Rafah border crossing in Gaza reopensRafah border crossing in Gaza reopens

2 फरवरी 2026, Gaza में रफाह बॉर्डर क्रॉसिंग सीमित रूप से फिर खुली: गाजा पट्टी और मिस्र के बीच रफाह बॉर्डर क्रॉसिंग का सीमित रूप से पुनः खुलना युद्धग्रस्त गाजा के निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। लगभग दो वर्षों की बंदी के बाद 2 फरवरी 2026 को यह क्रॉसिंग पैदल यात्रियों के लिए दोनों दिशाओं में खोल दी गई। इजरायल की सख्त सुरक्षा जांच और संख्या सीमा के साथ यह कदम मुख्य रूप से गंभीर रूप से बीमार एवं घायल फिलिस्तीनियों को चिकित्सा के लिए बाहर निकलने और युद्ध से विस्थापित लोगों को वापस लौटने की अनुमति देता है। हालांकि यह पूर्ण खुलने जैसा नहीं है और मानवीय सहायता के प्रवेश पर अभी भी प्रतिबंध हैं, फिर भी यह सीजफायर समझौते की दिशा में एक सकारात्मक प्रगति मानी जा रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रफाह क्रॉसिंग गाजा की एकमात्र सीमा है जो सीधे इजरायल से नहीं जुड़ी। युद्ध से पहले यह फिलिस्तीनी और मिस्री अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित होती थी। मई 2024 में इजरायली सेना ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिसके बाद यह लगभग पूरी तरह बंद हो गई। इस बंदी ने गाजा को दुनिया से अलग-थलग कर दिया, जहां 20 लाख से अधिक लोग रहते हैं। युद्ध के दौरान हजारों फिलिस्तीनी मिस्र भागे थे, जबकि आवश्यक चिकित्सा और सहायता का प्रवाह रुक गया।

अक्टूबर 2025 में अमेरिका द्वारा ब्रोकर किए गए सीजफायर समझौते में रफाह के पुनः खुलने को प्रमुख शर्त शामिल किया गया था। इजरायल ने अंतिम बंधक की लाश बरामद होने के बाद इसे खोलने की सहमति दी। जनवरी 2026 के अंत में घोषणा हुई और 2 फरवरी को व्यावहारिक रूप से लागू कर दिया गया।

वर्तमान स्थिति और संचालन

इजरायली रक्षा बलों की समन्वय इकाई COGAT के अनुसार क्रॉसिंग केवल पैदल यात्रियों के लिए खुली है। दोनों देशों ने यात्रियों की संख्या पर कैप लगा दी है – प्रारंभिक दिनों में प्रतिदिन लगभग 150-200 लोग बाहर जा सकेंगे, जबकि 50 लोग गाजा लौट सकेंगे। मुख्य प्राथमिकता गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को दी जा रही है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार करीब 20,000 बच्चे और वयस्क विदेश में उन्नत चिकित्सा की प्रतीक्षा में हैं।

सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। यूरोपीय यूनियन की बॉर्डर असिस्टेंस मिशन (EUBAM) टीम फिलिस्तीनी पक्ष की निगरानी कर रही है। यात्रियों की सूची मिस्र को भेजी जाती है, जहां सुरक्षा जांच के बाद इजरायल अंतिम मंजूरी देता है। अभी तक मानवीय सहायता ट्रकों का प्रवेश नहीं हो रहा, जो गाजा की सबसे बड़ी जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गाजा को प्रतिदिन कम से कम 600 ट्रकों की सहायता चाहिए।

मानवीय प्रभाव

यह सीमित reopening हजारों परिवारों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है। युद्ध में गाजा के अस्पताल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, दवाइयां और उपकरणों की भारी कमी है। कैंसर, डायलिसिस और गंभीर चोटों के मरीज लंबे समय से इलाज का इंतजार कर रहे थे। अब कुछ सौ लोग पहले चरण में मिस्र के अस्पतालों में पहुंच सकेंगे।

वापस लौटने वाले लोग भी महत्वपूर्ण हैं। युद्ध के दौरान मिस्र या अन्य देशों में शरण लेने वाले फिलिस्तीनी अब घर लौट सकेंगे, हालांकि इजरायल ने स्पष्ट किया है कि बाहर जाने वालों की संख्या लौटने वालों से अधिक रखी जाएगी। इससे जनसांख्यिकीय बदलाव की आशंका भी जताई जा रही है।

मानवीय संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यह अपर्याप्त है। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) जैसे संगठनों पर भी इजरायल ने प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे स्थिति जटिल हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और चुनौतियां

इजरायल का कहना है कि सुरक्षा कारणों से सख्त नियंत्रण आवश्यक है। हमास ने इसे “अपर्याप्त” बताया और पूर्ण रूप से खोलने तथा सहायता प्रवेश की मांग की। मिस्र ने सहयोग किया है, लेकिन अपनी सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। अमेरिका ने इसे सीजफायर की सफलता बताया।

सबसे बड़ी चुनौती सहायता का प्रवेश है। गाजा में भोजन, पानी और ईंधन की भारी कमी है। यदि केवल लोग ही आ-जा सकें और सामान नहीं, तो मानवीय संकट बना रहेगा। इसके अलावा फिलाडेल्फी कॉरिडोर पर इजरायली नियंत्रण बना हुआ है, जो तस्करी रोकने के नाम पर रखा गया है।

भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यह “पायलट फेज” है। यदि प्रारंभिक दिनों में कोई सुरक्षा उल्लंघन नहीं हुआ तो संख्या बढ़ाई जा सकती है और सहायता ट्रकों को अनुमति मिल सकती है। हालांकि इजरायल की पोस्ट-वार रणनीति में रफाह का स्थायी नियंत्रण शामिल है, जिससे पूर्ण स्वतंत्र संचालन मुश्किल लगता है।

निष्कर्ष रूप में, रफाह क्रॉसिंग का यह सीमित पुनः खुलना गाजा के लिए उम्मीद की किरण जरूर है, लेकिन पूर्ण समाधान से दूर है। हजारों जिंदगियां इससे बच सकती हैं, परंतु युद्ध के मूल कारणों का समाधान और पूर्ण मानवीय पहुंच ही स्थायी शांति ला सकती है। दुनिया की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि यह कदम आगे बढ़ेगा या फिर सीमित रह जाएगा।

Sources: रॉयटर्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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