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19 दिसंबर 2025,Purnia : बिहार के Purnia जिले में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों पर कटे चालानों की वसूली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अनियमित वाहन परिचालन को लेकर रोजाना कटे जा रहे चालानों के मुकाबले महज 20 प्रतिशत ही जुर्माना वसूला जा सका है। जिले में औसतन प्रतिदिन 1.50 लाख रुपये का चालान जारी हो रहा है, लेकिन वाहन मालिकों की लापरवाही के कारण साल भर में करोड़ों रुपये का बकाया जमा हो गया है। इस स्थिति से न केवल सरकारी राजस्व प्रभावित हो रहा है, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। Purnia ट्रैफिक पुलिस ने अब सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है, जिसमें वाहन जब्ती, ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई और ऑनलाइन ट्रैकिंग को मजबूत करना शामिल है। यह मुद्दा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय है, जहां ई-चालान के लंबित बकाये 9,000 करोड़ रुपये को पार कर चुके हैं।

समस्या की जड़: लापरवाही और जागरूकता की कमी

Purnia जैसे सीमांचल के व्यस्त जिले में सड़कें हमेशा भीड़भाड़ से भरी रहती हैं। यहां दैनिक यातायात में हजारों वाहन- दोपहिया से लेकर भारी वाहन तक- शामिल होते हैं। लेकिन ट्रैफिक नियमों का पालन करने में वाहन मालिकों की सुस्ती साफ दिखाई देती है। एक वाहन पर कई चालान लंबित रहते हैं, और कई मामलों में ये चालान एक साल से अधिक पुराने हो चुके हैं। वाहन मालिक निश्चिंत होकर बकायेदार वाहनों को सड़कों पर दौड़ाते रहते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

ट्रैफिक डीएसपी कौशल किशोर कमल ने बताया, “बकायेदार चालानों के साथ सड़क पर घूमते वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। इस साल करीब 50 वाहनों को जब्त कर फाइन जमा करवाया गया। इसके अलावा, जिन छह वाहन मालिकों के वाहनों पर बार-बार चालान कटे हैं, उनके ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो रही है। इससे लोग अब पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं।” लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। जिले में कुल जारी चालानों के विरुद्ध केवल 20 प्रतिशत वसूली होना चिंताजनक है। यदि यही ट्रेंड चला तो सालाना करोड़ों का नुकसान होगा, जो सड़क सुधार योजनाओं के लिए आवंटित बजट को प्रभावित करेगा।

इस लापरवाही के पीछे कई कारण हैं। प्राथमिक रूप से, जागरूकता की कमी प्रमुख है। कई वाहन मालिकों को ई-चालान की प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं। वे पारंपरिक तरीके से जुर्माना भरने की उम्मीद करते रहते हैं, जबकि अब सब कुछ डिजिटल हो चुका है। दूसरा, आर्थिक दबाव: छोटे व्यापारी या ग्रामीण चालक छोटे-मोटे चालानों को नजरअंदाज कर देते हैं, सोचते हैं कि ‘कभी न कभी तो भर देंगे’। तीसरा, प्रवर्तन में ढिलाई: पहले चालान काटने के बाद फॉलो-अप कमजोर रहा है। लेकिन अब बदलाव आ रहा है। पूर्णिया एसपी स्वीटी सहरावत के निर्देश पर वाहन जांच अभियान तेज हो गया है, जिसमें हाल ही में एक ही दिन में 2.82 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।

आंकड़ों की पड़ताल: स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर तक

Purnia में स्थिति स्थानीय स्तर पर गंभीर है, लेकिन यह राष्ट्रीय समस्या का हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में पूरे भारत में ई-चालान से वसूली घटकर 3,834 करोड़ रुपये रह गई, जो 2023 के 4,150 करोड़ से कम है। कुल लंबित बकाया 9,097 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल के 6,654 करोड़ से 36 प्रतिशत अधिक है। वसूली दर महज 30 प्रतिशत रह गई, जबकि पहले 40-50 प्रतिशत थी। बिहार में भी यही ट्रेंड है, जहां ट्रैफिक उल्लंघनों के कारण सड़क दुर्घटनाएं 15 प्रतिशत बढ़ी हैं।

Purnia जिले के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। पिछले एक वर्ष में ट्रैफिक पुलिस ने करीब 5 करोड़ रुपये के चालान जारी किए, लेकिन वसूली केवल 1 करोड़ के आसपास हुई। प्रमुख उल्लंघन: बिना हेलमेट चलाना (40 प्रतिशत चालान), ओवरस्पीडिंग (25 प्रतिशत), और दस्तावेजों की कमी (20 प्रतिशत)। इनमें से अधिकांश दोपहिया वाहनों से जुड़े हैं, जो जिले की 70 प्रतिशत ट्रैफिक हिस्सा हैं। ग्रामीण इलाकों जैसे बनमनखी, धमदाहा और अमौर में वसूली और भी कम है, क्योंकि वहां ई-चालान जागरूकता अभियान कमजोर हैं।

