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6 जनवरी 2026, Purnia- आजकल साइबर अपराधों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, और इनमें से एक नया ट्रेंड ‘Digital Arrest’ का है, जहां ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। हाल ही में बिहार के Purnia जिले के कसबा इलाके में एक सेवानिवृत्त शिक्षक इस तरह की ठगी का शिकार बने। ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर 35 लाख रुपये ठग लिए। इस घटना का तार हरियाणा से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, और स्थानीय पुलिस जांच में जुटी हुई है। यह मामला न केवल पीड़ित के लिए दुखद है, बल्कि समाज में साइबर सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करता है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के विवरण, ठगी की विधि, पुलिस की कार्रवाई और इससे बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

घटना का विवरण

यह घटना करीब एक महीने पहले घटी, जब कसबा निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉलर ने खुद को दिल्ली साइबर सेल का SP बताते हुए कहा कि उनके बैंक खाते में गलत ट्रांजेक्शन हुआ है। पीड़ित से खाते के आखिरी चार अंकों की जानकारी मांगी गई। इसके बाद, ठग ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल किया, जहां वह पुलिस की वर्दी में नजर आया। उसने पीड़ित को सीबीआई जांच में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। डर के मारे शिक्षक ने ठग की बात मान ली और RTGS के माध्यम से 35 लाख रुपये एक ICICI बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। यह खाता एक ‘म्यूल अकाउंट’ था, यानी तीसरे पक्ष का खाता जो ठगी के पैसे को लॉन्डर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ठगी की विधि

ठगों ने बेहद चालाकी से काम लिया। पहले फोन पर गलत ट्रांजेक्शन की बात कही, फिर Digital Arrest का डर दिखाया। उन्होंने पीड़ित को बताया कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद से जुड़े मामले में आया है। OTP फॉरवर्ड करने वाली ऐप्स का इस्तेमाल करके पैसे निकाल लिए गए। कुल मिलाकर, ठगी के पैसे को करीब 400 बैंक खातों से ट्रांसफर किया गया, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो गई। इस तरह की ठगी में ठग अक्सर फर्जी आईडी बनाकर सोशल मीडिया या फोन का इस्तेमाल करते हैं, और पीड़ित को घर से बाहर न निकलने की सलाह देकर ‘Digital Arrest’ में रखते हैं। इस मामले में भी पीड़ित को कई दिनों तक फोन पर रखा गया, और उनकी पत्नी को भी CBI अधिकारी बनकर कॉल किया गया ताकि धोखा पुष्ट हो।

पीड़ित का अनुभव

सेवानिवृत्त शिक्षक, जो अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, ने बताया कि वे शिक्षण क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत थे और रिटायरमेंट के बाद शांत जीवन जी रहे थे। अचानक आए इस फोन ने उन्हें इतना डरा दिया कि उन्होंने बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें शक हुआ, तो उन्होंने ऑनलाइन शिकायत दर्ज की और Purnia साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया। इस घटना ने उनके परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से झकझोर दिया। वे कहते हैं कि अगर पहले से साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूकता होती, तो शायद यह टाला जा सकता था।

पुलिस जांच और कार्रवाई

शिकायत मिलते ही Purnia साइबर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने प्राप्त खाते में 2 लाख रुपये होल्ड कर लिए, और बाकी राशि की रिकवरी के प्रयास जारी हैं। साइबर स्टेशन हाउस ऑफिसर और DSP चंदन कुमार ठाकुर ने बताया कि एक टीम गठित की गई है जो आरोपी की गिरफ्तारी के लिए काम कर रही है। जांच में पता चला कि ठगी का मुख्य केंद्र हरियाणा में है, जहां से ऐसे कई गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस ने फोन नंबरों, बैंक डिटेल्स और IP एड्रेस की ट्रैकिंग शुरू की है। साथ ही, वे अन्य राज्यों की पुलिस से सहयोग ले रही हैं। अब तक, कुछ म्यूल अकाउंट्स की पहचान हो चुकी है, लेकिन ठगों की गिरफ्तारी बाकी है।

साइबर पुलिस की चुनौतियां

इस तरह के मामलों में पुलिस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ठग अक्सर विदेशी सर्वर या VPN का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ट्रैकिंग कठिन होती है। फिर भी, Purnia पुलिस ने हाल के महीनों में कई साइबर अपराधियों को पकड़ा है। वे जन जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं, जिसमें लोगों को अनजान कॉल्स से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।

साइबर फ्रॉड की बढ़ती समस्या

Digital Arrest जैसे फ्रॉड देशभर में फैल रहे हैं। हाल ही में गाजियाबाद में एक रिटायर्ड शिक्षिका से 35 लाख ठगे गए, जहां ठग ने 3 करोड़ की ठगी में कमीशन का डर दिखाया। इसी तरह, मिर्जापुर में एक शिक्षक से 92 लाख ठगे गए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2024 में साइबर फ्रॉड के मामले 20% बढ़े हैं। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग और शिक्षित लोग शिकार होते हैं, क्योंकि वे डिजिटल दुनिया में कम सतर्क रहते हैं। सरकार ने ‘साइबर दोस्त’ जैसे ऐप लॉन्च किए हैं, लेकिन जागरूकता की कमी बनी हुई है।

हरियाणा का कनेक्शन

इस मामले में ठगी का तार हरियाणा से जुड़ा है, जहां कई साइबर गिरोह सक्रिय हैं। हरियाणा पुलिस ने हाल में कई ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है, लेकिन नए गिरोह उभरते रहते हैं। ये गिरोह फर्जी सिम, फेक ID और म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं।

निष्कर्ष और बचाव के उपाय

यह घटना हमें सिखाती है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता जरूरी है। पीड़ित जैसे लोगों को न्याय मिलना चाहिए, और पुलिस की जांच से उम्मीद है कि आरोपी जल्द पकड़े जाएंगे। बचाव के लिए अनजान कॉल्स पर व्यक्तिगत जानकारी न दें, पुलिस अधिकारी बनकर आने वाले कॉल्स की जांच करें, और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें। जागरूकता अभियान चलाकर हम ऐसे अपराधों को कम कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह मामला साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्णता को रेखांकित करता है।

Sources: हिंदुस्तान

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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