11 दिसंबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार झेलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के युवा नेता तेजस्वी यादव पर सियासी दबाव बढ़ता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी को खुली सलाह दी है कि वे विदेश यात्रा से लौटकर तत्काल बिहार का व्यापक भ्रमण शुरू करें। तिवारी का मानना है कि यह कदम न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि आरजेडी को आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मजबूत आधार देगा। यह सलाह पार्टी के आंतरिक कलह को दर्शाती है, जहां हार के बाद जिम्मेदारी तय करने की बहस तेज हो गई है।
शिवानंद तिवारी ने गुरुवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “तेजस्वी यादव हमारे भविष्य हैं, लेकिन चुनावी हार से सबक लेना जरूरी है। वे विदेश में हैं, जो ठीक है, लेकिन अब बिहार की धरती पर उतरकर कार्यकर्ताओं से जुड़ें। हर जिले का दौरा करें, युवाओं से बात करें और पार्टी की कमजोरियां दूर करें।” तिवारी ने याद दिलाया कि 2020 में तेजस्वी की अगुवाई में आरजेडी ने शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार गठबंधन की रणनीति और आंतरिक समन्वय की कमी ने नुकसान पहुंचाया। उन्होंने तेजस्वी को सुझाव दिया कि भ्रमण के दौरान स्थानीय मुद्दों जैसे बेरोजगारी, शिक्षा और कृषि पर फोकस करें, ताकि जनता का विश्वास बहाल हो।
यह सलाह राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिहार चुनावों में आरजेडी को महागठबंधन के बावजूद केवल 69 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए ने 167 सीटों पर कब्जा जमाया। हार के बाद तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी स्वीकार की थी, लेकिन उनकी विदेश यात्रा—जो कथित तौर पर परिवारिक मामलों से जुड़ी है—पर सवाल उठे हैं। पार्टी के अन्य नेता जैसे मनोज झा और मीसा भारती ने समर्थन जताया, लेकिन तिवारी जैसे बुजुर्ग नेता खुले तौर पर सुधार की मांग कर रहे हैं। तिवारी ने कहा, “पार्टी को नया विजन चाहिए। तेजस्वी अगर भ्रमण करेंगे, तो युवा कार्यकर्ता प्रेरित होंगे और हम 2029 के विधानसभा चुनाव में वापसी कर सकते हैं।”
आरजेडी की स्थापना से जुड़े तिवारी का राजनीतिक अनुभव गहरा है। वे लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे हैं और पार्टी की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी यह सलाह पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने का संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी को अब ‘युवा नेता’ से ‘मजबूत रणनीतिकार’ बनना होगा। बिहार की सियासत में यादव परिवार का प्रभाव अटल है, लेकिन हार ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। यदि तेजस्वी सलाह मानते हैं, तो यह पार्टी एकीकरण का संदेश देगा। अन्यथा, आंतरिक विद्रोह की आशंका बनी रहेगी।
बिहार की राजनीति हमेशा उतार-चढ़ाव वाली रही है। आरजेडी को अब महादलित, मुस्लिम और यादव वोट बैंक को एकजुट करने की जरूरत है। तिवारी की सलाह इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। क्या तेजस्वी लौटकर बिहार को नई ऊर्जा देंगे? आने वाले महीने इसका जवाब देंगे।