18 जनवरी 2026, पटना NEET छात्रा मौत मामला: बिहार की राजधानी पटना में एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। जहानाबाद जिले की रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर क्षेत्र स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी 2026 को वह अपने कमरे में बेहोश पाई गई, जिसके बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया गया है, जिसके बाद परिवार ने गैंगरेप और हत्या का आरोप लगाया है। इस मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है, जहां सांसद पप्पू यादव ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है।
घटना की शुरुआत और परिवार के दावे
छात्रा 5 जनवरी को अपने पैतृक गांव जहानाबाद से पटना लौटी थी। परिवार के अनुसार, उस रात करीब 9 बजे मां-पिता से उसकी आखिरी बात हुई थी। अगले दिन वह बेहोश मिली। हॉस्टल स्टाफ ने उसे कदमकुआं क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत बिगड़ती गई। परिवार का दावा है कि अस्पताल में होश में आने पर छात्रा ने अपनी मां को रोते हुए बताया कि उसके साथ ‘गलत हुआ है’ यानी रेप किया गया। वह और जानकारी दे रही थी कि अस्पताल कर्मियों ने मां को बाहर कर दिया और छात्रा को बेहोशी की इंजेक्शन दे दिया।
मृतका के पिता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हॉस्टल संचालक श्रवण अग्रवाल, उनकी पत्नी नीलम अग्रवाल और भवन मालिक मनीष कुमार रंजन मिलकर अवैध गतिविधियां चलाते हैं। छात्रा उनके जाल में फंसकर शिकार हुई। पिता ने पुलिस पर लीपापोती का आरोप लगाया और दावा किया कि मामले को दबाने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से 15 लाख रुपये तक का ऑफर दिया गया। उन्होंने कहा, “पुलिस और हॉस्टल-अस्पताल पक्ष मिले हुए हैं। मेरी बेटी को न्याय नहीं मिला तो मैं लड़ता रहूंगा।” परिवार ने पटना पुलिस पर भरोसा न होने की बात कहते हुए CBI जांच की मांग की है।
छात्रा एक मेधावी लड़की थी, जिसका सपना AIIMS दिल्ली में डॉक्टर बनना था। पिछले साल NEET में कुछ अंकों से चूक गई थी, लेकिन अवसाद में होने के कोई संकेत नहीं थे।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोले राज
शुरू में पुलिस ने मामले को आत्महत्या का बताया, दावा किया कि छात्रा के मोबाइल में नींद की गोलियों के ओवरडोज और सुसाइड से जुड़े वीडियो सर्च मिले। कमरे से गोलियां भी बरामद हुईं। लेकिन मेडिकल बोर्ड द्वारा कराए गए पोस्टमॉर्टम में शरीर पर कई चोट के निशान मिले और रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि ‘यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता’। इससे पुलिस के शुरुआती दावों पर सवाल उठे और मामला गंभीर हो गया।
परिजनों ने शव के साथ कारगिल चौक पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया, पुलिस से झड़प हुई। कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया।
पुलिस और SIT की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने SIT का गठन किया। टीम ने सहज सर्जरी नर्सिंग होम पहुंचकर डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की। हॉस्टल की तलाशी ली गई, जहां हर कमरे पर कुछ लिखा होने की बात सामने आई। IG जितेंद्र कुमार राणा खुद जांच की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी एंगल से जांच हो रही है, लेकिन अभी गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई।
राजनीतिक उबाल और CBI की मांग
मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने आधी रात हॉस्टल का दौरा किया और अमित शाह को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की। VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। RJD नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। रोहिणी आचार्या सहित कई नेताओं ने न्याय की मांग की।
निष्कर्ष: छात्र सुरक्षा पर सवाल
यह घटना बिहार में छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल व्यवस्था और पुलिस जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करती है। एक होनहार लड़की का सपना चूर-चूर हो गया, जबकि परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। SIT जांच जारी है, लेकिन परिवार और विपक्ष CBI की मांग पर अड़े हैं। अगर आरोप साबित हुए तो यह बिहार के सुशासन मॉडल पर करारा तमाचा होगा। समाज को ऐसी कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होना होगा ताकि कोई और बेटी शिकार न बने।
Sources: प्रभात खबर