Purnia PolicePurnia Police

1 फरवरी 2026, Purnia में पुलिस की लापरवाही उजागर: बिहार के पूर्णिया जिले में पुलिस प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भागलपुर जोन के आईजी विवेकानंद ने केनगर थानाध्यक्ष मुन्ना पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन का कारण एक 18 वर्षीय मूक-बधिर (दिव्यांग) युवक की गुमशुदगी के मामले में घोर लापरवाही है। युवक की मां द्वारा थाने में लिखित शिकायत देने के बावजूद एक महीने तक FIR दर्ज नहीं की गई। यह मामला आईजी की जनसुनवाई में सामने आने के बाद उजागर हुआ, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। साथ ही, थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

घटना का पूरा विवरण

मामला केनगर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़ित युवक का नाम किशन कुमार है, जो 18 वर्षीय मूक-बधिर दिव्यांग है। वह 29 दिसंबर 2025 को अचानक घर से लापता हो गया। परेशान मां चैती देवी ने अगले दिन यानी 30 दिसंबर 2025 को केनगर थाने में पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बेटे के लापता होने की पूरी जानकारी दी और तलाश के साथ-साथ FIR दर्ज करने की मांग की।

हालांकि, थानाध्यक्ष मुन्ना पटेल ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। एक महीने बीत जाने के बावजूद 30 जनवरी 2026 तक FIR दर्ज नहीं की गई। मां बार-बार थाने का चक्कर लगाती रहीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार, हताश होकर चैती देवी आईजी विवेकानंद की जनता दरबार में पहुंचीं। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने अपनी पूरी व्यथा सुनाई और बताया कि थानाध्यक्ष ने उनका आवेदन जेब में रखकर घूमते रहे, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया।

आईजी की सख्त कार्रवाई और कारण

आईजी विवेकानंद ने शिकायत सुनते ही इसे बेहद गंभीर माना। उन्होंने कहा कि गुमशुदगी के मामलों में तुरंत FIR दर्ज करना अनिवार्य है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हिस्सा है। थानाध्यक्ष की यह लापरवाही न केवल कर्तव्यहीनता है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का खुला उल्लंघन भी है। आईजी ने तत्काल प्रभाव से मुन्ना पटेल को निलंबित करने का आदेश दिया और विभागीय जांच के निर्देश जारी किए। जांच में लापरवाही की गहराई पता लगाई जाएगी, और दोष सिद्ध होने पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।

पूर्णिया की एसपी स्वीती सहरावत ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पटना से लौटने के बाद औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा। फिलहाल, केनगर थाने की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को सौंपी गई है। एसपी ने कहा कि पुलिस प्रशासन जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और पुलिस की जिम्मेदारी

गुमशुदगी के मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी संज्ञेय अपराध की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज की जानी चाहिए। खासकर दिव्यांग, बच्चे या महिलाओं से जुड़े मामलों में देरी घातक साबित हो सकती है। इस मामले में एक महीने की देरी से न केवल जांच प्रभावित हुई, बल्कि पीड़ित परिवार का विश्वास भी डगमगाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामले पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। पूर्णिया जैसे क्षेत्र में जहां अपराध और गुमशुदगी के मामले आम हैं, थानाध्यक्ष स्तर पर ऐसी लापरवाही जनता में भय और असुरक्षा पैदा करती है। दिव्यांग व्यक्ति की गुमशुदगी में त्वरित कार्रवाई न होना मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है।

स्थानीय स्तर पर प्रभाव और लोगों की प्रतिक्रिया

खबर फैलते ही पूर्णिया और केनगर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। स्थानीय लोग इसे पुलिस सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि आईजी की जनसुनवाई जैसे मंच पीड़ितों के लिए वरदान हैं, वरना छोटे थानों में शिकायतें दबकर रह जाती हैं। वहीं, कुछ ने पुलिस की ट्रेनिंग और संवेदनशीलता पर सवाल उठाए। दिव्यांग परिवारों ने राहत की सांस ली और उम्मीद जताई कि अब उनके बेटे की तलाश तेज होगी।

पूर्णिया जिला पुलिस अब इस मामले में सक्रिय हो गई है। युवक की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं, और आसपास के जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है। अगर युवक का कोई सुराग मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी।

पुलिस प्रशासन में अनुशासन की मिसाल

यह कार्रवाई बिहार पुलिस के लिए एक मिसाल है। हाल के वर्षों में लापरवाही के कई मामलों में सख्ती दिखाई गई है, जिससे पुलिस की छवि सुधारने की कोशिश हो रही है। आईजी विवेकानंद की यह त्वरित कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए सबक है कि जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।

केनगर थानाध्यक्ष के निलंबन से एक बार फिर साबित हुआ कि कानून सबके लिए बराबर है। दिव्यांग युवक किशन कुमार की जल्द वापसी की उम्मीद है, और यह मामला पुलिस को अधिक संवेदनशील बनाने का काम करेगा। पीड़ित मां चैती देवी की हिम्मत ने न केवल न्याय दिलाया, बल्कि पूरे सिस्टम को झकझोरा। उम्मीद है कि विभागीय जांच जल्द पूरी होगी और दोषियों को सजा मिलेगी।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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