नीचे दी गई तालिका में भारत के प्रमुख राज्यों में सामान्य ट्रैफिक उल्लंघनों के जुर्माने दिए गए हैं (2025 नियमों के अनुसार), जो Purnia जैसे जिलों में लागू हैं:

उल्लंघन का प्रकारजुर्माना राशि (उत्तर प्रदेश/बिहार समान)टिप्पणी
बिना लाइसेंस चलाना₹5,000लाइसेंस निलंबन संभव
बिना हेलमेट चलाना₹1,000दोबारा ₹2,000
ओवरस्पीडिंग₹1,000-₹5,000रडार आधारित
लाल बत्ती तोड़ना₹1,000कोर्ट केस यदि दोबारा
नशे में ड्राइविंग₹10,000 + 6 माह जेलसख्त कानूनी कार्रवाई
बिना बीमा चलाना₹2,000वाहन जब्ती
प्रदूषण प्रमाण-पत्र न होना₹10,000पर्यावरण नियम
गलत पार्किंग₹500टोइंग शुल्क अतिरिक्त

ये जुर्माने मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के तहत हैं, जो 2025 में और सख्त हुए हैं। बिहार सरकार ने हाल ही में 1 मार्च 2025 से लागू नए नियमों में जुर्माने दोगुने कर दिए हैं, ताकि सड़क सुरक्षा मजबूत हो।

प्रशासन की सख्ती: नए कदम और चुनौतियां

Purnia प्रशासन ने अब कमर कस ली है। ट्रैफिक डीएसपी के अनुसार, बकायेदार वाहनों पर सीजिंग अभियान तेज होगा। इसके अलावा, ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। ई-चालान पोर्टल (parivahan.gov.in) पर रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम लागू होगा, जहां वाहन मालिकों को एसएमएस के जरिए चालान की सूचना मिलेगी। 13 दिसंबर 2025 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सैकड़ों चालान निपटाए गए, लेकिन वाहन चालकों ने भारी जुर्माने पर विरोध प्रदर्शन भी किया। डीटीओ शंकर शरण ओमी ने कहा, “लोक अदालत से अधिक से अधिक मामलों का निपटारा होगा, लेकिन सख्ती अनिवार्य है। ट्रैफिक नियमों का पालन न करने से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।”

राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। ई-चालान वसूली बढ़ाने के लिए पेंडिंग ड्यूज कम करने पर जोर है। बिहार में पटना हाईकोर्ट ने मनमाने चालान काटने पर सख्ती बरतने का आदेश दिया है, ताकि अवैध वसूली रुके। पूर्णिया में हाल ही में एक एएसआई को अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो ओपी प्रभारी को भी निलंबित कर दिया गया। यह घटना ट्रैफिक प्रवर्तन की पारदर्शिता पर सवाल खड़ी करती है।

सड़क सुरक्षा पर प्रभाव: एक व्यापक खतरा

कम वसूली का सबसे बड़ा नुकसान सड़क सुरक्षा को हो रहा है। Purnia में 2025 में अब तक 200 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 50 से ज्यादा मौतें बकायेदार चालानों से जुड़ी वाहनों की वजह से। ओवरस्पीडिंग और बिना हेलमेट चलाने जैसे उल्लंघन आम हैं, जो छोटे चालानों से शुरू होकर बड़ी त्रासदी बन जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वसूली 50 प्रतिशत हो जाए, तो नियम पालन बढ़ेगा और दुर्घटनाएं 20 प्रतिशत कम हो सकती हैं। महिला चालकों और ग्रामीण युवाओं में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

समाजिक संगठनों ने मांग की है कि स्कूलों और कॉलेजों में ट्रैफिक जागरूकता कैंप लगाए जाएं। साथ ही, ई-चालान ऐप को सरल बनाया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़े। Purnia चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी वाहन मालिकों से अपील की है कि चालान समय पर भरें, वरना व्यापार प्रभावित होगा।

निष्कर्ष: जागरूकता और सख्ती का संतुलन जरूरी

Purnia में ट्रैफिक चालान वसूली की समस्या केवल आर्थिक नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का मुद्दा है। 20 प्रतिशत वसूली दर को सुधारने के लिए प्रशासन की सख्ती सराहनीय है, लेकिन जागरूकता अभियान बिना इसके अधूरा रहेगा। वाहन मालिकों को समझना होगा कि जुर्माना भरना उनकी जिम्मेदारी है, जो सुरक्षित सड़कों का आधार बनेगा। यदि ये कदम सफल हुए, तो पूर्णिया न केवल राजस्व में मजबूत होगा, बल्कि बिहार का एक सुरक्षित ट्रैफिक मॉडल भी बन सकता है। सरकार को ई-चालान सिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में काम तेज करना चाहिए। आखिरकार, सड़कें तेज गति की नहीं, सुरक्षित यात्रा की हैं।

By SHAHID

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