7 मार्च 2026, Purnia जिला नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग में देश में दूसरे स्थान पर: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के जिला पूर्णिया ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme – ADP) की हालिया डेल्टा रैंकिंग में पूर्णिया ने देश के 112 आकांक्षी जिलों में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार के मजबूत नेतृत्व और पूरी टीम के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। नीति आयोग ने सितंबर 2025 की डेल्टा रैंकिंग (जो हाल में जारी हुई) में पूर्णिया के सभी प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार को मान्यता दी है।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम क्या है?
नीति आयोग द्वारा जनवरी 2018 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम देश के सबसे कम विकसित 112 जिलों को तेजी से विकसित करने पर केंद्रित है। कार्यक्रम के तहत पांच प्रमुख क्षेत्रों—स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास, और बुनियादी अवसंरचना—में 49 प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPIs) पर मासिक आधार पर प्रगति मापी जाती है। डेल्टा रैंकिंग इन संकेतकों में हुई वृद्धिशील (incremental) सुधार को मापती है, जो जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा और सहयोग को बढ़ावा देती है।
पूर्णिया, जो पहले कम विकसित जिलों में शुमार था, अब इस कार्यक्रम के तहत ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ की सूची में शामिल हो गया है। जिला प्रशासन ने Champions of Change Dashboard पर डेटा के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और सुधार सुनिश्चित किए।
पूर्णिया की सफलता के प्रमुख कारण
जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार (2016 बैच के आईएएस अधिकारी) के नेतृत्व में पूर्णिया ने हर क्षेत्र में असाधारण प्रगति की:
- स्वास्थ्य एवं पोषण: एनीमिया, कुपोषण और टीकाकरण कवरेज में बड़ा सुधार। आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत किया गया, पोषण ट्रैकिंग ऐप का प्रभावी उपयोग हुआ। जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई।
- शिक्षा: स्कूलों में नामांकन, उपस्थिति और ड्रॉपआउट दर में सुधार। डिजिटल शिक्षा, मिड-डे मील की गुणवत्ता और लड़कियों की शिक्षा पर विशेष फोकस। कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास और लाइब्रेरी स्थापित की गईं।
- कृषि एवं जल संसाधन: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधीकरण और किसान क्रेडिट कार्ड वितरण में तेजी। पूर्णिया की उपजाऊ भूमि का बेहतर उपयोग, जैविक खेती को बढ़ावा।
- वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास: जन धन खाते, मुद्रा लोन और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाखों लाभार्थी जुड़े। युवाओं के लिए स्किल सेंटर स्थापित, रोजगार मेलों का आयोजन।
- बुनियादी अवसंरचना: सड़कें, बिजली, पानी और शौचालय निर्माण में तेजी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ प्लस स्थिति हासिल, ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइटिंग और पेयजल योजनाएं।
इन सभी संकेतकों में पूर्णिया ने औसत से ऊपर प्रदर्शन किया, जिससे डेल्टा स्कोर में भारी उछाल आया। DM अंशुल कुमार ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह सफलता पूर्णिया के लोगों, अधिकारियों और भागीदारों की सामूहिक मेहनत है। हमारा लक्ष्य पहले स्थान पर पहुंचना है।”
सीमांचल क्षेत्र में पूर्णिया का योगदान
सीमांचल (पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार) के अन्य जिलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है—अररिया 6वें और कुछ अन्य 7वें स्थान पर। लेकिन पूर्णिया की यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। नेपाल बॉर्डर पर स्थित होने के बावजूद जिले ने घुसपैठ, बाढ़ और सामाजिक चुनौतियों के बीच विकास को प्राथमिकता दी।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
DM अंशुल कुमार ने बताया कि अब फोकस सतत विकास पर है। आगामी महीनों में स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा गुणवत्ता सुधार और कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर रहेगा। नीति आयोग की रैंकिंग से मिलने वाली अतिरिक्त फंडिंग और संसाधन का उपयोग किया जाएगा।
यह उपलब्धि बिहार सरकार और केंद्र की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। पूर्णिया अब अन्य जिलों के लिए मॉडल बन रहा है।
नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंचना पूर्णिया के लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह दिखाता है कि मजबूत प्रशासन, डेटा-आधारित निर्णय और जन-भागीदारी से कम विकसित क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। जिला प्रशासन को बधाई—पूर्णिया अब ‘आकांक्षी’ से ‘सफल’ जिले की श्रेणी में आ चुका है।
Sources: नीति आयोग वेबसाइट