power supply disrupted in katiharpower supply disrupted in katihar

3 जनवरी 2026, Katihar– बिहार के Katihar जिले में नई साल की शुरुआत ही बिजली संकट के साये में हो गई है। उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के तहत आने वाले बरारी और मनिहारी प्रखंडों में 3 से 10 जनवरी तक मरम्मत कार्य के कारण विद्युत आपूर्ति कई घंटों के लिए बाधित रहेगी। यह घोषणा जिले के लाखों उपभोक्ताओं के लिए झटके जैसी है, खासकर सर्दी के इन दिनों में जब बिजली ही जीवनरेखा बन जाती है। गुस्साए ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा की है, जबकि शहरी इलाकों में भी व्यापार और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इस रिपोर्ट में हम इस बाधा के कारणों, प्रभावों, उपभोक्ताओं की परेशानियों और विभाग की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो बिहार के ग्रामीण विद्युत नेटवर्क की पुरानी समस्याओं को फिर से उजागर कर रही है।

मरम्मत कार्य का कारण: पुरानी लाइनों का अपग्रेड और सुरक्षा उपाय

Katihar जिले का विद्युत नेटवर्क लंबे समय से जर्जर हालत में है। NBPDCL के अधिकारियों के अनुसार, बरारी और मनिहारी में चल रहे मरम्मत कार्य का मुख्य उद्देश्य 33 केवी और 11 केवी की पुरानी लाइनों को मजबूत करना है। इन इलाकों में हाल के महीनों में बार-बार ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन की घटनाएं हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी हुई। एक अधिकारी ने बताया, “यह कार्य 132/33 केवी सब-स्टेशन के अपग्रेड का हिस्सा है, जो दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था। मरम्मत के दौरान सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक औसतन 4-6 घंटे की कटौती होगी।” यह जानकारी KBC न्यूज कटिहार की रिपोर्ट में भी सामने आई है, जहां कहा गया कि कार्य पूरा होने से लगभग तीन लाख उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिलेगी।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब Katihar में ऐसी कटौती हो रही है। दिसंबर 2025 में मनिहारी में विद्युत लाइन अपग्रेड के लिए 22 दिसंबर तक काम चला था, लेकिन अब जनवरी में फिर वही समस्या। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़-प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां की इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। गंगा और महानंदा नदियों के किनारे बसे ये प्रखंड बिजली के खंभों और तारों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलते हैं। एक इंजीनियर ने कहा, “सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है, लेकिन पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था की कमी उपभोक्ताओं को और परेशान कर रही है।”

प्रभावित क्षेत्र: बरारी और मनिहारी के ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा मार

बरारी प्रखंड, जो Katihar शहर से सटा हुआ है, में करीब 50 हजार परिवार प्रभावित होंगे। यहां के गांव जैसे घोषरामा, हायाघाट और अमदाबाद में कटौती से स्कूल, अस्पताल और छोटे उद्योग ठप हो जाएंगे। इसी तरह, मनिहारी प्रखंड के धुरियाही, मूसापुर और कोढ़ा जैसे इलाकों में किसान सिंचाई प्रभावित हो रही है। जनवरी का महीना फसल बोने का समय है, और बिना बिजली के पंप चलाना मुश्किल। एक किसान रामलाल महतो ने बताया, “रात में हीटर के बिना सर्दी काटना पड़ रहा है, और दिन में काम रुक गया। विभाग ने सूचना तो दी, लेकिन जेनरेटर की व्यवस्था कहां?”

शहरी Katihar में भी असर दिख रहा है। नगर पंचायत क्षेत्र में पहले से ही अनियमित आपूर्ति की शिकायतें हैं, और अब यह कटौती अतिरिक्त बोझ डाल रही है। दिसंबर में ही मनिहारी-Katihar सड़क पर बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों ने जाम लगाया था, जो इसकी पुनरावृत्ति का संकेत है। आंकड़ों के मुताबिक, कटिहार जिले में औसतन 20% उपभोक्ता ग्रामीण हैं, जिनकी निर्भरता बिजली पर सबसे ज्यादा है। कोविड के बाद बढ़े डिजिटल कार्यों ने समस्या को और गंभीर बना दिया है – वर्क फ्रॉम होम करने वाले युवा और ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

उपभोक्ताओं की नाराजगी: सोशल मीडिया पर उबाल, विभाग पर सवाल

उपभोक्ताओं का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #KatiharBijliKatoti ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग NBPDCL के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। एक पोस्ट में लिखा गया, “सर्दी में अंधेरे में रहने को मजबूर कर दिया। मरम्मत तो ठीक, लेकिन पहले वैकल्पिक लाइन क्यों नहीं?” मनिहारी के एक व्यापारी ने कहा, “दुकानें बंद, फ्रिज खराब, नुकसान हजारों में। विभाग को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” हाल ही में कोढ़ा प्रखंड में बिजली की लापरवाही से 28 मवेशियों की मौत हो गई थी, जो उपभोक्ताओं के डर को बढ़ा रही है।

कई संगठनों ने DM Katihar से हस्तक्षेप की मांग की है। बिहार विद्युत उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष ने कहा, “यह कटौती पूर्वानुमानित थी, फिर भी योजना क्यों नहीं? दरभंगा जैसे जिलों में समान समस्या पर 7 घंटे की सीमित कटौती की गई, यहां 8 दिनों का नोटिस?”

विभाग की प्रतिक्रिया: वैकल्पिक व्यवस्था और अपील

NBPDCL ने एक एडवाइजरी जारी कर कहा है, “मरम्मत कार्य समयबद्ध पूरा किया जाएगा। उपभोक्ताओं से अपील है कि जेनरेटर, इन्वर्टर या सोलर लाइट का उपयोग करें। हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज करें।” लेकिन आलोचना हो रही है कि वैकल्पिक पावर बैकअप की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कमजोर है। विभाग ने वादा किया है कि 10 जनवरी के बाद आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, और लो-वोल्टेज की समस्या भी दूर होगी।

सरकार की ओर से बिजली बिल राहत योजनाओं का विस्तार हुआ है – जैसे उत्तर प्रदेश में 3 जनवरी तक OTS स्कीम बढ़ाई गई – लेकिन बिहार में अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि स्मार्ट ग्रिड और रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस जरूरी है।

सलाह: उपभोक्ता कैसे संभालें यह संकट

उपभोक्ताओं को सलाह है कि मोबाइल चार्जर, लैपटॉप बैकअप और LED बल्ब का उपयोग करें। किसानों के लिए डीजल पंप की व्यवस्था करें, और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क लें। IRCTC जैसी ऐप्स पर ट्रेनों में देरी न हो, इसका ध्यान रखें। लंबे समय के लिए, सोलर सब्सिडी स्कीम का लाभ उठाएं।

निष्कर्ष: बिजली संकट से सबक, बेहतर भविष्य की ओर

यह कटौती Katihar की विकास यात्रा में एक बाधा है, लेकिन मरम्मत से स्थायी सुधार की उम्मीद है। सरकार और विभाग को उपभोक्ता-केंद्रित नीतियां अपनानी होंगी। सर्दी की कड़ाके में अंधेरा न सहना पड़े, इसके लिए त्वरित कार्रवाई जरूरी। कटिहारवासी धैर्य रखें, लेकिन आवाज भी बुलंद करें। क्या यह संकट बिजली क्षेत्र में क्रांति लाएगा? समय बताएगा।

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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