Patna NEET student death case Bihar govt recommends CBI probePatna NEET student death case Bihar govt recommends CBI probe

31 जनवरी 2026, पटना नीट छात्रा मौत मामला, बिहार सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की: बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे राज्य को झकझोड़ कर रख दिया है। जहानाबाद जिले की 17-18 वर्षीय छात्रा जनवरी 2026 की शुरुआत में पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश हालत में मिली थी। इलाज के दौरान 11 जनवरी को मेदांता अस्पताल में उसकी मौत हो गई। शुरू में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न के सबूत मिलने के बाद मामला हत्या और बलात्कार का रूप ले चुका है। अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है— बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से मामले की CBI जांच कराने की सिफारिश की है। उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने इसकी जानकारी दी, जबकि राज्यपाल सचिवालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

मामले की शुरुआत और घटनाक्रम

छात्रा जहानाबाद की रहने वाली थी और पटना में एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में नीट की तैयारी कर रही थी। वह शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। सूत्रों के अनुसार, 6 या 7 जनवरी 2026 को वह अपने कमरे में बेहोश मिली। हॉस्टल स्टाफ ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां वह कोमा में चली गई। कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 11 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप है कि छात्रा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। उन्होंने दावा किया कि मौत से पहले उनकी बेटी के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और कई लोगों ने मिलकर यह वारदात अंजाम दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान और अन्य सबूतों का जिक्र है। सबसे महत्वपूर्ण, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (FSL) की रिपोर्ट में छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर मानव स्पर्म के निशान मिले, जिससे यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई। DNA प्रोफाइलिंग के लिए पुलिस ने हॉस्टल स्टाफ, परिचितों और परिजनों समेत दर्जनों लोगों के सैंपल लिए हैं।

पुलिस जांच पर सवाल और SIT का गठन

मामला सामने आने के बाद पटना पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या का केस बताया। पटना SSP ने प्रारंभिक जांच में यौन उत्पीड़न से इनकार किया था। हालांकि, जैसे-जैसे सबूत सामने आए, दबाव बढ़ता गया। विपक्षी दलों— खासकर RJD, कांग्रेस और CPI(ML)— ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए और CBI जांच की मांग की। सड़कों पर प्रदर्शन हुए, छात्र संगठनों ने हॉस्टल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

दबाव में बिहार सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार किया और CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स की छानबीन शुरू की। लेकिन 20 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस खुलासा नहीं हुआ। परिजनों ने डीजीपी से मुलाकात कर पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप लगाया। छात्रा की मां ने कहा कि पुलिस उन्हें समझौता करने की सलाह दे रही है। परिवार ने धमकी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार आत्महत्या कर लेगा।

CBI जांच की सिफारिश और अधिसूचना

31 जनवरी 2026 को मामले में निर्णायक मोड़ आया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर जानकारी दी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से इस मामले (कांड संख्या 14/26) की जांच CBI को सौंपने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा, “घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।”

राज्यपाल सचिवालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि CBI जांच में सहयोग किया जाए और केंद्र को अनुशंसा भेजी गई है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य विषय होने के कारण CBI जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति अनिवार्य होती है। अब केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद CBI औपचारिक रूप से जांच शुरू करेगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सामाजिक सरोकार

विपक्ष ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन देरी पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा कि हाईकोर्ट की जनहित याचिका और प्रदर्शनों के दबाव में ही सरकार झुकी। RJD ने पुलिस की नाकामी को उजागर किया। दूसरी ओर, सत्ताधारी NDA ने इसे निष्पक्ष जांच की दिशा में कदम बताया।

यह मामला केवल एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं है। यह कोचिंग हब बने पटना और बिहार में छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, हॉस्टलों में अवैध संचालन, CCTV की कमी, महिला वार्डन की अनुपस्थिति— ये सभी मुद्दे सामने आए हैं। पटना हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में हॉस्टल रेगुलेशन अथॉरिटी बनाने और सुरक्षा मानकों को अनिवार्य करने की मांग की गई है।

आगे की राह

CBI जांच से उम्मीद है कि मामले का पूरा सच सामने आएगा। अपराधी जो भी हो, सजा मिलेगी और छात्राओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। परिजनों का दर्द समझा जा सकता है— उन्होंने अपनी बेटी खो दी और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। बिहार सरकार को अब हॉस्टलों के रेगुलेशन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

यह घटना नीट की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं पर बढ़ते मानसिक दबाव को भी रेखांकित करती है। कोचिंग संस्कृति में सुधार की जरूरत है, जहां छात्र-छात्राएं सुरक्षित महसूस करें। CBI जांच न केवल इस मामले में न्याय दिलाएगी, बल्कि पूरे सिस्टम को सुधारने की दिशा में मील का पत्थर बनेगी।

Sources: न्यूज़ 18

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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