य की रणनीति और राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा।
Sources: दैनिक जागरण