18 दिसंबर 2025 मध्य पूर्व में GAZA पट्टी का संघर्ष लंबे समय से वैश्विक शांति के लिए खतरा बना हुआ है। नवीनतम मोड़ में, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने इजरायल के बार-बार युद्धविराम उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी जारी की है। 17 दिसंबर 2025 को वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत के बाद दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि ये उल्लंघन न केवल मध्यस्थों को कठिन स्थिति में डाल रहे हैं, बल्कि पूरे गाजा समझौते को खतरे में डाल रहे हैं। कतर, जो अमेरिका और मिस्र के साथ मिलकर युद्धविराम का मध्यस्थ रहा है, ने दूसरे चरण की ओर तत्काल प्रगति की मांग की है। इस रिपोर्ट में हम इस बयान की पृष्ठभूमि, कारणों, प्रभावों और संभावित परिणामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
GAZA संघर्ष की पृष्ठभूमि: युद्धविराम का नाजुक संतुलन
GAZA पट्टी में इजरायल-हमास संघर्ष की जड़ें दशकों पुरानी हैं, लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद यह चरम पर पहुंच गया। इस हमले में 1,200 से अधिक इजरायलियों की मौत हुई, जिसके जवाब में इजरायल ने ‘आयरन स्वॉर्ड्स’ ऑपरेशन शुरू किया। गाजा में 40,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, और मानवीय संकट चरम पर है। नवंबर 2025 में, कतर, अमेरिका और मिस्र की मध्यस्थता से एक चरणबद्ध युद्धविराम समझौता हुआ, जिसमें पहले चरण में बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता और सीमित सैन्य वापसी शामिल थी।
हालांकि, समझौता लागू होने के बाद से इजरायल पर उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। दिसंबर 2025 में, इजरायली सेना ने GAZA के उत्तरी इलाकों में बमबारी और लक्षित हत्याएं जारी रखीं, जिससे दर्जनों नागरिक मारे गए। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद मोहम्मद अल अंसारी ने 2 दिसंबर को कहा कि ये उल्लंघन युद्धविराम की स्थिरता को खतरा पैदा कर रहे हैं। काहिरा में संयुक्त निगरानी कक्ष के माध्यम से मॉनिटरिंग हो रही है, लेकिन दैनिक उल्लंघन से समझौता कमजोर पड़ रहा है।
कतर का बयान: उल्लंघनों की कड़ी निंदा
शेख मोहम्मद का बयान वाशिंगटन में उच्च स्तरीय वार्ता के बाद आया, जहां उन्होंने रुबियो और अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों से GAZA पर चर्चा की। अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “ये उल्लंघन और देरी पूरे प्रक्रिया को खतरे में डाल रहे हैं और मध्यस्थों को कठिन स्थिति में डाल देते हैं।” उन्होंने जोर दिया कि मानवीय सहायता को बिना किसी शर्त के गाजा पहुंचना चाहिए, और दूसरे चरण—जिसमें इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और स्थायी शांति शामिल है—की ओर तुरंत कदम उठाए जाएं।
कतर ने स्पष्ट किया कि गाजा में प्रस्तावित ‘स्थिरता बल’ (स्टेबलाइजेशन फोर्स) एक पक्ष को दूसरे पर वरीयता न दे। शेख मोहम्मद ने कहा, “हम ऐसा स्थिरता बल नहीं चाहते जो एक पक्ष की रक्षा करे और दूसरे को नुकसान पहुंचाए।” यह बयान इजरायल के राफा सीमा क्रॉसिंग पर एकतरफा योजना की आलोचना से जुड़ा है, जहां इजरायल केवल फिलिस्तीनियों की निकासी की अनुमति देना चाहता है। कतर के अनुसार, वर्तमान स्थिति को ‘युद्धविराम’ नहीं माना जा सकता, क्योंकि इजरायली सेना की पूर्ण वापसी नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उल्लंघन जारी रहे, तो युद्ध फिर से भड़क सकता है।
