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9 जनवरी 2026, Iran में विरोध प्रदर्शन तेज: Iran में आर्थिक संकट से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल गए हैं और राजनीतिक रंग ले चुके हैं। रियाल मुद्रा के मूल्य में भारी गिरावट से गुस्साए दुकानदारों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू किए, जो अब इस्लामिक रिपब्लिक व्यवस्था के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। यह प्रदर्शन 2022-23 के महसा अमिनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा चुनौती बन गया है। सरकार ने जवाब में पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया, अस्पतालों पर छापे मारकर घायल प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और न्यायपालिका प्रमुख ने “कड़ी सजा” की धमकी दी है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 50 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और 2200 से ज्यादा गिरफ्तार हुए हैं। यह रिपोर्ट स्थिति की गंभीरता, कारणों, सरकार की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा करती है।

प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए, जहां दुकानदार रियाल के मूल्य में गिरावट से आक्रोशित थे। जल्द ही यह आंदोलन पूरे देश के 31 प्रांतों में फैल गया। लोग “मौत तानाशाह को” जैसे नारे लगा रहे हैं और व्यवस्था परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। जेन Z युवा इस आंदोलन की रीढ़ हैं, जिन पर 2022-23 के प्रदर्शनों का गहरा असर है। आर्थिक संकट, बेरोजगारी, मुद्रास्फीति और विदेशी नीतियों की वजह से आम जनता में गुस्सा भरा हुआ है।

प्रदर्शनों के प्रमुख कारण

आर्थिक संकट और मुद्रा का अवमूल्यन

रियाल का मूल्य डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम नागरिक जीवन-यापन करने में असमर्थ हैं। तेहरान के दुकानदारों ने सबसे पहले हड़ताल की और सड़कों पर उतरे।

राजनीतिक असंतोष और व्यवस्था विरोध

आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ आंदोलन अब “डेथ टू डिक्टेटर” जैसे नारों में बदल गया है। लोग सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और पूरी इस्लामिक व्यवस्था के खिलाफ हैं। महिलाएं, छात्र और पेंशनभोगी भी बड़े संख्या में शामिल हैं।

सरकार की दमनकारी कार्रवाई

पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट

8 जनवरी की शाम से पूरे Iran में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप हैं। नेटब्लॉक्स ने इसे “नियर-नेशनवाइड ब्लैकआउट” बताया है। सरकार का मकसद प्रदर्शनों की जानकारी बाहर न आने देना और संगठन को रोकना है। पिछले बड़े ब्लैकआउट में 1500 लोग मारे गए थे।

अस्पतालों पर छापे और घायलों की गिरफ्तारी

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, सुरक्षा बल इमाम खोमैनी अस्पताल सहित कई अस्पतालों में घुसकर आंसू गैस और शॉटगन का इस्तेमाल कर रहे हैं। घायल प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है ताकि मौतों का आंकड़ा छिपाया जा सके।

न्यायपालिका प्रमुख और खामेनेई की धमकी

न्यायपालिका प्रमुख घोलामहोसैन मोहसेनी-एजेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी “अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं” और उन्हें कड़ी सजा मिलेगी। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने पहली बार प्रदर्शनों पर बयान देते हुए कहा कि “वंडल्स” और “सेबोटर्स” हैं जो ट्रंप को खुश करने के लिए सड़कें बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार पीछे नहीं हटेगी।

मौतों का आंकड़ा और मानवाधिकार उल्लंघन

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 50 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों के 4-5 सदस्य भी मारे गए। 2200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। लॉर्डेगन शहर में दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या की रिपोर्ट है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ट्रंप की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर Iran ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारा तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा। खामेनेई ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से रंगे हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने ट्रंप से हस्तक्षेप की अपील की है।

भविष्य की आशंका

यह आंदोलन अभी लीडरलेस है, लेकिन तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद लोग सड़कों पर हैं। अगर सरकार ने और दमन किया तो यह 2022-23 जैसे बड़े विद्रोह में बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक संकट व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। दुनिया की निगाहें Iran पर टिकी हैं कि क्या यह इस्लामिक रिपब्लिक के अंत की शुरुआत है।

Sources: अल जज़ीरा, रॉयटर्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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