2 फरवरी 2026, Rahul Gandhi ने पूर्व आर्मी चीफ नारावणे की अप्रकाशित मेमॉयर का हवाला दिया: संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान लोकसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा मच गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नारावणे (रिटायर्ड) की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ से अंश पढ़ने की कोशिश की। राहुल गांधी ने इन अंशों का हवाला देते हुए भारत-चीन सीमा विवाद, खासकर 2020 के गलवान स्टैंडऑफ पर सरकार को घेरने की कोशिश की। सत्ता पक्ष ने इसे संसदीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद सदन में कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
घटना की शुरुआत और पृष्ठभूमि
बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा चल रही थी। राहुल गांधी अपने भाषण की शुरुआत में ही रक्षा मामलों की ओर मुड़े और कहा, “यह आर्मी चीफ नारावणे की मेमॉयर से है… इससे पता चलेगा कि असली देशभक्त कौन है और कौन नहीं।” उन्होंने एक मैगजीन में प्रकाशित अंशों का जिक्र करते हुए 2020 के लद्दाख स्टैंडऑफ का उदाहरण दिया, जिसमें चीनी टैंकों के भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने की बात कही गई। राहुल का इशारा स्पष्ट था कि सरकार ने सीमा पर चीन की घुसपैठ को छिपाने की कोशिश की।
जनरल नारावणे 2019 से 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। उनकी अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में 2020 के भारत-चीन तनाव, गलवान घाटी संघर्ष और अन्य संवेदनशील सैन्य ऑपरेशंस का जिक्र है। कुछ अंश हाल ही में एक मैगजीन में प्रकाशित हुए थे, जिनमें सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं। यही अंश राहुल गांधी ने सदन में पढ़ने की कोशिश की।
सत्ता पक्ष का कड़ा विरोध
राहुल के बोलते ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खड़े हो गए और आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। मैगजीन कुछ भी छाप सकती है, लेकिन अप्रकाशित किताब से उद्धरण देना नियमों के खिलाफ है।” राजनाथ ने राहुल से किताब सदन में पेश करने को कहा और जोर दिया कि “मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह किताब प्रकाशित नहीं हुई है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने भी हस्तक्षेप किया और कहा, “जब किताब ही प्रकाशित नहीं हुई, तो उससे उद्धरण कैसे दिया जा सकता है?” सत्ता पक्ष के सांसदों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी स्पीकर का समर्थन करते हुए कहा कि मैगजीन या अखबार के लेखों से उद्धरण देना सदन के नियमों के विरुद्ध है।
स्पीकर की रूलिंग और राहुल का जवाब
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सत्ता पक्ष की आपत्ति को सही ठहराते हुए रूलिंग दी कि अप्रकाशित किताब या मैगजीन के अंशों से उद्धरण नहीं दिया जा सकता। स्पीकर ने राहुल को चेतावनी दी और आगे बढ़ने को कहा। हालांकि राहुल नहीं माने और बोले, “अगर उनमें डर नहीं है, तो मुझे पढ़ने दिया जाए। हर जवान जानता है कि आप क्या छिपा रहे हैं।”
इसके बाद सदन में हंगामा चरम पर पहुंच गया। विपक्षी सांसदों ने स्पीकर के फैसले का विरोध किया, जबकि सत्ता पक्ष ने राहुल पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। कार्यवाही कई बार स्थगित हुई और अंत में दिन भर के लिए टाल दी गई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद की गहराई
कांग्रेस ने स्पीकर के फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना था कि राहुल सत्य सामने ला रहे थे, लेकिन सरकार डर गई। दूसरी ओर, बीजेपी ने इसे विपक्ष की “राष्ट्रविरोधी” राजनीति करार दिया। किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को चीन को खुश करने की आदत है।
यह विवाद सिर्फ संसदीय नियमों तक सीमित नहीं है। नारावणे की किताब में 2020 के सीमा तनाव पर कई खुलासे हैं, जो सरकार के लिए असहज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस को नई दिशा दे सकता है।
निष्कर्ष
लोकसभा का यह हंगामा बजट सत्र की शुरुआत से ही राजनीतिक तनाव को उजागर करता है। एक ओर विपक्ष सरकार को सीमा मुद्दे पर घेरना चाहता है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष संसदीय मर्यादा का हवाला देकर बचाव कर रही है। सदन की कार्यवाही बाधित होने से बजट चर्चा प्रभावित हुई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, खासकर अगर किताब के और अंश सार्वजनिक होते हैं। देश की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस कैसे आगे बढ़ेगी।
Sources: लाइव मिंट