यह बयान कतर की मध्यस्थ भूमिका को रेखांकित करता है। दोहा ने हमास और इजरायल दोनों से संपर्क बनाए रखा है, और अमेरिका के साथ सहयोग से बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की। लेकिन शेख मोहम्मद ने कहा कि इजरायल की बमबारी और हत्याएं क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा हैं।
उल्लंघनों के कारण: इजरायली नीति और राजनीतिक दबाव
इजरायल पर उल्लंघन के आरोपों की एक श्रृंखला है। 6 दिसंबर को कतर ने कहा कि गाजा युद्धविराम ‘क्रिटिकल मोमेंट’ पर है, और उल्लंघन से यह ढह सकता है। उदाहरण के लिए, इजरायली सेना ने उत्तरी गाजा में स्कूलों और अस्पतालों के पास हमले किए, जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गए। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रिपोर्ट जारी की कि बाढ़ से हुई मौतें रोकी जा सकती थीं, यदि इजरायली सेना ने बांधों पर नियंत्रण न किया होता।
इजरायल का तर्क है कि ये कार्रवाइयां ‘आतंकी ठिकानों’ पर हैं, लेकिन कतर और फिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि ये नागरिकों को निशाना बनाते हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव है, जहां दक्षिणपंथी गठबंधन युद्धविराम का विरोध करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में, मध्य पूर्व नीति में बदलाव की संभावना है, लेकिन रुबियो ने कतर को आश्वासन दिया कि अमेरिका दूसरे चरण के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रभाव: मानवीय संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता
ये उल्लंघन GAZA में मानवीय संकट को गहरा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 20 लाख से अधिक लोग विस्थापित हैं, और सर्दियों में भोजन, दवा और आश्रय की कमी से हजारों मौतें हो सकती हैं। कतर ने कहा कि सहायता की बाधा से ‘जनसंहार’ का खतरा बढ़ रहा है। क्षेत्रीय स्तर पर, लेबनान, सीरिया और यमन में तनाव बढ़ सकता है, क्योंकि हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर हमले तेज कर दिए हैं।
अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। GAZA की अर्थव्यवस्था पहले ही ध्वस्त हो चुकी है, और इजरायल के बंदरगाहों पर प्रतिबंध से व्यापार रुक गया है। कतर, जो गाजा में स्कूल और अस्पतालों का निर्माण कर रहा है, ने 2025 में 500 मिलियन डॉलर की सहायता दी, लेकिन उल्लंघन से यह बेकार जा रही है। वैश्विक स्तर पर, तेल कीमतें बढ़ रही हैं, और यूरोपीय संघ ने इजरायल पर दबाव बढ़ाया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: समर्थन और आलोचना
अमेरिका ने कतर के बयान का स्वागत किया, लेकिन इजरायल का बचाव भी किया। रुबियो ने कहा कि मध्यस्थों की बैठक जल्द होगी। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने दोहा फोरम में कतर का समर्थन किया, और आठ मुस्लिम देशों—मिस्र, जॉर्डन सहित—ने राफा योजना की निंदा की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उल्लंघनों की जांच की मांग की।
यूरोपीय संघ ने कहा कि युद्धविराम टूटने से शरणार्थी संकट बढ़ेगा। चीन और रूस ने इजरायल की आलोचना की, जबकि सऊदी अरब ने चुप्पी साधी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कतर के बयान को ‘साहसी’ बताया।
निष्कर्ष: शांति की राह में बाधाएं
कतर का बयान GAZA युद्धविराम को बचाने की कोशिश है, लेकिन इजरायली उल्लंघन से यह नाजुक हो गया है। दूसरे चरण की तत्काल जरूरत है—पूर्ण वापसी, सहायता और शांति। मध्यस्थों को मजबूत कदम उठाने होंगे, अन्यथा क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ेगा। कतर की भूमिका सराहनीय है, लेकिन वैश्विक दबाव जरूरी है। क्या यह बयान बदलाव लाएगा? समय बताएगा, लेकिन फिलिस्तीनियों का दर्द जारी रहेगा।